ग्रेगर मेंडल — आनुवंशिकी के जनक
ग्रेगर जोहान मेंडल (1822–1884) की शिक्षा एक मठ में हुई एवं उन्होंने वियना विश्वविद्यालय में विज्ञान व गणित पढ़ा। उन्होंने अपने मठ के बगीचे में मटर के पौधे उगाए। वंशागति का अध्ययन पहले भी हुआ था, पर मेंडल पहले व्यक्ति थे जिन्होंने प्रत्येक पीढ़ी में हर लक्षण दिखाने वाले व्यक्तियों की सटीक गणना की। जीव-विज्ञान एवं गणित के मेल से वे वंशागति के नियमों तक पहुँचे।
मटर ही क्यों?
मटर का चुनाव चतुराईपूर्ण था: इसमें कई आसानी से दिखने वाले विपरीत लक्षण होते हैं — जैसे गोल/झुर्रीदार बीज, लंबे/बौने पौधे, सफ़ेद/बैंगनी पुष्प — और इसे आवश्यकतानुसार स्व- या पर-परागित किया जा सकता है।
एकसंकर संकरण (एक लक्षण)

आरेख के अंग्रेज़ी लेबलों के हिन्दी अर्थ:
| English (in image) | हिन्दी |
|---|---|
| Tall | लंबा |
| Short | बौना |
| self-pollination | स्वपरागण |
| Tall : Short = 3 : 1 | लंबा : बौना = 3 : 1 |
एक लक्षण का अनुसरण करने वाला संकरण एकसंकर संकरण कहलाता है। मेंडल ने एक लंबे मटर पौधे को एक बौने पौधे से संकरित किया एवं संतति की गणना की।
प्रथम पीढ़ी (F1): सभी संतति लंबी थीं — कोई मध्यम-ऊँचाई का पौधा नहीं। अतः केवल एक जनक-लक्षण दिखा, दोनों का मिश्रण नहीं।
इससे प्रश्न उठा: क्या ये F1 लंबे पौधे लंबे जनक जैसे ही हैं? पता लगाने के लिए मेंडल ने F1 लंबे पौधों को स्वपरागित होने दिया।
F2 पीढ़ी — 3:1 अनुपात
जब F1 लंबे पौधे स्वपरागित हुए, तो दूसरी पीढ़ी (F2) सभी लंबी नहीं थी। लगभग एक-चौथाई बौने थे — बौनापन पुनः प्रकट हो गया!
अतः F2 में लंबे एवं बौने पौधे 3 : 1 के अनुपात में थे।
इसका क्या अर्थ है?
- बौनेपन का लक्षण F1 में उपस्थित (छिपा) था पर अभिव्यक्त नहीं हुआ — केवल लंबाई दिखी।
- इससे मेंडल ने प्रस्तावित किया कि प्रत्येक लक्षण को कारक (जीन) की दो प्रतियाँ नियंत्रित करती हैं। ये दो समान या भिन्न हो सकती हैं।
लंबे के लिए T एवं बौने के लिए t लेने पर: लंबा जनक TT, बौना जनक tt, एवं F1 पौधे Tt (लंबे, क्योंकि T अभिव्यक्त होता है)।
[बोर्ड ट्रैप] क्लासिक एकसंकर परिणाम — F1 = सभी लंबे; F2 = 3 लंबे : 1 बौना। दोनों याद रखें।
स्मृति कैप्सूल — खंड 3
त्वरित पुनरावृत्ति: मेंडल एवं एकसंकर संकरण।
1. मेंडल — मटर का उपयोग; पहली बार प्रति पीढ़ी प्रति लक्षण व्यक्तियों की गणना। 2. मटर चुना — विपरीत लक्षणों (गोल/झुर्रीदार, लंबा/बौना, बैंगनी/सफ़ेद) एवं आसान स्व/पर-परागण के कारण। 3. एकसंकर संकरण = एक लक्षण। लंबा (TT) × बौना (tt)। 4. F1 = सभी लंबे (Tt) — केवल एक लक्षण दिखता; कोई मध्यम पौधा नहीं। 5. F2 = 3 लंबे : 1 बौना — बौनापन पुनः प्रकट → प्रत्येक लक्षण के दो कारक (जीन)।
हल किए गए उदाहरण
उदाहरण 1: मटर का पौधा क्यों?
मेंडल ने अपने प्रयोगों के लिए मटर क्यों चुना?
हल: क्योंकि मटर में कई स्पष्ट विपरीत लक्षण (गोल/झुर्रीदार बीज, लंबे/बौने पौधे, बैंगनी/सफ़ेद पुष्प) होते हैं जिन्हें गिनना आसान है, और इसे आवश्यकतानुसार स्व- या पर-परागित किया जा सकता है — जिससे नियंत्रित प्रयोग संभव हैं।
उदाहरण 2: F1 परिणाम
मेंडल ने लंबे मटर पौधे को बौने से संकरित किया। F1 कैसा था, एवं इसने क्या दर्शाया?
हल: सभी F1 पौधे लंबे थे — कोई मध्यम-ऊँचाई का पौधा नहीं। इससे पता चला कि दोनों जनक-लक्षणों में से केवल एक (लंबाई) अभिव्यक्त हुआ, मिश्रण नहीं। अतः लंबाई प्रभावी एवं बौनापन अप्रभावी लक्षण है।
उदाहरण 3: F2 परिणाम एवं उसका अर्थ
मेंडल द्वारा F1 लंबे पौधों के स्वपरागण पर F2 अनुपात क्या था, एवं इसने क्या सिद्ध किया?
हल: F2 में लंबे एवं बौने पौधे 3 : 1 के अनुपात में थे (लगभग एक-चौथाई बौने)। इसने सिद्ध किया कि बौनेपन का लक्षण लुप्त नहीं हुआ था — वह F1 में उपस्थित पर छिपा (अनभिव्यक्त) था। अतः प्रत्येक जीव में लक्षण के लिए दो कारक (जीन) होते हैं।
उदाहरण 4: जीनप्ररूप लिखना
T (लंबा) एवं t (बौना) का उपयोग कर लंबे जनक, बौने जनक एवं F1 पौधों के जीनप्ररूप लिखिए।
हल:
- लंबा जनक = TT
- बौना जनक = tt
- F1 पौधे = Tt (लंबे, क्योंकि T प्रभावी है एवं अभिव्यक्त होता है)