किरण आरेख बनाने के नियम

आरेख के अंग्रेज़ी लेबलों के हिन्दी अर्थ:
| English (in image) | हिन्दी |
|---|---|
| Parallel to axis | अक्ष के समांतर |
| Through focus (F) | फोकस से होकर |
| Through centre (C) | वक्रता केंद्र से होकर |
| At pole (P) | ध्रुव पर |
| equal angles | बराबर कोण |
प्रतिबिंब का स्थान ज्ञात करने के लिए हम इनमें से कोई दो मानक किरणें खींचते हैं; जहाँ वे मिलती हैं वहीं प्रतिबिंब है। अवतल दर्पण के लिए:
- मुख्य अक्ष के समांतर किरण परावर्तन के बाद फोकस F से होकर जाती है। (उत्तल दर्पण में F से आती प्रतीत होती है।)
- फोकस F से होकर जाने वाली किरण परावर्तन के बाद मुख्य अक्ष के समांतर निकलती है।
- वक्रता केंद्र C से होकर जाने वाली किरण उसी पथ पर वापस लौटती है (वह दर्पण पर अभिलंबवत पड़ती है)।
- ध्रुव P पर पड़ने वाली किरण मुख्य अक्ष से बराबर कोण बनाते हुए परावर्तित होती है।
मुख्य बिंदु: इनमें से कोई दो किरणें प्रतिबिंब स्थिर कर देती हैं — चारों की आवश्यकता नहीं।
अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब बनना

आरेख के अंग्रेज़ी लेबलों के हिन्दी अर्थ:
| English (in image) | हिन्दी |
|---|---|
| Object | वस्तु |
| Image | प्रतिबिंब |
| real, inverted | वास्तविक, उल्टा |
| virtual, erect | आभासी, सीधा |
| beyond C | C के परे |
| between P and F | P व F के बीच |
अवतल दर्पण का प्रतिबिंब इस पर निर्भर करता है कि वस्तु P, F एवं C के सापेक्ष कहाँ है:
| वस्तु स्थिति | प्रतिबिंब स्थिति | आकार | प्रकृति |
|---|---|---|---|
| अनंत पर | F पर | अत्यधिक छोटा (बिंदु) | वास्तविक, उल्टा |
| C के परे | F व C के बीच | छोटा | वास्तविक, उल्टा |
| C पर | C पर | बराबर | वास्तविक, उल्टा |
| C व F के बीच | C के परे | बड़ा | वास्तविक, उल्टा |
| F पर | अनंत पर | अत्यधिक बड़ा | वास्तविक, उल्टा |
| P व F के बीच | दर्पण के पीछे | बड़ा | आभासी, सीधा |
[बोर्ड ट्रैप] अवतल दर्पण आभासी, सीधा, बड़ा प्रतिबिंब केवल तब देता है जब वस्तु P व F के बीच हो (यह शेविंग/दंत-चिकित्सक दर्पण की स्थिति है)।
उत्तल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब बनना

