Class 10 (Hindi Medium) गणित
Chapter-wise notes with quizzes. Free to read — no login needed.
Chapter 1: वास्तविक संख्याएँ
यह अध्याय कक्षा 10 के लिए वास्तविक संख्या पद्धति की नींव तैयार करता है। इसमें म.स. (HCF) ज्ञात करने के लिए यूक्लिड विभाजन प्रमेयिका तथा एल्गोरिथ्म (जिसे कई राज्य बोर्ड अब भी रखते हैं), अंकगणित की आधारभूत प्रमेय और अभाज्य गुणनखंडन विधि से म.स. व ल.स. ज्ञात करना, , और जैसी संख्याओं के अपरिमेय होने की उपपत्तियाँ, तथा परिमेय संख्याओं के दशमलव प्रसार (सांत बनाम असांत आवर्ती) सम्मिलित हैं। यह एक अधिक अंक दिलाने वाला, उपपत्ति एवं संख्यात्मक आधारित अध्याय है जो CBSE और राज्य बोर्ड दोनों परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
Chapter 2: बहुपद
यह अध्याय एक चर वाले बहुपद की अवधारणा को विकसित करता है — उसकी घात, प्रकार (रैखिक, द्विघात, त्रिघात), तथा बहुपद के शून्यक का अर्थ। यह शून्यकों के ज्यामितीय अर्थ को उन बिंदुओं के रूप में समझाता है जहाँ ग्राफ x-अक्ष को काटता है, द्विघात और त्रिघात बहुपदों के शून्यकों तथा गुणांकों के बीच संबंध स्थापित करता है, दिखाता है कि शून्यकों से बहुपद कैसे बनाया जाए, तथा बहुपदों के लिए विभाजन एल्गोरिथ्म (जिसे कई राज्य बोर्ड रखते हैं) को सम्मिलित करता है। यह एक अधिक अंक दिलाने वाला, अवधारणा-सह-गणना वाला अध्याय है जो CBSE और राज्य बोर्ड दोनों परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
Chapter 3: दो चर वाले रैखिक समीकरण युग्म
यह अध्याय दो चर वाले रैखिक समीकरणों के युग्मों और उन्हें हल करने की विभिन्न विधियों का अध्ययन करता है। इसमें शब्द समस्याओं से समीकरण बनाना, ग्राफीय विधि (प्रतिच्छेदी, संपाती और समांतर रेखाएँ), प्रतिस्थापन और विलोपन की बीजगणितीय विधियाँ, वज्र-गुणन विधि तथा किसी युग्म के संगत या असंगत होने की शर्तें (जिन्हें कई राज्य बोर्ड रखते हैं), और रैखिक समीकरण युग्म में समानीत किए जा सकने वाले समीकरण सम्मिलित हैं। यह एक अधिक अंक दिलाने वाला, अनुप्रयोग-समृद्ध अध्याय है जो CBSE और राज्य बोर्ड दोनों परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
Chapter 4: द्विघातीय समीकरण
यह अध्याय रूप के द्विघात समीकरणों और उन्हें हल करने की विधियों का परिचय देता है: गुणनखंडन, पूर्ण वर्ग बनाना, तथा द्विघात सूत्र। इसमें विविक्तकर और मूलों की प्रकृति (वास्तविक एवं भिन्न, वास्तविक एवं समान, या कोई वास्तविक मूल नहीं), तथा द्विघात समीकरणों में समानीत होने वाली अनेक शब्द समस्याएँ सम्मिलित हैं। यह एक अधिक अंक दिलाने वाला, अनुप्रयोग-समृद्ध अध्याय है जो CBSE और राज्य बोर्ड दोनों परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
Chapter 5: समांतर श्रेढ़ी
यह अध्याय समांतर श्रेढ़ियों (AP) का परिचय देता है — संख्याओं की वे सूचियाँ जिनमें प्रत्येक पद पिछले पद से एक नियत सार्व अंतर से भिन्न होता है। इसमें किसी AP तथा उसके प्रथम पद और सार्व अंतर की पहचान, वें पद का सूत्र , प्रथम पदों का योग , समांतर माध्य, AP में पद चुनना, तथा अनेक वास्तविक-जीवन शब्द समस्याएँ सम्मिलित हैं। यह एक अधिक अंक दिलाने वाला, सूत्र-आधारित अध्याय है जो CBSE और राज्य बोर्ड दोनों परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
Chapter 6: त्रिभुज
