आनुवंशिकी की समस्याएँ हल करने की विधि
आनुवंशिकी के प्रश्न कठिन दिखते हैं पर एक निश्चित विधि से हल होते हैं। हर बार ये चरण अपनाएँ:
- अक्षर निर्धारित करें: प्रभावी के लिए बड़ा, अप्रभावी के लिए छोटा (जैसे T लंबा, t बौना)।
- दी गई जानकारी से जनकों के जीनप्ररूप लिखें।
- प्रत्येक जनक के युग्मक ज्ञात करें (अक्षर अलग करें)।
- पनेट वर्ग बनाएँ एवं संतति भरें।
- जीनप्ररूप एवं लक्षणप्ररूप अनुपात गिनें।
पनेट वर्ग प्रत्येक संभव अंड को प्रत्येक संभव शुक्राणु से संयोजित करने की व्यवस्थित विधि है।
आँकड़ों से प्रभाविता ज्ञात करना
कभी-कभी आँकड़े देकर पूछा जाता है कि कौन-सा लक्षण प्रभावी है। नियम:
- यदि किसी लक्षण को दिखाने वाले दो जनकों की कुछ संतति में वह लक्षण न हो, तो जनक संकर थे एवं लुप्त लक्षण अप्रभावी है (अतः दिखने वाला लक्षण प्रभावी)।
- एक अवलोकन पर्याप्त नहीं हो सकता। उदाहरण: हल्की आँखों वाले बच्चे के प्रायः हल्की आँखों वाले माता-पिता होते हैं। यह अकेले नहीं बताता कि हल्का प्रभावी है या अप्रभावी — इसके लिए देखना होगा कि लक्षण छिपकर पुनः प्रकट हो सकता है या नहीं, या ज्ञात जीनप्ररूप वाले संकरण करने होंगे।
मुख्य बिंदु: जो लक्षण छिपकर बाद में पुनः प्रकट हो सके, वह अप्रभावी; जो उसे ढके, वह प्रभावी। एक परिवार के आँकड़े प्रायः पर्याप्त नहीं — अनुपात या परीक्षण-संकरण चाहिए।
ABO रक्त समूह — एक अनुप्रयोग

आरेख के अंग्रेज़ी लेबलों के हिन्दी अर्थ:
| English (in image) | हिन्दी |
|---|---|
| Blood Group | रक्त समूह |
| Possible Genotypes | संभावित जीनप्ररूप |
| dominant | प्रभावी |
| codominant | सहप्रभावी |
मानव ABO रक्त समूह वंशागति का एक सुंदर वास्तविक उदाहरण है। इसे तीन एलील नियंत्रित करते हैं: I^A, I^B एवं i।
- I^A एवं I^B, i (O एलील) पर प्रभावी हैं।
- I^A एवं I^B सहप्रभावी हैं — दोनों उपस्थित होने पर दोनों अभिव्यक्त होते हैं (AB समूह)।
| रक्त समूह | संभावित जीनप्ररूप |
|---|---|
| A | I^A I^A या I^A i |
| B | I^B I^B या I^B i |
| AB | I^A I^B |
| O | i i |
हल विचार (NCERT शैली): A समूह (I^A i) वाला पिता एवं O समूह (i i) वाली माता की संतान O समूह (i i) की हो सकती है, क्योंकि A-समूह पिता में छिपा i हो सकता है। परंतु यह एक परिवार अकेले यह सिद्ध नहीं कर सकता कि A, O पर प्रभावी है।
[NEET महत्वपूर्ण] O (ii) "छिपा" समूह है — दो A या दो B समूह के जनक O संतान दे सकते हैं यदि दोनों में i हो।
स्मृति कैप्सूल — खंड 8
त्वरित पुनरावृत्ति: आनुवंशिकी की समस्याएँ हल करना।
1. चरण: अक्षर → जनक जीनप्ररूप → युग्मक → पनेट वर्ग → अनुपात गिनना। 2. याद रखने योग्य अनुपात: एकसंकर F2 = 3:1 (जीनप्ररूप 1:2:1); द्विसंकर F2 = 9:3:3:1; परीक्षण संकरण = 1:1। 3. अप्रभावी = छिपकर पुनः प्रकट; प्रभावी = दूसरे को ढके। 4. एक परिवार के आँकड़े प्रभाविता सिद्ध नहीं कर सकते — अनुपात/परीक्षण-संकरण चाहिए। 5. रक्त समूह: I^A, I^B, i पर प्रभावी; I^A व I^B सहप्रभावी (AB)। O = ii।
हल किए गए उदाहरण
उदाहरण 1: NCERT — रक्त समूह प्रभाविता
A समूह का पुरुष O समूह की स्त्री से विवाह करता है एवं उनकी पुत्री O समूह की है। क्या यह जानकारी बताने के लिए पर्याप्त है कि A या O में कौन प्रभावी है? क्यों/क्यों नहीं?
