ग्राफ पर शून्यक — मुख्य विचार
पिछले खंड में का शून्यक वह संख्या थी जिसके लिए । अब आइए देखें कि ग्राफ पर इसका क्या अर्थ है।
जब हम आलेखित करते हैं, तो हमें एक वक्र मिलता है। के शून्यक ठीक उन बिंदुओं के x-निर्देशांक होते हैं जहाँ ग्राफ x-अक्ष को काटता (या स्पर्श करता) है। ऐसा इसलिए क्योंकि x-अक्ष पर , और ही शून्यक की शर्त है।
मुख्य बिंदु: ज्यामितीय रूप से, बहुपद के शून्यक उसके ग्राफ के x-अंतःखंड होते हैं — वे बिंदु जहाँ ।
ऐसे समझिए: को बीजगणितीय रूप से हल करना और यह ज्ञात करना कि ग्राफ x-अक्ष को कहाँ काटता है — एक ही बात के दो दृष्टिकोण हैं।
[बोर्ड के लिए महत्वपूर्ण] एक सामान्य 1-अंक का प्रश्न एक ग्राफ दिखाकर शून्यकों की संख्या पूछता है। बस गिनें कि वक्र x-अक्ष को कितनी बार मिलता है।

रैखिक बहुपद — एक सरल रेखा
रैखिक बहुपद का ग्राफ एक सरल रेखा होता है।
- एक सरल रेखा (जो क्षैतिज न हो) x-अक्ष को ठीक एक बिंदु पर काटती है।
- वह बिंदु है, अतः रैखिक बहुपद का ठीक एक शून्यक होता है।
उदाहरण
के लिए, रेखा x-अक्ष को वहाँ मिलती है जहाँ , अर्थात् पर। अतः एकमात्र शून्यक 2 है, जो एक x-अंतःखंड से मेल खाता है।
मुख्य बिंदु: एक अचर-रहित रैखिक बहुपद का सदैव ठीक एक वास्तविक शून्यक होता है — उसका ग्राफ x-अक्ष को एक बार काटता है।
[बोर्ड के लिए महत्वपूर्ण] (एक अशून्य अचर) जैसी क्षैतिज रेखा x-अक्ष को कभी नहीं मिलती, अतः उसका कोई शून्यक नहीं — घात-0 बहुपद से संगत।

द्विघात बहुपद — एक परवलय
द्विघात का ग्राफ एक U-आकार का वक्र होता है जिसे परवलय (parabola) कहते हैं।
- यदि , तो परवलय ऊपर की ओर खुलता है (∪)।
- यदि , तो यह नीचे की ओर खुलता है (∩)।
शून्यकों की संख्या इस पर निर्भर करती है कि परवलय x-अक्ष को कैसे मिलता है:
| स्थिति | शून्यक |
|---|---|
| x-अक्ष को दो भिन्न बिंदुओं पर काटता है | 2 भिन्न शून्यक |
| x-अक्ष को केवल एक बिंदु पर स्पर्श करता है | 1 शून्यक (दोहराया/समान) |
| x-अक्ष को नहीं मिलता | 0 वास्तविक शून्यक |
मुख्य बिंदु: द्विघात के अधिक-से-अधिक 2 वास्तविक शून्यक होते हैं। अक्ष को 'स्पर्श' करने का अर्थ है दोनों शून्यक संपाती (समान मूल) हैं।
[बोर्ड के लिए महत्वपूर्ण] जब परवलय x-अक्ष को केवल स्पर्श करता है, तो बहुपद के दो समान शून्यक होते हैं — परीक्षक इसे एक भिन्न शून्यक परंतु दो संपाती मूल गिनते हैं। प्रश्न की भाषा ध्यान से पढ़ें।

त्रिघात बहुपद और सामान्य नियम
त्रिघात का ग्राफ एक चिकना वक्र होता है जो दो बार मुड़ सकता है।
- एक त्रिघात x-अक्ष को 3, 2, या 1 बिंदु(ओं) पर मिल सकता है, अतः इसके अधिक-से-अधिक 3 वास्तविक शून्यक होते हैं।
- यह सदैव x-अक्ष को कम-से-कम एक बार मिलता है (अतः त्रिघात का सदैव कम-से-कम एक वास्तविक शून्यक होता है)।
सामान्य सिद्धांत
किसी भी बहुपद के लिए: वास्तविक शून्यकों की संख्या अधिक-से-अधिक उसकी घात के बराबर होती है, क्योंकि उतनी ही अधिकतम बार उसका ग्राफ x-अक्ष को काट सकता है।
मुख्य बिंदु: घात ⇒ अधिक-से-अधिक वास्तविक शून्यक ⇒ ग्राफ x-अक्ष को अधिक-से-अधिक बार मिलता है।
[बोर्ड के लिए महत्वपूर्ण] यदि कोई ग्राफ x-अक्ष को 3 बिंदुओं पर काटता दिखाया जाए, तो बहुपद की न्यूनतम संभव घात 3 है। 'x-अंतःखंडों की संख्या ≤ घात' मुख्य तर्क है।

