इस खंड के बारे में
यह अध्याय 8 (आनुवंशिकता) के हर विषय को समेटते हुए 30+ हल किए गए उदाहरणों का संग्रह है — विविधता, मेंडल के एकसंकर व द्विसंकर संकरण, प्रभावी/अप्रभावी, जीनप्ररूप/लक्षणप्ररूप, पनेट वर्ग, जीन-प्रोटीन-गुणसूत्र, लिंग निर्धारण एवं रक्त समूह। सभी NCERT पाठ्य एवं अभ्यास प्रश्न यहाँ हल हैं।
बोर्ड तैयारी सुझाव:
- प्रत्येक संकरण को पहले स्वयं पनेट वर्ग से हल करें।
- मुख्य अनुपात याद रखें: एकसंकर 3:1, द्विसंकर 9:3:3:1, परीक्षण संकरण 1:1।
- जीनप्ररूप बनाम लक्षणप्ररूप पक्का करें।
- सभी NCERT अभ्यास हल करें।
आरंभ करें!
उदाहरण 1: NCERT — कौन-सा लक्षण पहले उत्पन्न हुआ?
अलैंगिक समष्टि में लक्षण A 10% एवं B 60% में है। कौन पहले उत्पन्न हुआ?
हल: लक्षण B। अलैंगिक जनन में लक्षण पीढ़ियों में फैलता है, अतः अधिक व्यापक लक्षण (B, 60%) प्रायः अधिक पुराना होता है।
उदाहरण 2: NCERT — विविधता एवं उत्तरजीविता
विविधता का निर्माण उत्तरजीविता को कैसे बढ़ावा देता है?
हल: विविधता व्यक्तियों को भिन्न लाभ देती है। पर्यावरण बदलने पर कुछ विभिन्नताएँ अनुकूल होकर जीवित रहती हैं, जिससे स्पीशीज़ की उत्तरजीविता सुनिश्चित होती है।
उदाहरण 3: अलैंगिक बनाम लैंगिक विविधता
लैंगिक जनन अधिक विविधता क्यों देता है?
हल: अलैंगिक संतति केवल डी.एन.ए.-त्रुटियों से भिन्न होती है। लैंगिक संतति दो जनकों का डी.एन.ए. मिलाती है, जिससे नए संयोजन एवं कहीं अधिक विविधता बनती है।
उदाहरण 4: आनुवंशिकता एवं लक्षण परिभाषित कीजिए
आनुवंशिकता एवं लक्षण परिभाषित कीजिए; एक वंशागत मानव लक्षण दीजिए।
हल: आनुवंशिकता = डी.एन.ए. द्वारा जनक से संतति में लक्षणों का संचरण। लक्षण = विशिष्ट गुण। उदाहरण: स्वतंत्र/संलग्न कर्णपाली।
उदाहरण 5: प्रत्येक लक्षण के दो रूप
प्रत्येक शिशु में हर लक्षण के दो रूप क्यों?
हल: क्योंकि दोनों जनक समान डी.एन.ए. देते हैं, अतः शिशु को प्रत्येक जीन की एक प्रति प्रत्येक जनक से मिलती है — प्रति लक्षण दो रूप, जो समान या भिन्न हो सकते हैं।
उदाहरण 6: मटर ही क्यों?
मेंडल ने मटर क्यों चुना?
हल: इसमें स्पष्ट विपरीत लक्षण (गोल/झुर्रीदार, लंबा/बौना, बैंगनी/सफ़ेद) होते हैं एवं इसे स्व- या पर-परागित किया जा सकता है, जिससे नियंत्रित प्रयोग संभव हैं।
उदाहरण 7: एकसंकर F1
लंबे × बौने संकरण में F1 क्या है एवं यह क्या दर्शाता है?
हल: सभी F1 लंबे (Tt) — कोई मध्यम पौधा नहीं। केवल प्रभावी लक्षण (लंबाई) अभिव्यक्त होता है; लक्षण मिश्रित नहीं होते।
उदाहरण 8: एकसंकर F2
F1 के स्वपरागण पर F2 अनुपात एवं उसका अर्थ?
हल: F2 = 3 लंबे : 1 बौना। बौनापन पुनः प्रकट होता है, जो सिद्ध करता है कि वह F1 में छिपा (अप्रभावी) था एवं प्रत्येक लक्षण के दो जीन होते हैं।
उदाहरण 9: NCERT — प्रभावी या अप्रभावी?
मेंडल के प्रयोग कैसे दर्शाते हैं कि लक्षण प्रभावी या अप्रभावी हो सकते हैं?
