आनुवंशिकता क्या है?
जनन का सबसे स्पष्ट परिणाम है समान रूपरेखा वाले व्यक्तियों का बनना — मानव शिशु में सदैव मनुष्य के आधारभूत लक्षण होते हैं। आनुवंशिकता माता-पिता से संतति में लक्षणों (गुणों) का संचरण है, और आनुवंशिकता के नियम तय करते हैं कि ये लक्षण विश्वसनीय रूप से कैसे वंशागत होते हैं।
फिर भी शिशु अपने माता-पिता के बिल्कुल समान नहीं दिखता, और मानव समष्टि में बहुत विविधता होती है। अतः आनुवंशिकता दोनों की व्याख्या करती है — समानता (संतति जनक जैसी क्यों) एवं, विविधता के साथ, भिन्नता।
वंशागत लक्षण — एक उदाहरण

आरेख के अंग्रेज़ी लेबलों के हिन्दी अर्थ:
| English (in image) | हिन्दी |
|---|---|
| FREE EARLOBE | स्वतंत्र कर्णपाली |
| ATTACHED EARLOBE | संलग्न कर्णपाली |
| earlobe | कर्णपाली |
लक्षण (trait) एक विशिष्ट गुण है — जैसे लंबाई, बीज का आकार, या कर्णपाली का प्रकार। कुछ लक्षण वंशागत होते हैं (डी.एन.ए. द्वारा जनक से संचरित)।
कर्णपाली लीजिए: कुछ लोगों में कान का निचला भाग स्वतंत्र (मुक्त) लटकता है; कुछ में यह सिर की ओर संलग्न रहता है। ये मानव समष्टि में पाए जाने वाले दो वंशागत रूप हैं। विद्यार्थियों की कर्णपाली की उनके माता-पिता से तुलना कर आप कर्णपाली प्रकार की वंशागति का नियम निकाल सकते हैं।
[बोर्ड सुझाव] स्वतंत्र बनाम संलग्न कर्णपाली एक सरल वंशागत मानव लक्षण का मानक NCERT उदाहरण है — याद रखें।
प्रत्येक लक्षण के दो रूप
यहाँ केंद्रीय विचार है: पिता एवं माता दोनों शिशु को लगभग समान मात्रा में आनुवंशिक पदार्थ (डी.एन.ए.) देते हैं।
इसका अर्थ है कि प्रत्येक लक्षण पितृ एवं मातृ डी.एन.ए. दोनों से प्रभावित हो सकता है — अतः हर लक्षण के लिए शिशु में दो रूप होते हैं (एक-एक जनक से)। ये दोनों रूप समान या भिन्न हो सकते हैं।
शिशु में इनमें से कौन-सा रूप वास्तव में दिखेगा? यही प्रश्न मेंडल ने अपने मटर-पादप प्रयोगों से हल किया (अगला खंड)।
मुख्य बिंदु: लैंगिक जनन करने वाले जीव में प्रत्येक लक्षण के कारक (जीन) की दो प्रतियाँ होती हैं — एक-एक जनक से।
स्मृति कैप्सूल — खंड 2
त्वरित पुनरावृत्ति: आनुवंशिकता एवं वंशागत लक्षण।
1. आनुवंशिकता = जनक से संतति में लक्षणों का संचरण। 2. संतति जनक के समान पर समरूप नहीं (विविधता)। 3. लक्षण = विशिष्ट गुण (लंबाई, बीज-आकार, कर्णपाली)। 4. स्वतंत्र बनाम संलग्न कर्णपाली = वंशागत मानव लक्षण का NCERT उदाहरण। 5. पिता एवं माता समान डी.एन.ए. देते हैं → प्रत्येक लक्षण के दो रूप (एक-एक जनक से), जो समान या भिन्न हो सकते हैं।
हल किए गए उदाहरण
उदाहरण 1: आनुवंशिकता एवं लक्षण परिभाषित कीजिए
आनुवंशिकता क्या है? लक्षण क्या है? एक वंशागत मानव लक्षण का उदाहरण दीजिए।
हल:
- आनुवंशिकता डी.एन.ए. द्वारा माता-पिता से संतति में लक्षणों का संचरण है।
- लक्षण किसी जीव का विशिष्ट गुण है।
- उदाहरण: स्वतंत्र या संलग्न कर्णपाली (या नेत्र-रंग, लंबाई आदि)।
उदाहरण 2: प्रत्येक लक्षण के दो रूप क्यों?
प्रत्येक शिशु में हर लक्षण के दो रूप क्यों होते हैं?
हल: क्योंकि दोनों जनक शिशु को लगभग समान मात्रा में आनुवंशिक पदार्थ (डी.एन.ए.) देते हैं। अतः शिशु को प्रत्येक लक्षण के कारक (जीन) की एक प्रति पिता से एवं एक माता से मिलती है — प्रति लक्षण दो रूप, जो समान या भिन्न हो सकते हैं।
उदाहरण 3: समान फिर भी भिन्न
शिशु में मनुष्य के सभी आधारभूत लक्षण होते हैं पर वह किसी भी जनक के बिल्कुल समान नहीं दिखता। समझाइए।
हल: आनुवंशिकता शिशु को आधारभूत मानव शरीर-रूपरेखा देती है (अतः वह स्पष्ट रूप से मनुष्य एवं जनकों जैसा)। साथ ही शिशु को दोनों जनकों से जीन-रूपों का नया संयोजन एवं छोटी विविधताएँ मिलती हैं — अतः वह किसी भी जनक के समान पर समरूप नहीं।