हल: नहीं, पर्याप्त नहीं। A समूह वाला पिता I^A i (छिपा i सहित) हो सकता है। माता i i (O) के साथ, I^A i × i i संकरण से संतति I^A i (A) या i i (O) होती है — अतः O पुत्री A के प्रभावी होने या न होने — दोनों में संभव है। एक ऐसा परिवार प्रभाविता स्थापित नहीं कर सकता; इसके लिए सटीक जीनप्ररूप या अधिक संतति के आँकड़े चाहिए।
उदाहरण 2: NCERT — लंबे जनक का जीनप्ररूप
एक मेंडलीय प्रयोग में बैंगनी पुष्प वाले लंबे मटर पौधों को सफ़ेद पुष्प वाले बौने पौधों से संकरित किया गया। संतति सभी बैंगनी पुष्प वाली थी, पर लगभग आधी बौनी। लंबे बैंगनी जनक का जीनप्ररूप? (a) TTWW (b) TTww (c) TtWW (d) TtWw
हल:
- पुष्प: सभी F1 बैंगनी → बैंगनी प्रभावी; कोई सफ़ेद नहीं, अतः बैंगनी जनक समयुग्मजी WW।
- ऊँचाई: लगभग आधी F1 बौनी → यह 1:1 (परीक्षण-संकरण) अनुपात है, जो तभी होता है जब लंबा जनक विषमयुग्मजी Tt हो एवं बौना tt।
अतः लंबा बैंगनी जनक Tt WW → विकल्प (c) TtWW।
उदाहरण 3: NCERT — हल्का नेत्र-रंग
हल्की आँखों वाले बच्चों के प्रायः हल्की आँखों वाले माता-पिता होते हैं। क्या इससे कह सकते हैं कि हल्का नेत्र-रंग प्रभावी है या अप्रभावी? क्यों/क्यों नहीं?
हल: नहीं, केवल इससे नहीं। यह अवलोकन केवल दर्शाता है कि हल्की आँखों वाले जनकों के प्रायः हल्की आँखों वाले बच्चे होते हैं — यह नहीं बताता कि हल्का एलील गहरे को ढकता है या ढका जाता है। प्रभाविता तय करने के लिए, उदाहरण के लिए, देखना होगा कि दो गहरी आँखों वाले जनकों की हल्की आँखों वाली संतान हो सकती है या नहीं (जो हल्के को अप्रभावी दर्शाएगी), या ज्ञात जीनप्ररूप वाले संकरण करने होंगे।
उदाहरण 4: NCERT — कुत्तों में कोट-रंग परियोजना
कुत्तों में प्रभावी कोट-रंग ज्ञात करने की परियोजना की रूपरेखा दीजिए।
हल:
- दो विपरीत कोट-रंग चुनें (जैसे काला एवं भूरा)।
- शुद्ध-प्रजनन काले कुत्तों को शुद्ध-प्रजनन भूरे से संकरित करें एवं F1 कोट-रंग नोट करें।
- जो रंग सभी F1 पिल्लों में प्रकट हो, वह प्रभावी रंग है।
- पुष्टि के लिए F1 को आपस में संकरित कर देखें कि अप्रभावी रंग F2 के लगभग 1/4 में पुनः प्रकट हो (3:1 अनुपात)।
उदाहरण 5: द्विसंकर अभ्यास संकरण
RrYy × RrYy संकरण में कितने अंश संतति गोल एवं पीली (दोनों प्रभावी) होगी?
हल: 9:3:3:1 अनुपात में द्वि-प्रभावी (गोल, पीला) वर्ग 16 में से 9 है। अतः संतति का 9/16 गोल एवं पीला होगा।
सार: 9/16 द्वि-प्रभावी, 3/16 + 3/16 एकल-प्रभावी, 1/16 द्वि-अप्रभावी।