हल: F1 (Tt) में केवल लंबाई दिखती है (प्रभावी); बौनापन छिपा रहता है। F2 में बौनापन 1/4 पौधों में पुनः प्रकट होता है — अतः वह अप्रभावी था, केवल tt होने पर अभिव्यक्त। अतः लक्षण प्रभावी (T) या अप्रभावी (t) हो सकते हैं।
उदाहरण 10: NCERT — स्वतंत्र वंशागति
मेंडल के प्रयोग कैसे दर्शाते हैं कि लक्षण स्वतंत्र रूप से वंशागत होते हैं?
हल: द्विसंकर संकरण में F2 में नए संयोजन (गोल-हरे, झुर्रीदार-पीले) मिलते हैं जो जनकों में नहीं थे। यह सिद्ध करता है कि बीज-आकार एवं रंग स्वतंत्र रूप से वंशागत होते हैं (9:3:3:1)।
उदाहरण 11: जीनप्ररूप बनाम लक्षणप्ररूप
TT, Tt, tt का लक्षणप्ररूप (T लंबा प्रभावी) दीजिए।
हल: TT → लंबा, Tt → लंबा, tt → बौना। TT व Tt का लक्षणप्ररूप समान (लंबा) पर जीनप्ररूप भिन्न।
उदाहरण 12: Tt × Tt संकरण
Tt × Tt का जीनप्ररूप एवं लक्षणप्ररूप अनुपात दीजिए।
हल: पनेट वर्ग → TT, Tt, Tt, tt। जीनप्ररूप 1:2:1; लक्षणप्ररूप 3 लंबे : 1 बौना।
उदाहरण 13: परीक्षण संकरण Tt × tt
Tt × tt से क्या संतति मिलती है?
हल: युग्मक T,t × t,t → Tt, Tt, tt, tt। जीनप्ररूप 1 Tt : 1 tt; लक्षणप्ररूप 1 लंबा : 1 बौना (1:1)।
उदाहरण 14: 3:1 अनुपात से तर्क
संकरण 3:1 लक्षणप्ररूप अनुपात देता है। जनकों के जीनप्ररूप क्या थे?
हल: 3:1 अनुपात Tt × Tt (दो विषमयुग्मजी) से आता है, जिसमें 1/4 संतति अप्रभावी होती है।
उदाहरण 15: द्विसंकर F2 अनुपात
द्विसंकर संकरण का F2 लक्षणप्ररूप अनुपात एवं चार वर्ग बताइए।
हल: 9 : 3 : 3 : 1 — 9 गोल-पीले, 3 गोल-हरे, 3 झुर्रीदार-पीले, 1 झुर्रीदार-हरे।
उदाहरण 16: द्विसंकर के युग्मक
RrYy किस प्रकार के युग्मक बनाता है?
हल: समान संख्या में चार प्रकार: RY, Ry, rY, ry (प्रत्येक जीन स्वतंत्र पृथक)।
उदाहरण 17: द्वि-अप्रभावी का अंश
द्विसंकर F2 में झुर्रीदार-हरे का अंश क्या है?
हल: द्वि-अप्रभावी वर्ग 1/16 (जीनप्ररूप rryy) है।
उदाहरण 18: जीन से लक्षण
जीन पौधे की ऊँचाई को कैसे नियंत्रित करता है?
हल: जीन → एंजाइम (प्रोटीन) बनाता है → एंजाइम वृद्धि हार्मोन की मात्रा नियंत्रित करता है → अधिक हार्मोन = लंबा; परिवर्तित जीन → कम-कुशल एंजाइम → कम हार्मोन → बौना। जीन प्रोटीन को नियंत्रित करके लक्षण नियंत्रित करते हैं।
उदाहरण 19: प्रत्येक जीन की दो प्रतियाँ
प्रत्येक जीव में हर जीन की दो प्रतियाँ क्यों?
हल: क्योंकि वह प्रत्येक जनक से एक समुच्चय वंशागत करता है। अतः कायिक कोशिकाओं में प्रत्येक जीन की दो प्रतियाँ (जोड़ीदार गुणसूत्रों पर) होती हैं।
उदाहरण 20: जनन कोशिका में एक समुच्चय क्यों?
जनन कोशिका में केवल एक समुच्चय क्यों?
हल: यदि युग्मकों में पूरा दुगुना समुच्चय होता, तो समुच्चयों की संख्या हर पीढ़ी दुगुनी होती। एक समुच्चय संख्या स्थिर रखता है: निषेचन दो समुच्चय पुनः स्थापित करता है।
उदाहरण 21: गुणसूत्र एवं स्वतंत्रता
गुणसूत्र स्वतंत्र वंशागति की व्याख्या कैसे करते हैं?
हल: जीन पृथक गुणसूत्रों पर होते हैं, एक धागे पर नहीं। प्रत्येक गुणसूत्र-जोड़ी युग्मकों में स्वतंत्र रूप से पृथक होती है, अतः भिन्न गुणसूत्रों के जीन नए संयोजनों में पहुँचते हैं — स्वतंत्र वंशागति।
उदाहरण 22: NCERT — समान आनुवंशिक योगदान
दोनों जनकों का समान आनुवंशिक योगदान कैसे सुनिश्चित होता है?