यह अध्याय समरूप त्रिभुजों का अध्ययन करता है। यह सर्वांगसम और समरूप आकृतियों के बीच अंतर, आधारभूत समानुपातिकता प्रमेय (थेल्स प्रमेय) और उसका विलोम, त्रिभुजों की समरूपता की तीन कसौटियाँ (AAA/AA, SSS, SAS), समरूप त्रिभुजों के क्षेत्रफलों के अनुपात पर प्रमेय, तथा पाइथागोरस प्रमेय और उसका विलोम (जिन्हें कई राज्य बोर्ड रखते हैं) समझाता है। यह एक उपपत्ति-और-अनुप्रयोग-समृद्ध अध्याय है जो CBSE और राज्य बोर्ड दोनों परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
Chapter 7: निर्देशांक ज्यामिति
यह अध्याय कार्तीय तल के माध्यम से बीजगणित और ज्यामिति को जोड़ता है। इसमें बिंदुओं को आलेखित करना और चतुर्थांश, दो बिंदुओं के बीच की दूरी का दूरी सूत्र, किसी बिंदु द्वारा किसी रेखाखंड को दिए अनुपात में विभाजित करने का विभाजन सूत्र (और मध्य-बिंदु सूत्र), तथा शीर्षों से त्रिभुज का क्षेत्रफल एवं संरेखता जाँच शामिल हैं (त्रिभुज का क्षेत्रफल युक्तिसंगत NCERT से हटा दिया गया है पर कई राज्य बोर्ड इसे रखते हैं)। अनुप्रयोगों में केंद्रक, चतुर्भुजों के प्रकार पहचानना, और निर्देशांक-ज्यामिति शब्द-समस्याएँ शामिल हैं। यह एक अधिक अंक देने वाला, सूत्र-आधारित अध्याय है जो CBSE और राज्य बोर्ड दोनों परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
Chapter 8: त्रिकोणमिति का परिचय
यह अध्याय समकोण त्रिभुज की भुजाओं के अनुपातों के माध्यम से त्रिकोणमिति का परिचय देता है। यह किसी न्यून कोण के छह त्रिकोणमितीय अनुपात (ज्या, कोज्या, स्पर्शज्या, व्युत्क्रमज्या, व्युत्क्रमकोज्या, कोस्पर्शज्या) परिभाषित करता है, मानक कोणों 0°, 30°, 45°, 60° और 90° के लिए उनके यथार्थ मान व्युत्पन्न करता है, मूलभूत त्रिकोणमितीय सर्वसमिकाएँ ( और इसकी सहचर) स्थापित करता है, और पूरक कोणों के त्रिकोणमितीय अनुपातों का अध्ययन करता है। यह एक सूत्र-समृद्ध, अधिक अंक देने वाला अध्याय है और त्रिकोणमिति के अनुप्रयोग (ऊँचाई और दूरी) की नींव है, जो CBSE और राज्य बोर्ड दोनों परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
Chapter 9: त्रिकोणमिति के कुछ अनुप्रयोग
यह अध्याय पिछले अध्याय के त्रिकोणमितीय अनुपातों को ऊँचाई और दूरी की वास्तविक-दुनिया की समस्याओं पर लागू करता है। यह दृष्टि रेखा, उन्नयन कोण और अवनमन कोण का परिचय देता है, और दिखाता है कि किसी स्थिति को समकोण त्रिभुज के रूप में मॉडल कर sin, cos और tan का उपयोग करते हुए अज्ञात ऊँचाई या दूरी कैसे हल करें। इसमें एकल-त्रिभुज समस्याएँ, दो त्रिभुजों या दो प्रेक्षकों वाली समस्याएँ, अवनमन-कोण स्थितियाँ, और मिश्रित वास्तविक-जीवन अनुप्रयोग शामिल हैं। गणनाएँ मानक कोणों 30°, 45° और 60° पर अत्यधिक निर्भर हैं। यह एक अधिक अंक देने वाला, अनुप्रयोग-केंद्रित अध्याय है जो CBSE और राज्य बोर्ड दोनों परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
Chapter 10: वृत्त
इस अध्याय में हम उन विभिन्न तरीकों का अध्ययन करते हैं जिनसे कोई रेखा किसी वृत्त से मिल सकती है और विशेष रूप से वृत्त की स्पर्श रेखा का — वह रेखा जो वृत्त को ठीक एक बिंदु पर स्पर्श करती है। यह दो मूलभूत स्पर्श रेखा प्रमेयों को सिद्ध करता है: वृत्त के किसी भी बिंदु पर खींची गई स्पर्श रेखा स्पर्श बिंदु से होकर जाने वाली त्रिज्या पर लंब होती है (प्रमेय 10.1), और किसी बाह्य बिंदु से खींची गई दो स्पर्श रेखाओं की लंबाइयाँ बराबर होती हैं (प्रमेय 10.2)। इसमें स्पर्श रेखा की लंबाई का सूत्र , किसी बिंदु से स्पर्श रेखाओं की संख्या, और बोर्ड अनुप्रयोगों का एक समृद्ध समूह भी विकसित किया गया है — वृत्त का परिगमन करने वाली आकृतियाँ (चतुर्भुज, त्रिभुज, समांतर चतुर्भुज) और स्पर्श रेखाओं तथा केंद्र के बीच के कोण संबंध। यह कक्षा 10 के बोर्ड पाठ्यक्रम का एक छोटा किंतु बहुत अधिक अंक दिलाने वाला अध्याय है।
