इस खंड के बारे में
यह अध्याय 7 के हर विषय को समेटते हुए 30+ हल किए गए उदाहरणों का संग्रह है — जनन क्यों, सभी अलैंगिक विधियाँ, पादपों में लैंगिक जनन, मानव नर एवं मादा तंत्र, निषेचन एवं गर्भावस्था, जननात्मक स्वास्थ्य, गर्भनिरोधन एवं यौन रोग। सभी NCERT पाठ्य एवं अभ्यास प्रश्न भी यहाँ हल हैं।
बोर्ड तैयारी सुझाव:
- पहले स्वयं हल करें, फिर मिलाएँ।
- मुख्य परिभाषाएँ एवं आरेख (पुष्प, नर तंत्र, मादा तंत्र) याद रखें।
- उत्तर की लंबाई अंकों के अनुसार रखें।
- NCERT अभ्यास अवश्य हल करें।
आरंभ करें!
उदाहरण 1: NCERT — डी.एन.ए. प्रतिलिपि का महत्व
जनन में डी.एन.ए. की प्रतिलिपि बनाने का क्या महत्व है?
हल: डी.एन.ए. में जीव की शरीर-रूपरेखा की सूचना होती है। प्रतिलिपि यह सुनिश्चित करती है कि संतति को जनक के समान सूचना मिले, जिससे वह जनक जैसी दिखे। इसमें उत्पन्न छोटी विविधताएँ विकास का आधार भी हैं।
उदाहरण 2: NCERT — विविधता एवं स्पीशीज़
विविधता स्पीशीज़ के लिए लाभदायक है परंतु व्यक्ति के लिए आवश्यक क्यों नहीं?
हल: पर्यावरण बदलने पर विविधताएँ कुछ जीवों को अनुकूल बनाकर उनकी उत्तरजीविता सुनिश्चित करती हैं। किसी एक व्यक्ति के लिए कोई विविधता लाभकारी हो भी सकती है और नहीं भी — यह केवल समष्टि के स्तर पर उत्तरजीविता देती है।
उदाहरण 3: NCERT — द्विखंडन बनाम बहुखंडन
द्विखंडन बहुखंडन से कैसे भिन्न है?
हल: द्विखंडन में जनक दो संतति कोशिकाओं में (अमीबा, जीवाणु) तथा बहुखंडन में एक साथ अनेक संतति कोशिकाओं में (प्लैज़्मोडियम) बँटता है। अंतर: एक बार में बनी संतति कोशिकाओं की संख्या।
उदाहरण 4: NCERT — बीजाणु द्वारा जनन का लाभ
बीजाणु द्वारा जनन करने से जीव को क्या लाभ है?
हल: बीजाणु (राइज़ोपस) — (1) बड़ी संख्या में बनते हैं; (2) मोटी सुरक्षात्मक भित्ति से ढके रहते हैं जो प्रतिकूल परिस्थितियों में रक्षा करती है; (3) हल्के होने से आसानी से फैलते हैं।
उदाहरण 5: NCERT — जटिल जीव एवं पुनर्जनन
जटिल जीव पुनर्जनन से नया जीव क्यों नहीं बना सकते?
हल: जटिल जीव कोशिकाओं का साधारण समूह नहीं होते; उनकी कोशिकाएँ ऊतकों, अंगों एवं तंत्रों में निश्चित स्थानों पर होती हैं। किसी टुकड़े से सभी तंत्रों सहित पूर्ण शरीर पुनः व्यवस्थित नहीं हो सकता, अतः वे विशिष्ट जनन कोशिकाओं/अंगों का उपयोग करते हैं।
उदाहरण 6: NCERT — कायिक प्रवर्धन क्यों?
कुछ पादपों हेतु कायिक प्रवर्धन क्यों अपनाया जाता है?
हल: (1) बीज न बनाने वाले पादप (केला, गुलाब, चमेली) भी उगाए जा सकते हैं; (2) संतति जनक के आनुवंशिक रूप से समान होती है; (3) बीज से उगाए पौधों की अपेक्षा जल्दी पुष्प-फल देते हैं।
उदाहरण 7: NCERT — डी.एन.ए. प्रतिलिपि क्यों आवश्यक?
