इस खंड के बारे में
यह खंड आनुवंशिकता पर CBSE एवं अन्य बोर्ड जैसे प्रश्नों का संग्रह है, अंकों के अनुसार वर्गीकृत। प्रारूप, अंक-वितरण एवं अपेक्षित उत्तर-शैली सीखें।
अध्ययन रणनीति:
- प्रत्येक संकरण पहले पनेट वर्ग से हल करें।
- उत्तर की लंबाई अंकों के अनुसार रखें।
- अनुपात एवं जीनप्ररूप स्पष्ट दिखाएँ।
- सभी NCERT अभ्यास हल करें।
1-अंकीय प्रश्न (MCQ / अति लघु)
प्र1. [CBSE] एकसंकर संकरण में F2 अनुपात है — (a) 1:1 (b) 3:1 (c) 9:3:3:1 (d) 1:2:1 (लक्षणप्ररूप) हल: (b) 3:1।
प्र2. [CBSE] मनुष्यों में मादा के लिंग-गुणसूत्र हैं — (a) XY (b) XX (c) YY (d) XO हल: (b) XX।
प्र3. [CBSE] एक प्रोटीन की सूचना रखने वाला डी.एन.ए. का भाग है — (a) गुणसूत्र (b) जीन (c) एलील (d) केंद्रक हल: (b) जीन।
प्र4. [CBSE] रक्त समूह O का जीनप्ररूप है — (a) I^A i (b) I^B i (c) I^A I^B (d) i i हल: (d) i i।
1-अंकीय प्रश्न (जारी)
प्र5. [CBSE] आनुवंशिकी के जनक कहे जाने वाले वैज्ञानिक का नाम लिखिए। हल: ग्रेगर जोहान मेंडल।
प्र6. [CBSE] मनुष्यों में अलिंगसूत्रों की कितनी जोड़ियाँ होती हैं? हल: 22 जोड़ियाँ।
प्र7. [CBSE] Tt जीनप्ररूप वाले लंबे पौधे का tt से संकरण करने पर लक्षणप्ररूप अनुपात दीजिए। हल: 1 लंबा : 1 बौना (1:1)।
प्र8. [CBSE] मानव शिशु का लिंग कौन-सा जनक तय करता है? हल: पिता (X या Y शुक्राणु द्वारा)।
2-अंकीय प्रश्न
प्र9. [CBSE] प्रभावी एवं अप्रभावी लक्षण में उदाहरण सहित अंतर बताइए। हल: प्रभावी लक्षण एक प्रति में भी अभिव्यक्त (जैसे लंबा, T); अप्रभावी लक्षण केवल दोनों प्रतियाँ होने पर अभिव्यक्त (जैसे बौना, tt)।
प्र10. [CBSE] जीनप्ररूप एवं लक्षणप्ररूप में अंतर बताइए। हल: जीनप्ररूप = आनुवंशिक संरचना (अक्षर), जैसे Tt। लक्षणप्ररूप = दृश्य लक्षण (रूप), जैसे लंबा।
2-अंकीय प्रश्न (जारी)
प्र11. [CBSE] मेंडल ने अपने प्रयोगों के लिए मटर क्यों चुना? हल: इसमें स्पष्ट विपरीत लक्षण होते हैं एवं इसे स्व- या पर-परागित किया जा सकता है, जिससे नियंत्रित संकरण संभव है।
प्र12. [CBSE] विविधता स्पीशीज़ की उत्तरजीविता के लिए कैसे उपयोगी है? हल: पर्यावरण बदलने पर कुछ विभिन्नताएँ नई परिस्थितियों के अनुकूल होकर जीवित रहती एवं जनन करती हैं, जिससे स्पीशीज़ बनी रहती है।
प्र13. [CBSE] युग्मक में केवल एक जीन-समुच्चय क्यों होना चाहिए? हल: ताकि जीन-समुच्चयों की संख्या स्थिर रहे — दो एकल-समुच्चय युग्मकों का निषेचन सामान्य दो समुच्चय पुनः स्थापित करता है।
3-अंकीय प्रश्न
प्र14. [CBSE] मेंडल के प्रयोग कैसे दर्शाते हैं कि लक्षण प्रभावी या अप्रभावी हो सकते हैं? हल: F1 (Tt) में केवल लंबाई दिखती है — लंबाई प्रभावी, बौनापन छिपा। F2 में बौनापन 1/4 पौधों में पुनः प्रकट होता है (3:1), जो दर्शाता है कि वह अप्रभावी था, केवल tt होने पर अभिव्यक्त। अतः लक्षण प्रभावी या अप्रभावी हो सकते हैं।
प्र15. [CBSE] संकरण द्वारा एकसंकर संकरण का 3:1 F2 अनुपात समझाइए। हल: Tt × Tt → प्रत्येक से युग्मक T, t। पनेट वर्ग देता है TT, Tt, Tt, tt। TT व Tt लंबे, tt बौना → 3 लंबे : 1 बौना; जीनप्ररूप 1:2:1।
