निषेचन — युग्मनज बनता है
पिछले खंड में हम उस क्षण तक पहुँचे जब शुक्राणु अंड से मिलता है। अब कहानी आगे बढ़ाते हैं।
लैंगिक समागम के दौरान शुक्राणु योनि में छोड़े जाते हैं, जो गर्भाशय से होकर अंडवाहिका तक तैरते हैं। वहाँ एक शुक्राणु अंड से संलयित होता है। नर एवं मादा युग्मकों का यह संलयन निषेचन है, और इससे बनी एकल कोशिका युग्मनज (zygote) है।
युग्मनज नए जीव की प्रथम कोशिका है, जिसमें दोनों जनकों का डी.एन.ए. होता है।
मुख्य बिंदु: निषेचन = शुक्राणु + अंड → युग्मनज; यह अंडवाहिका में होता है।
युग्मनज से भ्रूण एवं गर्भ तक

आरेख के अंग्रेज़ी लेबलों के हिन्दी अर्थ:
| English (in image) | हिन्दी |
|---|---|
| ZYGOTE | युग्मनज |
| EMBRYO | भ्रूण |
| IMPLANTATION | अंतर्रोपण |
| FOETUS | गर्भस्थ भ्रूण |
| OVIDUCT | अंडवाहिका |
| UTERUS | गर्भाशय |
युग्मनज अधिक समय तक एकल कोशिका नहीं रहता। गर्भाशय की ओर बढ़ते हुए यह विभाजित होता है — एक से दो, दो से चार — और कोशिकाओं का गोला (भ्रूण) बनाता है।
भ्रूण गर्भाशय तक पहुँचकर उसकी मोटी, स्पंजी भित्ति में स्थापित (अंतर्रोपित) हो जाता है। इसी कारण गर्भाशय-भित्ति पहले से तैयार की गई थी। गर्भाशय में भ्रूण बढ़ता है और अंग विकसित करता है — इस अवस्था में इसे गर्भ (foetus) कहते हैं।
क्रम: युग्मनज → भ्रूण (कोशिकाओं का गोला, गर्भाशय में स्थापित) → गर्भ (अंग विकसित)।
अपरा — शिशु की जीवन-रेखा

आरेख के अंग्रेज़ी लेबलों के हिन्दी अर्थ:
| English (in image) | हिन्दी |
|---|---|
| PLACENTA | अपरा |
| VILLI | अंकुर (रसांकुर) |
| MOTHER'S BLOOD SPACE | माता के रक्त का स्थान |
| UMBILICAL CORD | गर्भनाल |
| FOETUS | भ्रूण |
गर्भाशय में बंद भ्रूण को भोजन एवं ऑक्सीजन कैसे मिलती है? एक विशेष ऊतक अपरा (placenta) के द्वारा।
अपरा गर्भाशय की भित्ति में धँसी एक तश्तरीनुमा ऊतक है, जिसकी बनावट विनिमय के लिए बड़ा सतही क्षेत्रफल देती है:
- भ्रूण की ओर अँगुली-जैसे अंकुर (villi)।
- माता की ओर इन अंकुरों को घेरे रक्त की जगहें (blood spaces)।
इससे दो-तरफ़ा आवागमन होता है:
- ग्लूकोज़ एवं ऑक्सीजन माता के रक्त से भ्रूण तक (पोषण एवं श्वसन)।
- भ्रूण द्वारा बने अपशिष्ट भ्रूण से माता के रक्त में पहुँचकर बाहर निकलते हैं।
[NEET महत्वपूर्ण] अंकुर + रक्त की जगहें वाली बनावट वही है जो अन्य विनिमय-सतहों में देखी जाती है (छोटी आँत के अंकुर, फेफड़े के कूपिका) — जहाँ भी विनिमय चाहिए, वहाँ सतही क्षेत्रफल बढ़ाया जाता है।
गर्भावधि एवं जन्म
भ्रूण, फिर गर्भ, गर्भाशय में बढ़ता रहता है। माता के शरीर में शिशु का पूर्ण विकास लगभग नौ माह में होता है। इस अवधि को गर्भावधि (gestation) कहते हैं।
विकास पूर्ण होने पर शिशु गर्भाशय की पेशियों के लयबद्ध संकुचन के कारण जन्म लेता है। ये प्रबल, बार-बार होने वाले संकुचन शिशु को योनि (जन्म-मार्ग) से बाहर धकेलते हैं।
जन्म के बाद शिशु माता के दूध पर पलता है — इसीलिए यौवनारंभ एवं गर्भावस्था में स्तन दूध बनाने योग्य परिपक्व होते हैं।
संपूर्ण कहानी एक पंक्ति में
निषेचन (अंडवाहिका) → युग्मनज → भ्रूण (गर्भाशय में स्थापित) → गर्भ → ~9 माह (अपरा द्वारा पोषण) → गर्भाशय-पेशी संकुचन से जन्म।
स्मृति कैप्सूल — खंड 6
त्वरित पुनरावृत्ति: निषेचन से जन्म तक।
क्रम (यह शृंखला याद रखें!)