डी.एन.ए. की प्रतिलिपि जनन का आवश्यक भाग क्यों है?
हल: डी.एन.ए. में शरीर-रूपरेखा की सूचना है। प्रतिलिपि यह सुनिश्चित करती है कि प्रत्येक संतति को यह पूरी सूचना मिले, ताकि वह जनक जैसा शरीर बना सके एवं जीवन-प्रक्रम कर सके। बिना प्रतिलिपि संतति के पास कोई खाका नहीं होगा।
उदाहरण 8: अलैंगिक बनाम लैंगिक जनन
अलैंगिक एवं लैंगिक जनन में तीन अंतर लिखिए।
हल:
| लक्षण | अलैंगिक | लैंगिक |
|---|---|---|
| जनक | एक | दो |
| युग्मक | नहीं बनते | नर+मादा युग्मक संलयन |
| विविधता | बहुत कम | अधिक |
उदाहरण 9: जनन विधि पहचानिए
जनन विधि बताइए: (अ) अमीबा (ब) प्लैज़्मोडियम (स) हाइड्रा (द) स्पाइरोगाइरा (य) राइज़ोपस।
हल: (अ) द्विखंडन (ब) बहुखंडन (स) मुकुलन (द) खंडन (य) बीजाणुजनन।
उदाहरण 10: NCERT अभ्यास — मुकुलन वाला जीव
मुकुलन द्वारा अलैंगिक जनन होता है: (a) अमीबा (b) यीस्ट (c) प्लैज़्मोडियम (d) लेस्मानिया।
हल: (b) यीस्ट। यीस्ट मुकुल निकालता है जो अलग होकर नया जीव बनते हैं।
उदाहरण 11: पुनर्जनन बनाम जनन
क्या पुनर्जनन जनन के समान है? उदाहरण सहित समझाइए।
हल: नहीं। पुनर्जनन (हाइड्रा, प्लेनेरिया) में शरीर के टुकड़े पूर्ण जीव बन जाते हैं, पर जीव सामान्यतः कटने पर निर्भर नहीं रहते। जनन संतति उत्पन्न करने की नियमित विधि है, अतः पुनर्जनन जनन नहीं है।
उदाहरण 12: ऊतक संवर्धन
ऊतक संवर्धन क्या है? एक उपयोग बताइए।
हल: पादप के वर्धनशील शीर्ष से ऊतक/कोशिकाएँ लेकर कृत्रिम माध्यम में विभाजित कराकर कैलस बनाया जाता है, जिससे पौधे तैयार होते हैं। उपयोग: एक जनक से अनेक रोगमुक्त पौधे बनाना (सजावटी पौधों में प्रचलित)।
उदाहरण 13: NCERT — परागण बनाम निषेचन
परागण निषेचन से कैसे भिन्न है?
हल: परागण = परागकोश से वर्तिकाग्र तक परागकणों का स्थानांतरण (युग्मक-संलयन नहीं)। निषेचन = नर युग्मक का अंड से संलयन → युग्मनज। क्रम: पहले परागण, फिर निषेचन।
उदाहरण 14: स्व बनाम पर परागण
स्वपरागण एवं परपरागण में अंतर बताइए।
हल: स्वपरागण — परागकण उसी पुष्प के वर्तिकाग्र पर। परपरागण — परागकण एक पुष्प से दूसरे तक, प्रायः वायु, जल या जंतुओं द्वारा।
उदाहरण 15: पुष्प के भाग
पुष्प के चार प्रमुख चक्र बताइए एवं कौन-से जननात्मक हैं?
हल: (1) बाह्यदल (रक्षा), (2) दल (आकर्षण), (3) पुंकेसर — नर जननात्मक, (4) स्त्रीकेसर — मादा जननात्मक। जननात्मक भाग = पुंकेसर एवं स्त्रीकेसर।
उदाहरण 16: स्त्रीकेसर के भाग
स्त्रीकेसर के तीन भाग बताइए एवं अंडाशय में क्या होता है?