Chapter 11: वृत्तों से संबंधित क्षेत्रफल
यह अध्याय वृत्त के भागों को मापता है। वृत्त की परिधि और क्षेत्रफल तथा वलय के क्षेत्रफल से शुरू करके, यह दो केंद्रीय सूत्र विकसित करता है — त्रिज्यखंड का क्षेत्रफल और चाप की लंबाई — और फिर वृत्तखंड का क्षेत्रफल (त्रिज्यखंड का क्षेत्रफल त्रिभुज का क्षेत्रफल) के रूप में। इन्हें बोर्ड के अनेक लोकप्रिय प्रश्नों पर लागू किया जाता है: घड़ियों की मिनट और घंटे की सुइयाँ, विंडस्क्रीन वाइपर, रस्सी से बँधे चरते हुए जानवर, छाते और पंखे, और विशेष रूप से समतल आकृतियों के संयोजनों के क्षेत्रफल (वृत्तों, त्रिज्यखंडों, वर्गों और त्रिभुजों से बने छायांकित क्षेत्र)। यह कक्षा 10 बोर्ड पाठ्यक्रम का एक सूत्र-समृद्ध, उच्च-अंक वाला अध्याय है।
Chapter 12: पृष्ठीय क्षेत्रफल और आयतन
यह अध्याय पाँच मूल आकृतियों — घनाभ, घन, बेलन, शंकु, गोला और अर्धगोला — से बने वास्तविक ठोसों को मापता है। हर मूल सूत्र (वक्र और कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल, तथा आयतन) को दोहराने के बाद, यह दिखाता है कि ठोसों के संयोजन का पृष्ठीय क्षेत्रफल कैसे ज्ञात करें (केवल खुले वक्र पृष्ठ जोड़ें — जुड़े हुए फलक लुप्त हो जाते हैं) और संयोजन का आयतन कैसे ज्ञात करें (केवल जोड़ें, या किसी खोखले भाग के लिए घटाएँ)। इसके बाद यह दो अधिक अंक वाले बोर्ड विषयों को कवर करता है: किसी ठोस का एक आकृति से दूसरी आकृति में रूपांतरण पिघलाकर और पुनः ढालकर (आयतन संरक्षित रहता है) और शंकु का छिन्नक (बाल्टी/गिलास के आकार का) उसके पृष्ठीय क्षेत्रफल और आयतन के सूत्रों सहित। यह कक्षा 10 बोर्ड पाठ्यक्रम का सूत्र-प्रधान, बहुत अधिक अंक दिलाने वाला अध्याय है।
Chapter 13: सांख्यिकी
इस अध्याय में वर्गीकृत आंकड़ों के लिए केंद्रीय प्रवृत्ति के तीनों माप — माध्य, माध्यिका और बहुलक — ज्ञात किए जाते हैं। माध्य के लिए इसमें तीनों विधियाँ विकसित की जाती हैं: प्रत्यक्ष विधि , कल्पित माध्य विधि और पग-विचलन विधि। इसके बाद बहुलक वर्ग से वर्गीकृत आंकड़ों का बहुलक, तथा संचयी बारंबारता और माध्यिका वर्ग से माध्यिका ज्ञात की जाती है। अंत में इसमें संचयी बारंबारता बंटन और उसका आलेख, तोरण (से कम और से अधिक प्रकार) प्रस्तुत किया जाता है, यह दिखाया जाता है कि तोरण से माध्यिका कैसे पढ़ें, और अनुभवजन्य संबंध बताया जाता है। यह कक्षा 10 बोर्ड पाठ्यक्रम का एक सूत्र-आधारित, अधिक अंक दिलाने वाला अध्याय है।
Chapter 14: प्रायिकता
यह अध्याय संयोग को मापता है। यह किसी घटना की सैद्धांतिक (चिरसम्मत) प्रायिकता को के रूप में विकसित करता है, और इसके परिणामों की पड़ताल करता है: प्रायिकता सदैव 0 और 1 के बीच होती है, एक निश्चित घटना की प्रायिकता 1 होती है और एक असंभव घटना की प्रायिकता 0, सभी प्रारंभिक घटनाओं की प्रायिकताओं का योग 1 होता है, और कोई घटना तथा उसकी पूरक घटना को संतुष्ट करती हैं। यह इन विचारों को मानक बोर्ड स्थितियों पर लागू करता है — सिक्के उछालना, पासे फेंकना, 52 पत्तों की भली-भाँति फेंटी गई गड्डी से पत्ते निकालना, तथा कंचे निकालना या स्पिनर घुमाना। यह कक्षा 10 के बोर्ड पाठ्यक्रम का एक संकल्पना-हल्का, अंक-समृद्ध अध्याय है।