इस खंड के बारे में
यह खंड जीव कैसे जनन करते हैं? पर CBSE एवं अन्य बोर्ड परीक्षाओं जैसे प्रश्नों का संग्रह है। इससे आप प्रश्न-प्रारूप, अंक-वितरण एवं अपेक्षित उत्तर-शैली सीखेंगे।
अध्ययन रणनीति:
- पहले स्वयं हल करें।
- उत्तर की लंबाई अंकों के अनुसार रखें (1 अंक = 1–2 पंक्ति; 3 अंक = 5–6 बिंदु/नामांकित आरेख; 5 अंक = विस्तृत उत्तर सहित आरेख)।
- आरेख (पुष्प L.S., नर तंत्र, मादा तंत्र) स्वच्छ बनाएँ।
- सटीक NCERT शब्दावली का प्रयोग करें।
प्रश्न अंकों के अनुसार वर्गीकृत हैं।
1-अंकीय प्रश्न (MCQ / अति लघु)
प्र1. [CBSE] मुकुलन द्वारा अलैंगिक जनन होता है — (a) अमीबा (b) यीस्ट (c) प्लैज़्मोडियम (d) स्पाइरोगाइरा हल: (b) यीस्ट।
प्र2. [CBSE] पुष्प का परागकोश किसे रखता है — (a) बाह्यदल (b) बीजांड (c) परागकण (d) स्त्रीकेसर हल: (c) परागकण।
प्र3. [CBSE] मादा जनन तंत्र का भाग नहीं है — (a) अंडाशय (b) अंडवाहिका (c) गर्भाशय (d) शुक्रवाहिका हल: (d) शुक्रवाहिका (नर तंत्र का भाग)।
प्र4. [CBSE] मानव में निषेचन होता है — (a) गर्भाशय (b) अंडाशय (c) अंडवाहिका (d) योनि हल: (c) अंडवाहिका (फैलोपियन नलिका)।
1-अंकीय प्रश्न (जारी)
प्र5. [CBSE] पुष्प का कौन-सा भाग फल बनता है? हल: निषेचन के पश्चात अंडाशय फल बनता है।
प्र6. [CBSE] वृषण वृषण कोष में, उदर के बाहर, क्यों होते हैं? हल: क्योंकि शुक्राणु-निर्माण के लिए शरीर से कम ताप चाहिए।
प्र7. [CBSE] कौन-सी गर्भनिरोधक विधि यौन रोगों से भी बचाती है? हल: अवरोधक विधियाँ (कंडोम)।
प्र8. [CBSE] एक जीवाणुजनित एवं एक विषाणुजनित यौन रोग बताइए। हल: जीवाणुजनित — सिफलिस (या गोनोरिया); विषाणुजनित — एच.आई.वी.-एड्स (या मस्सा)।
2-अंकीय प्रश्न
प्र9. [CBSE] द्विखंडन बहुखंडन से कैसे भिन्न है? हल: द्विखंडन में जनक दो संतति कोशिकाओं (अमीबा) एवं बहुखंडन में एक साथ अनेक संतति कोशिकाओं (प्लैज़्मोडियम) में बँटता है।
प्र10. [CBSE] स्वपरागण एवं परपरागण में अंतर बताइए। हल: स्वपरागण — परागकण उसी पुष्प के वर्तिकाग्र पर। परपरागण — परागकण एक पुष्प से दूसरे तक, प्रायः वायु, जल या जंतुओं द्वारा।
2-अंकीय प्रश्न (जारी)
प्र11. [CBSE] शुक्राशय एवं प्रोस्टेट ग्रंथि का क्या कार्य है? हल: ये शुक्राणुओं में स्राव मिलाते हैं जो उनके परिवहन को आसान बनाता एवं पोषण देता है (शुक्राणु + तरल = वीर्य)।
प्र12. [CBSE] विविधता किसी स्पीशीज़ के लिए लाभदायक क्यों है? हल: विविधता कुछ जीवों को बदलते पर्यावरण (ताप, जल-स्तर) में जीवित रहने योग्य बनाती है, अतः स्पीशीज़ की उत्तरजीविता सुनिश्चित करती है एवं विकास का आधार है।
प्र13. [CBSE] कायिक प्रवर्धन के दो लाभ बताइए। हल: (1) बीज न बनाने वाले पादप (केला, गुलाब) भी उगाए जा सकते हैं; (2) संतति आनुवंशिक रूप से समान होती है एवं जल्दी पुष्प-फल देती है।
3-अंकीय प्रश्न
प्र14. [CBSE] परागण एवं निषेचन में अंतर बताइए। पहले कौन होता है? हल: परागण — परागकोश से वर्तिकाग्र तक परागकणों का स्थानांतरण (संलयन नहीं)। निषेचन — नर युग्मक का बीजांड के अंड से संलयन → युग्मनज। पहले परागण होता है, फिर निषेचन।