हल किए गए उदाहरण
उदाहरण 1: ग्राफ से शून्यक (गिनती)
एक ग्राफ x-अक्ष को ठीक 2 बिंदुओं पर काटता है। बहुपद के कितने शून्यक हैं?
हल:
- प्रत्येक x-अंतःखंड एक शून्यक से मेल खाता है।
- दो अंतःखंड ⇒ दो शून्यक।
अंतिम उत्तर: 2 शून्यक।
सार: शून्यकों की संख्या = ग्राफ के x-अक्ष को मिलने की संख्या।
उदाहरण 2: रैखिक ग्राफ का शून्यक
का ग्राफ x-अक्ष को कहाँ काटता है, और शून्यक क्या है?
हल:
- x-अक्ष पर : ।
- , अतः ग्राफ पर काटता है।
अंतिम उत्तर: पर काटता है; शून्यक 2 है।
सार: x-अंतःखंड = शून्यक ज्ञात करने के लिए रखें।
उदाहरण 3: परवलय के खुलने की दिशा
क्या का ग्राफ ऊपर या नीचे की ओर खुलता है?
हल:
- का गुणांक है।
- चूँकि , परवलय नीचे की ओर खुलता है।
अंतिम उत्तर: नीचे की ओर (∩)।
सार: का चिह्न दिशा तय करता है: ऊपर, नीचे।
उदाहरण 4: जब परवलय अक्ष को स्पर्श करे तो शून्यकों की संख्या
एक परवलय x-अक्ष को केवल एक बिंदु पर स्पर्श करता है। द्विघात के कितने शून्यक हैं?
हल:
- एक बिंदु पर स्पर्श करने का अर्थ है दोनों शून्यक समान (संपाती) हैं।
- अतः एक भिन्न शून्यक है (एक दोहराया मूल)।
अंतिम उत्तर: एक (दोहराया) शून्यक।
सार: अक्ष को स्पर्श करना = समान/संपाती शून्यक।
उदाहरण 5: कोई वास्तविक शून्यक नहीं
यदि कोई परवलय पूर्णतः x-अक्ष के ऊपर स्थित हो और उसे कभी न मिले, तो द्विघात के कितने वास्तविक शून्यक हैं?
हल:
- वास्तविक शून्यक x-अंतःखंडों से मेल खाते हैं।
- ग्राफ x-अक्ष को नहीं मिलता, अतः कोई x-अंतःखंड नहीं।
अंतिम उत्तर: शून्य वास्तविक शून्यक।
सार: कोई अंतःखंड नहीं ⇒ कोई वास्तविक शून्यक नहीं।
उदाहरण 6: ग्राफ से न्यूनतम घात
एक ग्राफ x-अक्ष को 3 भिन्न बिंदुओं पर काटता है। बहुपद की न्यूनतम संभव घात क्या है?
हल:
- वास्तविक शून्यकों (x-अंतःखंडों) की संख्या = 3।
- घात शून्यकों की संख्या से कम-से-कम उतनी होनी चाहिए।
अंतिम उत्तर: न्यूनतम घात 3 है।
सार: घात ≥ x-अंतःखंडों की संख्या।
उदाहरण 7: अंतःखंडों से शून्यक पढ़ना
एक द्विघात ग्राफ x-अक्ष को और पर काटता है। इसके शून्यक क्या हैं?
हल:
- शून्यक अंतःखंडों के x-निर्देशांक होते हैं।
- अतः शून्यक और हैं।
अंतिम उत्तर: और ।
सार: शून्यकों को सीधे x-अक्ष के काटने वाले बिंदुओं से पढ़ें।
उदाहरण 8: के शून्यक ज्यामितीय रूप से
x-अक्ष को कहाँ मिलता है?
हल:
- रखें: ।
- या ।
- अतः परवलय x-अक्ष को और पर काटता है।
अंतिम उत्तर: और पर (दो शून्यक)।
सार: हल करने से x-अंतःखंड मिलते हैं।
उदाहरण 9: रैखिक ग्राफ का आकार
के ग्राफ का आकार क्या है, और यह x-अक्ष को कितनी बार काटता है?
हल:
- घात-1 (रैखिक) बहुपद एक सरल रेखा के रूप में आलेखित होता है।
- एक अक्षैतिज सरल रेखा x-अक्ष को ठीक एक बार काटती है।
अंतिम उत्तर: एक सरल रेखा; यह x-अक्ष को एक बार काटती है।
सार: रैखिक ⇒ सरल रेखा ⇒ ठीक एक शून्यक।
उदाहरण 10: त्रिघात के अधिकतम शून्यक
एक त्रिघात बहुपद का ग्राफ खींचा गया है। यह x-अक्ष को अधिकतम कितने बिंदुओं पर मिल सकता है?
हल:
- त्रिघात की घात 3 है।
- ग्राफ x-अक्ष को अधिक-से-अधिक 3 बार काट सकता है।
अंतिम उत्तर: अधिक-से-अधिक 3 बिंदु।
सार: अधिकतम x-अंतःखंड = घात = त्रिघात के लिए 3।