आरेख के अंग्रेज़ी लेबलों के हिन्दी अर्थ:
| English (in image) | हिन्दी |
|---|---|
| Object | वस्तु |
| Image | प्रतिबिंब |
| virtual, erect, diminished | आभासी, सीधा, छोटा |
| behind mirror | दर्पण के पीछे |
उत्तल दर्पण सरल है — यह केवल एक ही प्रकार का प्रतिबिंब बनाता है:
| वस्तु स्थिति | प्रतिबिंब स्थिति | आकार | प्रकृति |
|---|---|---|---|
| अनंत पर | F पर (दर्पण के पीछे) | अत्यधिक छोटा (बिंदु) | आभासी, सीधा |
| अनंत व P के बीच | P व F के बीच (पीछे) | छोटा | आभासी, सीधा |
अतः उत्तल दर्पण सदैव आभासी, सीधा, छोटा प्रतिबिंब देता है, चाहे वस्तु कहीं भी हो। इसीलिए इसका दृष्टि-क्षेत्र चौड़ा होता है।
अवतल एवं उत्तल दर्पणों के उपयोग
अवतल दर्पण
- टॉर्च, सर्च-लाइट, वाहन हेडलाइट — शक्तिशाली समांतर किरण-पुंज पाने हेतु (स्रोत फोकस पर)।
- शेविंग दर्पण एवं दंत-चिकित्सक दर्पण — बड़ा, सीधा प्रतिबिंब देखने हेतु (वस्तु P व F के बीच)।
- सौर भट्टी — बड़े अवतल दर्पण सूर्यप्रकाश को संकेंद्रित कर ऊष्मा उत्पन्न करते हैं।
उत्तल दर्पण
- वाहनों में पश्च-दृश्य (साइड) दर्पण — सदैव सीधा, छोटा प्रतिबिंब एवं चौड़ा दृष्टि-क्षेत्र, अतः चालक पीछे का अधिक यातायात देख पाता है।
[बोर्ड ट्रैप] उत्तल दर्पण को पश्च-दृश्य दर्पण के रूप में: दोनों कारण दें — (1) सदैव सीधा प्रतिबिंब, (2) चौड़ा दृष्टि-क्षेत्र।
स्मृति कैप्सूल — खंड 2
त्वरित पुनरावृत्ति: दर्पणों द्वारा प्रतिबिंब बनना।
1. किरण नियम: समांतर→F से होकर; F से होकर→समांतर; C से होकर→वापस; P पर→बराबर कोण। कोई दो लें। 2. अवतल दर्पण प्रतिबिंब: F के परे वस्तु के लिए वास्तविक व उल्टा; आभासी, सीधा, बड़ा केवल P व F के बीच वस्तु के लिए। 3. C पर → C पर बराबर आकार; C व F के बीच → बड़ा; C के परे → छोटा। 4. उत्तल दर्पण: सदैव आभासी, सीधा, छोटा; चौड़ा दृष्टि-क्षेत्र। 5. उपयोग: अवतल → हेडलाइट, शेविंग/दंत, सौर भट्टी; उत्तल → पश्च-दृश्य दर्पण।
हल किए गए उदाहरण
उदाहरण 1: NCERT — सीधा एवं बड़ा प्रतिबिंब
किसी वस्तु का सीधा एवं बड़ा प्रतिबिंब देने वाले दर्पण का नाम लिखिए।
हल: अवतल दर्पण तब सीधा एवं बड़ा (आभासी) प्रतिबिंब देता है जब वस्तु ध्रुव (P) एवं फोकस (F) के बीच रखी हो। इसीलिए अवतल दर्पण शेविंग दर्पण एवं दंत-चिकित्सकों द्वारा उपयोग किए जाते हैं।
सार: सीधा + बड़ा प्रतिबिंब → अवतल दर्पण, वस्तु P व F के बीच।
उदाहरण 2: NCERT — पश्च-दृश्य दर्पण के रूप में उत्तल दर्पण
वाहनों में पश्च-दृश्य दर्पण के रूप में उत्तल दर्पण क्यों पसंद किया जाता है?
हल: क्योंकि उत्तल दर्पण:
- सदैव सीधा (यद्यपि छोटा) प्रतिबिंब बनाता है, अतः पीछे की वस्तुएँ सीधी दिखती हैं।
- चौड़ा दृष्टि-क्षेत्र रखता है (बाहर वक्र होने से), जिससे चालक समतल दर्पण की अपेक्षा पीछे का कहीं बड़ा क्षेत्र देख पाता है।
सार: दो कारण — सदैव सीधा प्रतिबिंब + चौड़ा दृष्टि-क्षेत्र।
उदाहरण 3: वस्तु वक्रता केंद्र पर
अवतल दर्पण के वक्रता केंद्र (C) पर एक वस्तु रखी है। प्रतिबिंब का वर्णन कीजिए।
हल: जब वस्तु C पर होती है, तो प्रतिबिंब भी C पर बनता है, वस्तु के बराबर आकार का, तथा वास्तविक एवं उल्टा होता है।
सार: वस्तु C पर → प्रतिबिंब C पर, बराबर आकार, वास्तविक, उल्टा (आवर्धन = -1)।
उदाहरण 4: NCERT अभ्यास — किसी भी दूरी पर सीधा प्रतिबिंब
चाहे आप दर्पण से कितनी भी दूर खड़े हों, आपका प्रतिबिंब सीधा दिखता है। दर्पण संभवतः है — (a) केवल समतल (b) केवल अवतल (c) केवल उत्तल (d) या तो समतल या उत्तल।
हल: (d) या तो समतल या उत्तल। समतल दर्पण सदैव सीधा प्रतिबिंब देता है, एवं उत्तल दर्पण सदैव (किसी भी स्थिति के लिए) सीधा (छोटा) प्रतिबिंब देता है। अवतल दर्पण सीधा प्रतिबिंब केवल P व F के बीच वस्तु के लिए देता है, अतः वह हट जाता है।
सार: सदैव-सीधा प्रतिबिंब ⇒ समतल या उत्तल दर्पण।
उदाहरण 5: NCERT अभ्यास — प्रत्येक उपयोग के लिए दर्पण
निम्न में प्रयुक्त दर्पण का प्रकार बताइए: (a) कार की हेडलाइट, (b) साइड/पश्च-दृश्य दर्पण, (c) सौर भट्टी। कारण दें।
हल: (a) अवतल दर्पण — फोकस पर बल्ब शक्तिशाली समांतर किरण-पुंज देता है। (b) उत्तल दर्पण — चौड़े दृष्टि-क्षेत्र के साथ सीधा, छोटा प्रतिबिंब देता है। (c) अवतल दर्पण — बड़ा अवतल दर्पण सूर्यप्रकाश को फोकस पर संकेंद्रित कर तीव्र ऊष्मा उत्पन्न करता है।
सार: हेडलाइट व सौर भट्टी → अवतल; पश्च-दृश्य → उत्तल।