प्र15. [CBSE] अपरा की संरचना एवं कार्य का वर्णन कीजिए। हल: संरचना: गर्भाशय-भित्ति में धँसी तश्तरी; भ्रूण-ओर अंकुर, माता-ओर रक्त-जगहें (बड़ा सतही क्षेत्रफल)। कार्य: ग्लूकोज़ व ऑक्सीजन माता से भ्रूण तक; अपशिष्ट भ्रूण से माता तक।
3-अंकीय प्रश्न (जारी)
प्र16. [CBSE] गर्भनिरोधन की विभिन्न विधियाँ (एक-एक पंक्ति) बताइए। हल: (1) अवरोधक — कंडोम; शुक्राणु रोके + यौन रोग घटाए। (2) हार्मोनल — गोलियाँ; अंड-मोचन रोके। (3) IUCD — लूप/कॉपर-टी (गर्भाशय में)। (4) शल्य — पुरुष नसबंदी (शुक्रवाहिका)/स्त्री नसबंदी (फैलोपियन नलिका)।
प्र17. [CBSE] ऋतुस्राव क्यों होता है? यह कितने दिन रहता है? हल: हर माह गर्भाशय मोटी, रक्त-भरपूर भित्ति बनाता है। अंड निषेचित न होने पर यह भित्ति टूटकर योनि से रक्त एवं श्लेष्मा के रूप में निकलती है। यह लगभग 2–8 दिन रहता है।
प्र18. [CBSE] "पुनर्जनन जनन के समान नहीं है।" उदाहरण सहित पुष्टि कीजिए। हल: पुनर्जनन (प्लेनेरिया, हाइड्रा) में शरीर के टुकड़े पूर्ण जीव बन जाते हैं, पर जीव सामान्यतः कटने पर निर्भर नहीं रहते, अतः यह संतति उत्पन्न करने की नियमित विधि नहीं — इसलिए जनन नहीं है।
5-अंकीय प्रश्न
प्र19. [CBSE] (अ) पुष्प के अनुदैर्घ्य काट का नामांकित आरेख बनाइए। (ब) इसके नर एवं मादा जननात्मक भाग एवं उनके उप-भाग बताइए। हल: (अ) पुष्प का L.S. बनाकर नामांकित करें: बाह्यदल, दल, पुंकेसर (परागकोश + तंतु), स्त्रीकेसर (वर्तिकाग्र + वर्तिका + अंडाशय), बीजांड। (ब) नर भाग — पुंकेसर: परागकोश (परागकण बनाता है) + तंतु। मादा भाग — स्त्रीकेसर: वर्तिकाग्र + वर्तिका + अंडाशय (बीजांड सहित, प्रत्येक में अंड कोशिका)।
प्र20. [CBSE] एक पुष्पी पादप में परागण से बीज बनने तक लैंगिक जनन का वर्णन कीजिए। हल: (1) परागण (परागकोश → वर्तिकाग्र)। (2) परागनलिका वर्तिका से होकर अंडाशय तक। (3) निषेचन → युग्मनज। (4) युग्मनज → भ्रूण। (5) बीजांड → बीज, अंडाशय → फल; शेष भाग सूखकर गिर जाते हैं।
5-अंकीय प्रश्न (जारी)
प्र21. [CBSE] (अ) मानव नर जनन तंत्र के भाग एवं कार्य लिखिए। (ब) शुक्राणु का मार्ग बताइए। हल: (अ) वृषण (वृषण कोष में) — शुक्राणु + टेस्टोस्टेरोन; शरीर से कम ताप पर। शुक्रवाहिका — शुक्राणु ले जाती है। शुक्राशय + प्रोस्टेट — तरल (परिवहन + पोषण)। मूत्रमार्ग — मूत्र व शुक्राणु का सामान्य मार्ग। शिश्न — शुक्राणु पहुँचाता है। (ब) मार्ग: वृषण → शुक्रवाहिका → मूत्रमार्ग → शिश्न।
प्र22. [CBSE] समझाइए कि मादा शरीर हर माह संभावित गर्भ के लिए कैसे तैयार होता है, और निषेचन न होने पर क्या होता है। हल:
- एक अंडाशय प्रति माह एक अंड मुक्त करता है; अंड अंडवाहिका में जाता है।
- गर्भाशय-भित्ति मोटी (स्पंजी, रक्त-भरपूर) होती है।
- निषेचन होने पर: भ्रूण गर्भाशय में स्थापित होकर अपरा द्वारा पोषित (~9 माह), फिर संकुचन से जन्म।
- निषेचन न होने पर: अंड ~1 दिन जीवित; मोटी भित्ति टूटकर ऋतुस्राव (रक्त+श्लेष्मा, ~2–8 दिन) के रूप में निकलती है।