त्वरित पुनरावृत्ति: दोहा-सार सारणी
| दोहा | विषय | मुख्य संदेश |
|---|---|---|
| 1 | मानव-जन्म की सार्थकता | गुणहीन जीवन व्यर्थ है |
| 2 | आत्म-सम्मान | 'पानी' (प्रतिष्ठा) की रक्षा सर्वोपरि |
| 3 | चिंता की विनाशकारी शक्ति | चिंता चिता से भी भयंकर |
| 4 | कर्मयोग | कर्म अपने हाथ, फल भाग्य के हाथ |
| 5 | अहंकार-त्याग | भक्ति के लिए अहंकार का त्याग आवश्यक |
| 6 | वाणी-संयम | जीभ की असंयत बातों का दंड सिर भुगतता है |
| 7 | लघुता का महत्व | उपयोगी लघुता व्यर्थ विशालता से श्रेष्ठ |
| 8 | एकाग्रता | मूल पर ध्यान देने से सब सिद्ध होता है |
[Exam Tip] दोहा 2 ('पानी') और दोहा 5 ('आपु अहै तो हरि नहीं') परीक्षा में सबसे अधिक पूछे जाने वाले दोहे हैं — इनकी शब्द-दर-शब्द व्याख्या अवश्य याद रखें।