जीन प्रोटीन के माध्यम से लक्षण नियंत्रित करते हैं

कोई जीन वास्तव में किसी लक्षण को कैसे उत्पन्न करता है? इसका उत्तर डी.एन.ए. को प्रोटीन से जोड़ता है।

कोशिकीय डी.एन.ए. प्रोटीन बनाने की सूचना का स्रोत हैडी.एन.ए. का वह भाग जो एक प्रोटीन की सूचना रखता है, उस प्रोटीन का जीन कहलाता है।

जीन एंजाइम और हार्मोन मार्ग द्वारा लक्षण नियंत्रित करता है

आरेख के अंग्रेज़ी लेबलों के हिन्दी अर्थ:

English (in image) हिन्दी
GENE (section of DNA) जीन (डी.एन.ए. का भाग)
PROTEIN / ENZYME प्रोटीन / एंजाइम
HORMONE हार्मोन
TALL plant लंबा पौधा
SHORT plant बौना पौधा

पौधे की ऊँचाई का उदाहरण लें:

  1. पौधों में वृद्धि प्रेरित करने वाले हार्मोन होते हैं; ऊँचाई किसी हार्मोन की मात्रा पर निर्भर है।
  2. बनने वाले हार्मोन की मात्रा उस एंजाइम (प्रोटीन) पर निर्भर है जो उसे बनाने में सहायक है।
  3. यदि उस एंजाइम का जीन कुशलता से काम करे → अधिक हार्मोन → लंबा पौधा।
  4. यदि जीन परिवर्तित हो जिससे एंजाइम कम कुशल हो → कम हार्मोन → बौना पौधा।

अतः जीन प्रोटीन को नियंत्रित करके लक्षणों को नियंत्रित करते हैं।

प्रत्येक जीन की दो प्रतियाँ

मेंडल के परिणाम तभी अर्थपूर्ण हैं जब दोनों जनक समान योगदान दें। यदि दोनों जनक किसी लक्षण को तय करने में सहायक हैं, तो प्रत्येक को उसी जीन की एक प्रति देनी होगी।

इसका अर्थ है कि प्रत्येक जीव (जैसे मटर पौधा) में सभी जीनों के दो समुच्चय — एक-एक जनक से होने चाहिए। और पीढ़ियों में यह चलने के लिए प्रत्येक जनन कोशिका (युग्मक) में केवल एक समुच्चय होना चाहिए; अन्यथा हर पीढ़ी में जीन-समुच्चयों की संख्या दुगुनी हो जाती।

मुख्य बिंदु: कायिक कोशिकाएँ = प्रत्येक जीन की दो प्रतियाँ; जनन कोशिकाएँ (युग्मक) = एक प्रति। निषेचन जोड़ी पुनः स्थापित करता है।

गुणसूत्र — लक्षण स्वतंत्र रूप से क्यों पृथक होते हैं

काय कोशिकाओं, युग्मकों और निषेचन में गुणसूत्र समूह

आरेख के अंग्रेज़ी लेबलों के हिन्दी अर्थ:

English (in image) हिन्दी
Body cell: 2 copies कायिक कोशिका: 2 प्रतियाँ
Germ cell: 1 set जनन कोशिका: 1 समुच्चय
FERTILISATION निषेचन
from father पिता से
from mother माता से

एक पहेली: यदि पूरा जीन-समुच्चय एक लंबे धागे के रूप में वंशागत होता, तो दो लक्षण (जैसे बीज-आकार 'R' एवं रंग 'y') सदैव सहलग्न रहते — एवं स्वतंत्र रूप से वंशागत नहीं हो सकते। पर मेंडल ने दिखाया कि वे स्वतंत्र हैं। कैसे?

क्योंकि जीन-समुच्चय एक धागा नहीं — यह पृथक स्वतंत्र टुकड़ों के रूप में होता है, प्रत्येक को गुणसूत्र कहते हैं।

  • प्रत्येक कोशिका में प्रत्येक गुणसूत्र की दो प्रतियाँ — एक पिता से, एक माता से।
  • प्रत्येक जनन कोशिका प्रत्येक जोड़ी से एक गुणसूत्र लेती है (जो मातृ या पितृ हो सकता है)।
  • निषेचन पर दो जनन कोशिकाओं के मिलने से सामान्य (जोड़ीदार) गुणसूत्र संख्या पुनः स्थापित होती है, जिससे स्पीशीज़ का डी.एन.ए. स्थिर रहता है।