3-अंकीय प्रश्न (जारी)
प्र16. [CBSE] मेंडल के प्रयोग कैसे दर्शाते हैं कि लक्षण स्वतंत्र रूप से वंशागत होते हैं? हल: द्विसंकर संकरण (गोल-पीले × झुर्रीदार-हरे) में F2 में नए संयोजन — गोल-हरे एवं झुर्रीदार-पीले — मिलते हैं जो जनकों में नहीं थे। यह सिद्ध करता है कि बीज-आकार एवं रंग स्वतंत्र रूप से वंशागत होते हैं (9:3:3:1)।
प्र17. [CBSE] मनुष्यों में शिशु का लिंग कैसे तय होता है, समझाइए। हल: मादा XX, नर XY। माता प्रत्येक शिशु को X देती है। पिता X (→ लड़की, XX) या Y (→ लड़का, XY) देता है। अतः पिता का गुणसूत्र लिंग तय करता है; अनुपात लगभग 1:1।
प्र18. [CBSE] A समूह पुरुष O समूह स्त्री से विवाह करता है; संतान O समूह की है। क्या हम तय कर सकते हैं कि कौन-सा एलील प्रभावी है? समझाइए। हल: नहीं। A पिता I^A i हो सकता है; I^A i × ii प्रभाविता चाहे जो हो, A या O संतान देता है। एक परिवार प्रभाविता स्थापित नहीं कर सकता।
5-अंकीय प्रश्न
प्र19. [CBSE] (अ) प्रभावी एवं अप्रभावी लक्षण क्या हैं? (ब) T (लंबा) एवं t (बौना) का उपयोग कर F2 तक एकसंकर संकरण जीनप्ररूप एवं लक्षणप्ररूप अनुपात सहित दिखाइए। हल: (अ) प्रभावी = एक प्रति में अभिव्यक्त; अप्रभावी = केवल दोनों प्रतियों में अभिव्यक्त। (ब) P: TT × tt → F1: सभी Tt (लंबे)। F1 × F1 (Tt × Tt) → F2: TT, Tt, Tt, tt। जीनप्ररूप 1:2:1; लक्षणप्ररूप 3 लंबे : 1 बौना।
प्र20. [CBSE] संकरण आरेख सहित मनुष्यों में लिंग निर्धारण समझाइए एवं बताइए कि शिशु का लिंग कौन तय करता है। हल: माता XX → सभी अंडों में X। पिता XY → आधे शुक्राणु X, आधे Y। X-शुक्राणु + X-अंड = XX (लड़की); Y-शुक्राणु + X-अंड = XY (लड़का)। चूँकि माता सदैव X देती है, पिता का गुणसूत्र (X या Y) लिंग तय करता है; अनुपात लगभग 1:1।
5-अंकीय प्रश्न (जारी)
प्र21. [CBSE] समझाइए कि जीन किसी लक्षण को कैसे नियंत्रित करते हैं, एवं प्रत्येक जीव में हर जीन की दो प्रतियाँ गुणसूत्रों पर क्यों होती हैं। हल: एक जीन प्रोटीन/एंजाइम बनाता है; ऊँचाई के लिए एंजाइम वृद्धि हार्मोन की मात्रा नियंत्रित करता है (कुशल एंजाइम → लंबा; परिवर्तित जीन → बौना)। प्रत्येक जीव प्रत्येक जनक से एक जीन-समुच्चय वंशागत करता है, अतः कायिक कोशिकाओं में प्रत्येक जीन की दो प्रतियाँ, जोड़ीदार गुणसूत्रों पर। जनन कोशिकाओं में प्रत्येक जोड़ी की एक प्रति; निषेचन जोड़ी पुनः स्थापित करता है, गुणसूत्र संख्या स्थिर रखता एवं दोनों जनकों का समान योगदान सुनिश्चित करता है।
प्र22. [CBSE] (अ) मेंडल का द्विसंकर परिणाम बताइए। (ब) 9:3:3:1 अनुपात क्या सिद्ध करता है? हल: (अ) RrYy × RrYy → F2 लक्षणप्ररूप 9 गोल-पीले : 3 गोल-हरे : 3 झुर्रीदार-पीले : 1 झुर्रीदार-हरे। (ब) नए संयोजन (गोल-हरे, झुर्रीदार-पीले) सिद्ध करते हैं कि बीज-आकार एवं रंग स्वतंत्र रूप से वंशागत होते हैं — मेंडल का स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम।