चुंबक, ध्रुव तथा चुंबकीय क्षेत्र
आपने देखा है कि दिक्सूचक सुई छड़ चुंबक के पास लाने पर विक्षेपित हो जाती है। दिक्सूचक सुई स्वयं एक छोटी छड़ चुंबक है। इसके सिरे लगभग उत्तर व दक्षिण की ओर संकेत करते हैं: उत्तर की ओर संकेत करने वाला सिरा उत्तरी (उत्तर-अभिमुखी) ध्रुव है, और दक्षिण की ओर संकेत करने वाला सिरा दक्षिणी (दक्षिण-अभिमुखी) ध्रुव है।
चुंबकों का एक मूल नियम: समान ध्रुव प्रतिकर्षित करते हैं, असमान ध्रुव आकर्षित करते हैं।
यदि आप छड़ चुंबक के चारों ओर लोहे का बुरादा छिड़ककर बोर्ड को धीरे से थपथपाएँ, तो बुरादा एक निश्चित पैटर्न में व्यवस्थित हो जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि चुंबक अपने चारों ओर के क्षेत्र में बल लगाता है। चुंबक के चारों ओर का वह क्षेत्र जहाँ उसका बल पहचाना जा सके, चुंबकीय क्षेत्र कहलाता है। जिन रेखाओं के अनुदिश बुरादा व्यवस्थित होता है, वे चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ दर्शाती हैं।

आरेख के अंग्रेज़ी लेबलों के हिन्दी अर्थ:
| English (in image) | हिन्दी |
|---|---|
| North pole (N) | उत्तरी ध्रुव (N) |
| South pole (S) | दक्षिणी ध्रुव (S) |
| Magnetic field lines | चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ |
| stronger field (crowded lines) | प्रबल क्षेत्र (सघन रेखाएँ) |
| direction N to S | दिशा N से S |
चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ तथा उनकी दिशा
चुंबकीय क्षेत्र में परिमाण व दिशा दोनों होती हैं। किसी बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा वह दिशा है जिसमें वहाँ रखी दिक्सूचक सुई का उत्तरी ध्रुव संकेत करता है।
परंपरा के अनुसार:
- चुंबक के बाहर, क्षेत्र रेखाएँ उत्तरी ध्रुव से निकलती हैं और दक्षिणी ध्रुव में मिलती हैं।
- चुंबक के भीतर, क्षेत्र रेखाएँ दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव की ओर चलती हैं।
- अतः चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ बंद वक्र होती हैं।
आप इन्हें स्वयं एक छोटे दिक्सूचक से खींच सकते हैं - सुई की स्थितियाँ उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव तक क्रमशः अंकित करके एक चिकने वक्र में जोड़कर।
चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के गुण
इन मुख्य गुणों को याद रखें (परीक्षा का प्रिय प्रश्न):
- क्षेत्र रेखाएँ चुंबक के बाहर उत्तरी ध्रुव से निकलती हैं व दक्षिणी ध्रुव में मिलती हैं, जिससे बंद पाश बनते हैं।
- किसी बिंदु पर क्षेत्र की दिशा वह है जिधर वहाँ रखा दिक्सूचक उत्तरी ध्रुव संकेत करे (रेखा की स्पर्श रेखा)।
- क्षेत्र रेखाएँ वहाँ अधिक पास-पास होती हैं जहाँ क्षेत्र प्रबल होता है (ध्रुवों के पास) और वहाँ दूर-दूर जहाँ क्षेत्र दुर्बल होता है।
- कोई दो क्षेत्र रेखाएँ कभी नहीं काटतीं। यदि काटतीं, तो कटान बिंदु पर दिक्सूचक को एक साथ दो दिशाओं में संकेत करना पड़ता, जो असंभव है।
मुख्य बिंदु: क्षेत्र रेखाओं की सघनता क्षेत्र की सापेक्ष प्रबलता दर्शाती है।
[परीक्षा युक्ति] "दो क्षेत्र रेखाएँ कभी क्यों नहीं काटतीं?" → क्योंकि कटान बिंदु पर दिक्सूचक को एक साथ दो भिन्न दिशाओं में संकेत करना पड़ता, जो असंभव है।
हल किए गए उदाहरण
उदाहरण 1: दिक्सूचक क्यों विक्षेपित होता है
छड़ चुंबक के पास लाने पर दिक्सूचक सुई क्यों विक्षेपित होती है?
हल: दिक्सूचक सुई एक छोटा चुंबक है। छड़ चुंबक के पास लाने पर यह छड़ चुंबक के चुंबकीय क्षेत्र में आ जाती है और इसके ध्रुवों पर बल अनुभव होता है (समान ध्रुव प्रतिकर्षण, असमान आकर्षण)। यह बल-आघूर्ण सुई को घुमाकर क्षेत्र के अनुदिश संरेखित कर देता है, अर्थात यह विक्षेपित हो जाती है।
उदाहरण 2: क्षेत्र की दिशा
किसी बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा कैसे परिभाषित होती है?
हल: किसी बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा वह है जिधर वहाँ रखी दिक्सूचक सुई का उत्तरी ध्रुव संकेत करता है। चुंबक के बाहर क्षेत्र रेखाएँ उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव की ओर खींची जाती हैं।
उदाहरण 3: रेखाओं से क्षेत्र की प्रबलता पढ़ना
किसी क्षेत्र आरेख में एक स्थान पर रेखाएँ सघन व दूसरे स्थान पर विरल हैं। क्षेत्र कहाँ प्रबल है?
हल: क्षेत्र वहाँ अधिक प्रबल होता है जहाँ क्षेत्र रेखाएँ सघन (पास-पास) होती हैं, और वहाँ दुर्बल जहाँ वे दूर-दूर होती हैं। छड़ चुंबक के ध्रुवों के पास रेखाएँ सबसे सघन होती हैं, अतः क्षेत्र वहाँ सबसे प्रबल है।