लड़कियों में यौवनारंभ — तथा मादा तंत्र का कार्य
लड़कों की तरह लड़कियों में भी यौवनारंभ होता है। कुछ परिवर्तन समान होते हैं (बगल एवं जननांग क्षेत्र में बाल, तैलीय त्वचा), परंतु कुछ लड़कियों में विशिष्ट होते हैं —
- स्तन के आकार में वृद्धि, स्तनाग्र की त्वचा का गहरा होना।
- ऋतुस्राव (menstruation) का आरंभ।
मादा जनन तंत्र का कार्य नर तंत्र से बड़ा है — यह न केवल अंड (मादा युग्मक) बनाता है, बल्कि शुक्राणु ग्रहण करना, निषेचन कराना, तथा विकसित होते शिशु का लगभग नौ माह तक पोषण एवं आश्रय भी करता है।
[NEET महत्वपूर्ण] मादा युग्मक (अंड) बड़ा एवं अगतिशील होता है और प्रारंभिक भ्रूण के लिए भोजन संचित करता है — शुक्राणु के ठीक विपरीत।
अंडाशय — जहाँ अंड बनते हैं
मादा युग्मक अंड (ova) का निर्माण अंडाशय (ovaries) नामक जोड़ी अंगों में होता है। अंडाशय कुछ हार्मोन (जैसे एस्ट्रोजन) भी बनाते हैं — अतः वृषण की तरह इनका भी दोहरा कार्य है।
एक उल्लेखनीय तथ्य — जन्म के समय बालिका के अंडाशय में हज़ारों अपरिपक्व अंड पहले से होते हैं। यौवनारंभ पर ये परिपक्व होने लगते हैं और हर माह एक अंडाशय से एक अंड निकलता है।
[बोर्ड ट्रैप] दो संख्याएँ याद रखें — जन्म पर हज़ारों अपरिपक्व अंड, परंतु यौवनारंभ के बाद प्रति माह केवल एक अंड परिपक्व एवं मुक्त होता है।
मादा तंत्र के अंग

आरेख के अंग्रेज़ी लेबलों के हिन्दी अर्थ:
| English (in image) | हिन्दी |
|---|---|
| OVARY | अंडाशय |
| OVIDUCT / FALLOPIAN TUBE | अंडवाहिका |
| UTERUS | गर्भाशय |
| CERVIX | गर्भाशय ग्रीवा |
| VAGINA | योनि |
अंड की यात्रा से अंगों को समझें:
- अंडाशय — अंड बनाता एवं मुक्त करता है।
- अंडवाहिका / फैलोपियन नलिका (oviduct) — अंड को अंडाशय से गर्भाशय की ओर ले जाती है; यहीं अंड शुक्राणु से मिल सकता है।
- गर्भाशय (uterus) — दोनों अंडवाहिकाएँ मिलकर इस लचीली थैली-जैसी संरचना का निर्माण करती हैं; यहीं निषेचित अंड शिशु के रूप में विकसित होता है।
- गर्भाशय ग्रीवा (cervix) — गर्भाशय का निचला संकरा द्वार।
- योनि (vagina) — बाहर खुलने वाला मार्ग; शुक्राणु यहीं प्रवेश करते हैं और बाद में शिशु का जन्म भी यहीं से होता है।
मुख्य बिंदु: निषेचन अंडवाहिका में होता है, जबकि शिशु का विकास गर्भाशय में होता है।
निषेचन — अंड एवं शुक्राणु का मिलन
लैंगिक समागम के दौरान शुक्राणु योनि में छोड़े जाते हैं। वे ऊपर की ओर बढ़ते हुए गर्भाशय से होकर अंडवाहिका तक पहुँचते हैं, जहाँ अंड से मिल सकते हैं।
यदि यहाँ कोई शुक्राणु अंड से संलयित हो जाए, तो निषेचन होता है और युग्मनज (zygote) बनता है। अतः याद रखें — मानव में निषेचन अंडवाहिका (फैलोपियन नलिका) में होता है, गर्भाशय में नहीं।
आर्तव चक्र — जब अंड निषेचित नहीं होता
हर माह शरीर संभावित गर्भधारण के लिए तैयारी करता है। चूँकि प्रति माह एक अंड मुक्त होता है, गर्भाशय भी हर माह तैयार होता है — इसकी भित्ति (अस्तर) मोटी, स्पंजी एवं रक्त से भरपूर हो जाती है ताकि भ्रूण का पोषण हो सके।
अब दो संभावनाएँ हैं:
- यदि अंड निषेचित हो जाए → भ्रूण इस मोटी भित्ति में स्थापित हो जाता है, गर्भावस्था आरंभ।
