लिंग कैसे तय होता है?
नवजात का लिंग — लड़का या लड़की — कैसे तय होता है? भिन्न स्पीशीज़ भिन्न रणनीतियाँ अपनाती हैं:
- कुछ सरीसृपों में, निषेचित अंडों को जिस तापमान पर रखा जाए, वह लिंग तय करता है — एक पर्यावरणीय संकेत।
- घोंघों जैसे कुछ जंतु लिंग बदल सकते हैं, जो दर्शाता है कि लिंग सदैव आनुवंशिक रूप से निश्चित नहीं।
- मनुष्यों में लिंग मुख्यतः आनुवंशिक रूप से निर्धारित होता है — माता-पिता से मिले जीन तय करते हैं कि हम लड़के होंगे या लड़की।
पर यदि दोनों जनकों से समान जीन-समुच्चय मिलते हैं, तो आनुवंशिकी लिंग कैसे तय कर सकती है? इसका उत्तर एक विशेष गुणसूत्र-जोड़ी में है।
अलिंगसूत्र एवं लिंग-गुणसूत्र
मनुष्य के सभी गुणसूत्र पूर्ण रूप से जोड़ीदार नहीं होते। मनुष्यों में कुल 23 जोड़ी गुणसूत्र होते हैं:
- 22 जोड़ी में मिलती-जुलती मातृ एवं पितृ प्रतियाँ होती हैं — इन्हें अलिंगसूत्र (autosomes) कहते हैं।
- 1 जोड़ी लिंग-गुणसूत्र होती है, एवं यह जोड़ी विषम है — सदैव पूर्ण मेल नहीं खाती।
लिंग-गुणसूत्र दो प्रकार के होते हैं — सामान्य आकार का X एवं छोटा Y:
- मादा में पूर्ण जोड़ी: XX।
- नर में असमान जोड़ी: XY (एक X एवं एक Y)।
मुख्य बिंदु: मादा = XX; नर = XY। शेष 22 जोड़ी = अलिंगसूत्र।
शिशु का लिंग पिता तय करता है

आरेख के अंग्रेज़ी लेबलों के हिन्दी अर्थ:
| English (in image) | हिन्दी |
|---|---|
| MOTHER | माता |
| FATHER | पिता |
| GIRL | लड़की |
| BOY | लड़का |
| Ratio 1 : 1 | अनुपात 1 : 1 |
अब X एवं Y की वंशागति देखें:
- माता XX है, अतः प्रत्येक अंड में X होता है।
- पिता XY है, अतः आधे शुक्राणुओं में X एवं आधे में Y होता है।
निषेचन पर:
- X-शुक्राणु + X-अंड → XX = लड़की।
- Y-शुक्राणु + X-अंड → XY = लड़का।
अतः सभी शिशुओं को माता से X मिलता है, चाहे लिंग कोई भी हो। शिशु का लिंग इस पर निर्भर करता है कि उसे पिता से क्या मिलता है — X से लड़की, Y से लड़का। औसतन आधे शिशु लड़के एवं आधे लड़कियाँ (1:1 अनुपात)।
[बोर्ड ट्रैप] एक सामान्य मूल्य-आधारित बिंदु: चूँकि पिता का गुणसूत्र (X या Y) शिशु का लिंग तय करता है, शिशु के लिंग के लिए माता को दोष देना वैज्ञानिक रूप से गलत है।
स्मृति कैप्सूल — खंड 7
त्वरित पुनरावृत्ति: लिंग निर्धारण।
1. लिंग भिन्न स्पीशीज़ में भिन्न प्रकार तय होता है — तापमान (कुछ सरीसृप), लिंग-परिवर्तन (घोंघे), जीन (मनुष्य)। 2. मनुष्य: 23 जोड़ी = 22 अलिंगसूत्र जोड़ी + 1 लिंग-गुणसूत्र जोड़ी। *3. मादा = XX; नर = XY। *4. माता के अंड → सभी X; पिता के शुक्राणु → आधे X, आधे Y।* 5. X-शुक्राणु → लड़की (XX); Y-शुक्राणु → लड़का (XY)। पिता लिंग तय करता है। 6. अनुपात ≈ 1 : 1 (50% लड़के : 50% लड़कियाँ)।
हल किए गए उदाहरण
उदाहरण 1: NCERT — लिंग कैसे तय होता है?
मनुष्यों में शिशु का लिंग कैसे निर्धारित होता है?
हल: मनुष्यों में लिंग-गुणसूत्र की एक जोड़ी होती है: मादा XX एवं नर XY।
- माता (XX) प्रत्येक शिशु को X देती है।
- पिता (XY) या तो X या Y देता है।
- यदि शिशु को पिता का X मिले, तो वह लड़की (XX); यदि Y मिले, तो लड़का (XY)।
अतः पिता का गुणसूत्र शिशु का लिंग तय करता है।
उदाहरण 2: अलिंगसूत्र बनाम लिंग-गुणसूत्र
मनुष्यों में अलिंगसूत्र एवं लिंग-गुणसूत्र में क्या अंतर है?
हल:
- अलिंगसूत्र: 22 जोड़ी गुणसूत्र जो दोनों लिंगों में समान होते हैं एवं अधिकांश शरीर-लक्षणों के जीन रखते हैं।
- लिंग-गुणसूत्र: वह 1 जोड़ी जो लिंग तय करती है — मादा में XX, नर में XY।
सार: 22 अलिंगसूत्र जोड़ी + 1 लिंग-गुणसूत्र जोड़ी = मनुष्यों में 23 जोड़ी।
उदाहरण 3: 1:1 अनुपात
लड़के एवं लड़कियाँ लगभग समान संख्या में क्यों जन्म लेते हैं?
हल: पिता (XY) आधे X-शुक्राणु एवं आधे Y-शुक्राणु बनाता है। चूँकि X-शुक्राणु लड़की एवं Y-शुक्राणु लड़का देता है, एवं दोनों समान संख्या में बनते हैं, लड़का व लड़की की संभावना समान है — अर्थात लगभग 1:1 (50:50) अनुपात।
उदाहरण 4: लिंग कौन तय करता है?
केवल पुत्रियाँ होने पर किसी दंपति को दोष दिया जाता है। वैज्ञानिक रूप से शिशु का लिंग कौन तय करता है, समझाइए।
हल: माता सदैव X गुणसूत्र देती है। पिता या तो X (→ लड़की) या Y (→ लड़का) देता है। अतः शिशु का लिंग पिता के गुणसूत्र से तय होता है, माता के नहीं। माता को दोष देना वैज्ञानिक रूप से गलत है।
सार: एक बारंबार मूल्य-आधारित/बोर्ड प्रश्न — पिता का शुक्राणु (X या Y) लिंग तय करता है।