शुक्राणु + अंड → युग्मनज (अंडवाहिका में) → भ्रूण (कोशिकाओं का गोला, गर्भाशय में स्थापित) → गर्भ (अंग बनते हैं) → जन्म।
अपरा
1. क्या: गर्भाशय-भित्ति में धँसा तश्तरीनुमा ऊतक। 2. बनावट: भ्रूण की ओर अंकुर + माता की ओर रक्त की जगहें → बड़ा सतही क्षेत्रफल। 3. कार्य: ग्लूकोज़ + ऑक्सीजन (माता → भ्रूण); अपशिष्ट (भ्रूण → माता)।
मुख्य तथ्य
• गर्भावधि ≈ 9 माह। • जन्म = गर्भाशय-पेशियों का लयबद्ध संकुचन। • अंतर्रोपण मोटी गर्भाशय-भित्ति में। • क्रम: युग्मनज → भ्रूण → गर्भ।
हल किए गए उदाहरण
उदाहरण 1: NCERT — भ्रूण को पोषण कैसे मिलता है?
माता के शरीर के अंदर भ्रूण को पोषण कैसे मिलता है?
हल: भ्रूण को पोषण अपरा (placenta) नामक विशेष ऊतक द्वारा माता के रक्त से मिलता है।
- अपरा गर्भाशय-भित्ति में धँसी तश्तरी है।
- भ्रूण की ओर अंकुर एवं माता की ओर रक्त की जगहें होती हैं, जिससे बड़ा सतही क्षेत्रफल बनता है।
- इसके द्वारा ग्लूकोज़ एवं ऑक्सीजन माता से भ्रूण तक तथा भ्रूण के अपशिष्ट माता के रक्त में पहुँचते हैं।
उदाहरण 2: सही क्रम
सही क्रम में लगाइए: गर्भ, युग्मनज, भ्रूण। प्रत्येक अवस्था कहाँ होती है?
हल: सही क्रम: युग्मनज → भ्रूण → गर्भ।
- युग्मनज: अंडवाहिका में निषेचन से बनी एकल कोशिका।
- भ्रूण: विभाजित होती कोशिकाओं का गोला जो गर्भाशय में स्थापित होता है।
- गर्भ: गर्भाशय में वह अवस्था जहाँ अंग/शरीर-भाग विकसित हो चुके होते हैं।
उदाहरण 3: अपरा की बनावट एवं कार्य
अपरा की बनावट का वर्णन कीजिए तथा बताइए कि यह बनावट उसके कार्य के लिए कैसे उपयुक्त है।
हल: बनावट: अपरा गर्भाशय-भित्ति में धँसा तश्तरीनुमा ऊतक है, जिसकी भ्रूण की ओर अंकुर होते हैं, और ये माता की ओर रक्त की जगहों से घिरे रहते हैं।
उपयुक्तता: अंकुर एवं रक्त की जगहें बड़ा सतही क्षेत्रफल देती हैं, जिससे ग्लूकोज़ व ऑक्सीजन माता से भ्रूण तक तथा अपशिष्ट भ्रूण से माता तक कुशलता से जा सकते हैं।
उदाहरण 4: गर्भावधि एवं जन्म
मानव में गर्भावधि कितनी होती है और शिशु का जन्म कैसे होता है?
हल:
- गर्भावधि (माता के शरीर में शिशु के पूर्ण विकास का समय) लगभग नौ माह है।
- शिशु गर्भाशय की पेशियों के लयबद्ध संकुचन के कारण जन्म लेता है, जो उसे योनि से बाहर धकेलते हैं।
उदाहरण 5: संश्लेषण — संपूर्ण यात्रा
एक शुक्राणु ने अभी अंड को निषेचित किया है। शिशु के जन्म तक की सभी घटनाओं को क्रम से बताइए।
हल:
- निषेचन अंडवाहिका में → युग्मनज बनता है।
- युग्मनज बार-बार विभाजित होकर गर्भाशय की ओर बढ़ते हुए भ्रूण बनाता है।
- भ्रूण मोटी, स्पंजी गर्भाशय-भित्ति में स्थापित (अंतर्रोपित) होता है।
- भ्रूण बढ़कर अंग विकसित करता है → गर्भ।
- अपरा पूरे समय ग्लूकोज़, ऑक्सीजन देती एवं अपशिष्ट हटाती है।
- लगभग 9 माह (गर्भावधि) के बाद गर्भाशय-पेशियों के लयबद्ध संकुचन से शिशु का जन्म होता है।