चूँकि भिन्न गुणसूत्र युग्मकों में स्वतंत्र रूप से पहुँचते हैं, भिन्न गुणसूत्रों पर स्थित जीन स्वतंत्र रूप से वंशागत होते हैं।

[NEET महत्वपूर्ण] यह गुणसूत्र-तंत्र मेंडल के परिणामों की व्याख्या करता है एवं सभी लैंगिक जनन करने वाले जीव इसका उपयोग करते हैं।

स्मृति कैप्सूल — खंड 6

त्वरित पुनरावृत्ति: लक्षण कैसे अभिव्यक्त होते हैं।

1. जीन = डी.एन.ए. का वह भाग जो एक प्रोटीन की सूचना रखता है। 2. मार्ग: जीन → प्रोटीन/एंजाइम → हार्मोन की मात्रा → लक्षण (कुशल एंजाइम → लंबा; परिवर्तित → बौना)। *3. जीन प्रोटीन को नियंत्रित करके लक्षण नियंत्रित करते हैं। *4. कायिक कोशिकाओं में प्रत्येक जीन/गुणसूत्र की दो प्रतियाँ (एक-एक जनक से); जनन कोशिकाओं में एक।* 5. जीन-समुच्चय गुणसूत्रों के रूप में, एक धागे में नहीं → भिन्न गुणसूत्रों के जीन स्वतंत्र पृथक। 6. निषेचन जोड़ीदार संख्या पुनः स्थापित करता है → स्पीशीज़ का डी.एन.ए. स्थिर।

हल किए गए उदाहरण

उदाहरण 1: जीन → प्रोटीन → लक्षण

पौधे की ऊँचाई से समझाइए कि जीन किसी लक्षण को कैसे नियंत्रित करता है।

हल: एक जीन किसी प्रोटीन (एंजाइम) को बनाने की सूचना रखता है। ऊँचाई के लिए यह एंजाइम तय करता है कि कितना वृद्धि हार्मोन बने:

  • कुशल एंजाइम → अधिक हार्मोन → लंबा पौधा।
  • परिवर्तित जीन से कम-कुशल एंजाइम → कम हार्मोन → बौना पौधा।

अतः जीन प्रोटीन (एंजाइम) को नियंत्रित करके लक्षण नियंत्रित करते हैं।

उदाहरण 2: NCERT — समान आनुवंशिक योगदान

संतति में नर एवं मादा जनकों का समान आनुवंशिक योगदान कैसे सुनिश्चित होता है?

हल: प्रत्येक जनक के जीन गुणसूत्रों पर होते हैं, जो कायिक कोशिकाओं में जोड़ियों में होते हैं। युग्मक-निर्माण में प्रत्येक जनन कोशिका को प्रत्येक जोड़ी का एक गुणसूत्र मिलता है। निषेचन पर नर एवं मादा युग्मक मिलते हैं, एवं संतति को पिता से एक समुच्चय एवं माता से एक समुच्चय गुणसूत्र मिलते हैं — जिससे दोनों का समान योगदान होता है।

उदाहरण 3: जनन कोशिका में एक समुच्चय क्यों?

जनन कोशिका में केवल एक जीन-समुच्चय क्यों होना चाहिए?

हल: यदि प्रत्येक जनन कोशिका में पूरा (दुगुना) समुच्चय होता, तो दो जनन कोशिकाओं के मिलने पर संतति में चार समुच्चय होते, एवं यह हर पीढ़ी दुगुना होता। जीन-समुच्चयों की संख्या स्थिर रखने के लिए प्रत्येक जनन कोशिका में केवल एक समुच्चय होता है, ताकि निषेचन ठीक दो समुच्चय पुनः स्थापित करे।

उदाहरण 4: गुणसूत्र एवं स्वतंत्र वंशागति

गुणसूत्र दो लक्षणों की स्वतंत्र वंशागति की व्याख्या कैसे करते हैं?

हल: जीन पृथक गुणसूत्रों पर होते हैं, एक सतत धागे पर नहीं। युग्मक-निर्माण में प्रत्येक गुणसूत्र-जोड़ी स्वतंत्र रूप से पृथक होती है, अतः किसी युग्मक को एक गुणसूत्र की मातृ प्रति एवं दूसरे की पितृ प्रति मिल सकती है। भिन्न गुणसूत्रों के जीन इस प्रकार नए संयोजनों में पहुँचते हैं — यही कारण है कि बीज-आकार एवं रंग जैसे लक्षण स्वतंत्र रूप से वंशागत होते हैं।