हल: जीन जोड़ीदार गुणसूत्रों पर होते हैं; प्रत्येक जनन कोशिका को प्रत्येक जोड़ी का एक गुणसूत्र मिलता है। निषेचन पर संतति को पिता से एक समुच्चय एवं माता से एक समुच्चय मिलता है — समान योगदान।
उदाहरण 23: NCERT — लिंग कैसे तय होता है?
मानव शिशु का लिंग कैसे तय होता है?
हल: मादा XX, नर XY। माता प्रत्येक शिशु को X देती है; पिता X (→ लड़की) या Y (→ लड़का) देता है। अतः पिता का गुणसूत्र लिंग तय करता है।
उदाहरण 24: अलिंगसूत्र बनाम लिंग-गुणसूत्र
मनुष्यों में अलिंगसूत्र एवं लिंग-गुणसूत्र में अंतर बताइए।
हल: अलिंगसूत्र = 22 जोड़ी, दोनों लिंगों में समान। लिंग-गुणसूत्र = 1 जोड़ी (मादा XX, नर XY) जो लिंग तय करती है।
उदाहरण 25: 1:1 लिंग अनुपात
लड़के एवं लड़कियाँ लगभग समान संख्या में क्यों?
हल: पिता समान संख्या में X एवं Y शुक्राणु बनाता है; X से लड़की एवं Y से लड़का, अतः संभावना समान — लगभग 1:1।
उदाहरण 26: लिंग कौन तय करता है?
क्या शिशु के लिंग के लिए माता को दोष देना वैज्ञानिक रूप से सही है?
हल: नहीं। माता केवल X दे सकती है; पिता का X या Y लिंग तय करता है। अतः पिता का शुक्राणु शिशु का लिंग तय करता है।
उदाहरण 27: NCERT अभ्यास — लंबे जनक का जीनप्ररूप
लंबे बैंगनी × बौने सफ़ेद से सभी बैंगनी, ~आधी बौनी। लंबे बैंगनी जनक का जीनप्ररूप? (a)TTWW (b)TTww (c)TtWW (d)TtWw
हल: सभी बैंगनी → WW; ~आधी बौनी → Tt (1:1 परीक्षण-संकरण)। उत्तर: (c) TtWW।
उदाहरण 28: NCERT अभ्यास — हल्का नेत्र-रंग
क्या "हल्की आँखों वाले बच्चों के हल्की आँखों वाले जनक" से पता चलता है कि हल्का प्रभावी/अप्रभावी है?
हल: नहीं। ऐसी समानता प्रभाविता नहीं बताती; देखना होगा कि लक्षण छिपकर पुनः प्रकट हो सकता है या नहीं, या ज्ञात जीनप्ररूप वाले संकरण करने होंगे।
उदाहरण 29: NCERT अभ्यास — कुत्तों में कोट-रंग परियोजना
कुत्तों में प्रभावी कोट-रंग ज्ञात करने की परियोजना की रूपरेखा दीजिए।
हल: दो रंगों के शुद्ध-प्रजनन कुत्तों को संकरित करें; सभी F1 में दिखने वाला रंग प्रभावी है। F1 को आपस में संकरित कर पुष्टि करें कि अप्रभावी रंग F2 के ~1/4 में पुनः प्रकट हो (3:1)।
उदाहरण 30: NCERT अभ्यास — रक्त समूह प्रभाविता
A-समूह पिता × O-समूह माता → O-समूह पुत्री। क्या यह A/O में से प्रभावी तय करने के लिए पर्याप्त है?
हल: नहीं। A पिता I^A i हो सकता है; I^A i × ii प्रभाविता चाहे जो हो, A या O संतति देता है। एक परिवार यह स्थापित नहीं कर सकता कि कौन-सा एलील प्रभावी है।
उदाहरण 31: रक्त समूह संकरण
जनक I^A i (A) एवं I^B i (B) हैं। संतानों के संभावित रक्त समूह बताइए।
हल: युग्मक: I^A, i × I^B, i → I^A I^B (AB), I^A i (A), I^B i (B), i i (O)। संतानें AB, A, B या O — चारों समूह संभव।
उदाहरण 32: द्वि-प्रभावी का अंश
RrYy × RrYy में गोल-पीली संतति का अंश क्या है?
हल: द्वि-प्रभावी वर्ग संतति का 9/16 है।
उदाहरण 33: एकसंकर गणना
Tt × Tt संकरण से 200 संतति बनती हैं। लगभग कितनी बौनी होंगी?
हल: बौनी (tt) = 1/4। अतः लगभग 1/4 × 200 = 50 बौनी (एवं ~150 लंबी) होंगी।