Class 10 (Hindi Medium) · इतिहास · Chapter 2
भारत में राष्ट्रवाद
यह अध्याय 1920 के दशक से भारत में आधुनिक राष्ट्रवाद के विकास का अध्ययन करता है, जब यह महात्मा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस द्वारा चलाए गए उपनिवेश-विरोधी आंदोलन से घनिष्ठ रूप से जुड़ गया। यह बताता है कि प्रथम विश्व युद्ध, सत्याग्रह का विचार, रौलट एक्ट और जलियाँवाला बाग हत्याकांड ने भूमिका कैसे तैयार की; कैसे खिलाफ़त और असहयोग आंदोलन (1921) ने शहरवासियों, किसानों, जनजातियों व बागान मज़दूरों को — प्रत्येक के अपने स्वराज के विचार के साथ — अपने में समेटा; और चौरी चौरा के बाद गांधी ने इसे क्यों वापस लिया। फिर यह सविनय अवज्ञा की राह — साइमन कमीशन, पूर्ण स्वराज, और दांडी तक नमक यात्रा (1930) — आंदोलन का प्रसार व दमन, गांधी-इरविन समझौता व गोलमेज सम्मेलन, और विभिन्न सामाजिक समूहों की भागीदारी का अनुसरण करता है। अंत में यह सविनय अवज्ञा की सीमाओं (दलितों व मुसलमानों की चिंताओं) और उन सांस्कृतिक प्रक्रियाओं का परीक्षण करता है — भारत माता, लोक-साहित्य, गीत, ध्वज और इतिहास की पुनर्व्याख्या — जिनके माध्यम से सामूहिक अपनेपन की भावना गढ़ी गई। यह कक्षा 10 इतिहास (भारत और समकालीन विश्व II) बोर्ड पाठ्यक्रम का केंद्रीय अध्याय है।
Topics in this chapter
- 1
प्रथम विश्व युद्ध, सत्याग्रह और गांधीजी के आरंभिक आंदोलन
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- 2
रौलट एक्ट और जलियाँवाला बाग
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- 3
खिलाफ़त और असहयोग आंदोलन
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- 4
भिन्न धाराएँ: शहर और अवध का ग्रामीण अंचल
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- 5
आदिवासी और बागान संघर्ष; चौरी चौरा
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- 6
सविनय अवज्ञा और नमक यात्रा की ओर
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- 7
सविनय अवज्ञा आंदोलन और उसके प्रतिभागी
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- 8
सविनय अवज्ञा की सीमाएँ और सामूहिक अपनेपन की भावना
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- 9
प्रश्न और उत्तर
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- 10
बोर्ड के पिछले वर्षों के प्रश्न (Board PYQs)
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- 11
सारांश और त्वरित पुनरावृत्ति
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