हल: स्त्रीकेसर = वर्तिकाग्र + वर्तिका + अंडाशय। अंडाशय में बीजांड होते हैं, और प्रत्येक बीजांड में एक अंड कोशिका होती है।
उदाहरण 17: NCERT अभ्यास — परागकोश में क्या?
परागकोश में होते हैं: (a) बाह्यदल (b) बीजांड (c) स्त्रीकेसर (d) परागकण।
हल: (d) परागकण। परागकोश पुंकेसर (नर भाग) का ऊपरी भाग है जो नर युग्मक वाले परागकण बनाता है।
उदाहरण 18: निषेचन के पश्चात परिवर्तन
निषेचन के पश्चात पुष्प के भागों में क्या परिवर्तन होते हैं?
हल: युग्मनज → भ्रूण; बीजांड → बीज; अंडाशय → फल; तथा दल, बाह्यदल, पुंकेसर, वर्तिका, वर्तिकाग्र सूखकर गिर जाते हैं।
उदाहरण 19: एकलिंगी बनाम द्विलिंगी पुष्प
एकलिंगी एवं द्विलिंगी पुष्प में अंतर, उदाहरण सहित।
हल: एकलिंगी — केवल पुंकेसर या केवल स्त्रीकेसर (पपीता, तरबूज़)। द्विलिंगी — दोनों उपस्थित (गुड़हल, सरसों)।
उदाहरण 20: परागनलिका
परागण के बाद नर युग्मक अंड तक कैसे पहुँचता है?
हल: परागकण के वर्तिकाग्र पर पहुँचने के बाद उससे परागनलिका निकलती है जो वर्तिका से होकर अंडाशय तक जाती है और नर युग्मक को बीजांड के अंड तक पहुँचाती है, जहाँ निषेचन होता है।
उदाहरण 21: NCERT — वृषण के कार्य
मानव में वृषण के कार्य क्या हैं?
हल: (1) शुक्राणुओं का निर्माण; (2) टेस्टोस्टेरोन का स्राव, जो शुक्राणु-निर्माण नियंत्रित करता एवं यौवनारंभ के लक्षण लाता है।
उदाहरण 22: वृषण कोष शरीर के बाहर क्यों?
वृषण शरीर के बाहर वृषण कोष में क्यों होते हैं?
हल: क्योंकि शुक्राणु-निर्माण के लिए शरीर के ताप से कम ताप चाहिए, जो शरीर के बाहर स्थित वृषण कोष प्रदान करता है।
उदाहरण 23: NCERT — शुक्राशय एवं प्रोस्टेट
शुक्राशय एवं प्रोस्टेट ग्रंथि का कार्य क्या है?
हल: ये शुक्रवाहिका से गुजरते शुक्राणुओं में स्राव मिलाते हैं जो परिवहन आसान बनाता एवं पोषण देता है। (शुक्राणु + तरल = वीर्य।)
उदाहरण 24: NCERT अभ्यास — मादा तंत्र का भाग नहीं
निम्न में मादा जनन तंत्र का भाग नहीं है: (a) अंडाशय (b) गर्भाशय (c) शुक्रवाहिका (d) फैलोपियन नलिका।
हल: (c) शुक्रवाहिका — यह नर तंत्र का भाग है।
उदाहरण 25: NCERT — लड़कियों में यौवन-परिवर्तन
यौवनारंभ में लड़कियों में क्या परिवर्तन होते हैं?
हल: (1) स्तन-वृद्धि एवं स्तनाग्र का गहरा होना; (2) ऋतुस्राव का आरंभ; (3) बगल/जननांग क्षेत्र में बाल, तैलीय त्वचा (सामान्य)।
उदाहरण 26: NCERT — भ्रूण को पोषण
माता के शरीर में भ्रूण को पोषण कैसे मिलता है?
हल: अपरा द्वारा — गर्भाशय-भित्ति में धँसी तश्तरी, भ्रूण-ओर अंकुर एवं माता-ओर रक्त-जगहें; इससे ग्लूकोज़ व ऑक्सीजन माता से भ्रूण तक एवं अपशिष्ट भ्रूण से माता तक जाते हैं।
उदाहरण 27: NCERT — ऋतुस्राव क्यों?
ऋतुस्राव क्यों होता है?
हल: हर माह गर्भाशय मोटी, स्पंजी, रक्त-भरपूर भित्ति बनाता है। अंड निषेचित न होने पर यह भित्ति अनावश्यक होकर टूटकर योनि से रक्त एवं श्लेष्मा के रूप में निकलती है (~2–8 दिन)।
उदाहरण 28: NCERT — कॉपर-टी एवं यौन रोग
क्या कॉपर-टी स्त्री को यौन रोगों से बचाएगी?
हल: नहीं। कॉपर-टी IUCD है जो केवल गर्भ रोकती है; अवरोध न होने से यौन रोगों से रक्षा नहीं करती। केवल अवरोधक विधियाँ (कंडोम) ऐसा करती हैं।
उदाहरण 29: NCERT — गर्भनिरोधन की विधियाँ
गर्भनिरोधन की विभिन्न विधियाँ बताइए।
हल: (1) अवरोधक — कंडोम (यौन रोग भी रोके); (2) हार्मोनल — गोलियाँ (अंड-मोचन रोके); (3) IUCD — लूप, कॉपर-टी; (4) शल्य — पुरुष नसबंदी (शुक्रवाहिका), स्त्री नसबंदी (फैलोपियन नलिका)।
उदाहरण 30: NCERT अभ्यास — लैंगिक जनन के लाभ
अलैंगिक की अपेक्षा लैंगिक जनन के क्या लाभ हैं?
हल: (1) यह दो जनकों का डी.एन.ए. संयोजित कर अधिक विविधता देता है; (2) यह विविधता बदलती परिस्थितियों में स्पीशीज़ की उत्तरजीविता बढ़ाती है; (3) यह विकास का आधार है।
उदाहरण 31: NCERT अभ्यास — एककोशिकीय बनाम बहुकोशिकीय
एककोशिकीय एवं बहुकोशिकीय जीवों में जनन विधियाँ कैसे भिन्न हैं?
हल: एककोशिकीय जीव सरल विधियों से जनन करते हैं जहाँ पूरी कोशिका विभाजित होती है (द्विखंडन, बहुखंडन, मुकुलन)। बहुकोशिकीय जीव, विशिष्ट ऊतकों-अंगों के कारण, जटिल विधियाँ अपनाते हैं जिनमें विशिष्ट जनन कोशिकाएँ/अंग होते हैं (बीजाणुजनन, कायिक प्रवर्धन, लैंगिक जनन)।
उदाहरण 32: NCERT अभ्यास — जनन एवं समष्टि की स्थिरता
जनन स्पीशीज़ की समष्टि को स्थिरता कैसे प्रदान करता है?
हल: जनन मृत जीवों के स्थान पर नई संतति देकर समष्टि का आकार स्थिर रखता है। सुसंगत डी.एन.ए. प्रतिलिपि निकेत-उपयोगी लक्षण बनाए रखती है, जबकि उत्पन्न विविधताएँ बदलती परिस्थितियों में उत्तरजीविता में सहायक हैं। अतः जनन समष्टि की स्थिरता से सीधे जुड़ा है।
उदाहरण 33: NCERT अभ्यास — गर्भनिरोधन के कारण
गर्भनिरोधक विधियाँ अपनाने के क्या कारण हो सकते हैं?
हल: (1) अवांछित गर्भ रोकना एवं स्त्री का स्वास्थ्य सुरक्षित रखना; (2) मानव जनसंख्या का आकार नियंत्रित करना; (3) यौन रोगों का प्रसार रोकना (अवरोधक विधियों से)।