- यदि अंड निषेचित न हो → अंड लगभग एक दिन जीवित रहता है। मोटी भित्ति की अब आवश्यकता नहीं, अतः यह धीरे-धीरे टूटकर योनि से रक्त एवं श्लेष्मा के रूप में बाहर आती है। यही ऋतुस्राव (menstruation) है।
मुख्य तथ्य: यह लगभग हर माह (~28 दिन का चक्र) होता है, 2 से 8 दिन तक रहता है, तथा यौवनारंभ पर आरंभ होता है।
[बोर्ड ट्रैप] "ऋतुस्राव क्यों होता है?" — क्योंकि अंड निषेचित नहीं होता, अतः भ्रूण-पोषण हेतु बनी मोटी गर्भाशय-भित्ति की आवश्यकता नहीं रहती और वह टूटकर रक्त व श्लेष्मा के रूप में बाहर आती है।
आर्तव चक्र का आरेख

आरेख के अंग्रेज़ी लेबलों के हिन्दी अर्थ:
| English (in image) | हिन्दी |
|---|---|
| MENSTRUATION | ऋतुस्राव (आर्तव) |
| OVULATION | अंडोत्सर्ग |
| uterine lining | गर्भाशय की भित्ति (अस्तर) |
| egg | अंड |
लगभग 28 दिन के चक्र में — दिन 1–5 ऋतुस्राव (भित्ति टूटना), दिन 6–13 भित्ति का पुनर्निर्माण, दिन 14 के आसपास अंडोत्सर्ग (एक अंड मुक्त), दिन 15–28 भित्ति का मोटा बने रहना। यदि अंड निषेचित न हो, तो भित्ति टूट जाती है और अगला चक्र आरंभ होता है।
स्मृति कैप्सूल — खंड 5
त्वरित पुनरावृत्ति: मादा तंत्र एवं आर्तव चक्र।
• यौवनारंभ (लड़कियाँ): स्तन-वृद्धि + ऋतुस्राव आरंभ। 1. अंडाशय → अंड + हार्मोन; जन्म पर हज़ारों अपरिपक्व अंड; प्रति माह एक अंड। 2. अंडवाहिका → अंड ले जाती है; निषेचन का स्थल। 3. गर्भाशय → शिशु के विकास का स्थल। 4. गर्भाशय ग्रीवा → निचला द्वार। 5. योनि → शुक्राणु ग्रहण; जन्म मार्ग। • मार्ग: अंडाशय → अंडवाहिका → गर्भाशय → ग्रीवा → योनि। • ऋतुस्राव: अंड निषेचित नहीं → भित्ति टूटकर रक्त+श्लेष्मा (~2–8 दिन)। • भ्रम न करें — निषेचन = अंडवाहिका; विकास = गर्भाशय।
हल किए गए उदाहरण
उदाहरण 1: NCERT — यौवनारंभ में लड़कियों में परिवर्तन
यौवनारंभ के समय लड़कियों में कौन-से परिवर्तन दिखाई देते हैं?
हल:
- स्तन के आकार में वृद्धि एवं स्तनाग्र की त्वचा का गहरा होना।
- ऋतुस्राव का आरंभ।
- बगल एवं जननांग क्षेत्र में बाल; तैलीय त्वचा (दोनों लिंगों में समान)।
उदाहरण 2: NCERT — ऋतुस्राव क्यों होता है?
ऋतुस्राव क्यों होता है?
हल: हर माह अंडाशय एक अंड मुक्त करता है और गर्भाशय एक मोटी, स्पंजी, रक्त-भरपूर भित्ति तैयार करता है ताकि निषेचित अंड का पोषण हो सके।
- यदि अंड निषेचित न हो, तो यह भित्ति अनावश्यक हो जाती है।
- अतः यह टूटकर योनि से रक्त एवं श्लेष्मा के रूप में बाहर आती है — यही ऋतुस्राव है (लगभग 2–8 दिन)।
उदाहरण 3: निषेचन का स्थल
मानव मादा में निषेचन कहाँ होता है? शुक्राणु का अंड तक का मार्ग बताइए।
हल: निषेचन अंडवाहिका (फैलोपियन नलिका) में होता है।
शुक्राणु का मार्ग: शुक्राणु योनि में छोड़े जाते हैं → गर्भाशय से होकर ऊपर जाते हैं → अंडवाहिका में अंड से मिलकर संलयित होते हैं → युग्मनज बनता है।
उदाहरण 4: अंगों का नामकरण
बताइए कि कौन-सा मादा अंग: (अ) अंड बनाता है, (ब) निषेचन का स्थल है, (स) शिशु का विकास-स्थल है, (द) शुक्राणु ग्रहण करता है।
हल: (अ) अंड बनाता है → अंडाशय (ब) निषेचन का स्थल → अंडवाहिका (स) शिशु का विकास-स्थल → गर्भाशय (द) शुक्राणु ग्रहण करता है → योनि