अध्याय सारांश
यह अध्याय 3 — लिंग, धर्म और जाति — का संक्षिप्त पुनरावलोकन है। बोर्ड परीक्षा से पहले अंतिम समय की पुनरावृत्ति के लिए इसका उपयोग करें।
1. लिंग-भेद एक सामाजिक विभाजन है, जैविक नहीं, जो रूढ़ियों पर आधारित है। श्रम का लैंगिक विभाजन महिलाओं को घरेलू काम तक सीमित करता है, और सार्वजनिक/निजी विभाजन उनकी सार्वजनिक भूमिका को न्यूनतम रखता है। हमारा समाज आज भी पितृसत्तात्मक है।
2. नारीवादी आंदोलनों ने समान राजनीतिक, कानूनी और शैक्षिक अधिकारों की माँग की (क्रांतिकारी आंदोलनों ने पारिवारिक जीवन में भी समानता चाही)। एक नारीवादी महिलाओं और पुरुषों के लिए समान अधिकारों में विश्वास करता है।
3. महिलाओं के साथ भेदभाव — महिला साक्षरता 54 प्रतिशत बनाम पुरुषों की 76 प्रतिशत; समान पारिश्रमिक अधिनियम, 1976 के बावजूद महिलाओं को कम भुगतान; बाल लिंग-अनुपात घटकर 919; उत्पीड़न और घरेलू हिंसा।
4. महिलाओं का प्रतिनिधित्व कम है — लोक सभा 14.36 प्रतिशत (2019), विधानसभाएँ 5 प्रतिशत से कम। स्थानीय निकायों की एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं; नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 लोक सभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देता है।
5. धर्म और राजनीति — एक वैध संबंध मौजूद है (गांधीजी के नैतिक मूल्य; अल्पसंख्यकों की रक्षा; पारिवारिक कानूनों में सुधार), जो तब तक स्वीकार्य है जब तक हर धर्म के साथ समान व्यवहार हो। समस्या सांप्रदायिकता है — धर्म का अनन्य, पक्षपातपूर्ण रूप में उपयोग।
6. सांप्रदायिकता इस विचार पर टिकी है कि धर्म ही समुदाय का प्रमुख आधार है। इसके रूप हैं रोज़मर्रा का पूर्वाग्रह, राजनीतिक प्रभुत्व की चाह (बहुसंख्यक या अलगाववादी), राजनीतिक लामबंदी, और सांप्रदायिक हिंसा।
7. धर्मनिरपेक्ष राज्य — संविधान में कोई आधिकारिक धर्म नहीं है, किसी भी धर्म को मानने/आचरण/प्रचार की स्वतंत्रता देता है, भेदभाव का निषेध करता है, और राज्य को समानता के लिए हस्तक्षेप करने देता है (अस्पृश्यता पर रोक)। धर्मनिरपेक्षता भारत की आधारशिला है।
8. जाति — भारत की अपनी विशेषता, अनुष्ठान-मान्य वंशानुगत व्यवसाय पर आधारित। यह कमजोर हो रही है पर समाप्त नहीं हुई; आर्थिक स्थिति से जुड़ी रहती है। राजनीति में जाति (जाति राजनीति को आकार देती है) और जाति में राजनीति (राजनीति जाति को आकार देती है) दोनों तरफ काम करते हैं; अकेली जाति चुनाव तय नहीं करती।
याद रखने योग्य मुख्य शब्द
- श्रम का लैंगिक विभाजन: एक ऐसी व्यवस्था जिसमें घर के भीतर का सारा काम परिवार की महिलाएँ करती या करवाती हैं।
- पितृसत्ता: शाब्दिक अर्थ 'पिता का शासन'; एक ऐसी व्यवस्था जो पुरुषों को अधिक महत्व देती है और उन्हें महिलाओं पर सत्ता देती है।
- नारीवादी: एक महिला या पुरुष जो महिलाओं और पुरुषों के लिए समान अधिकारों और अवसरों में विश्वास करता है।
- सांप्रदायिकता: राजनीति में धर्म का उपयोग इस मान्यता पर कि धर्म ही सामाजिक समुदाय का प्रमुख आधार है।
- धर्मनिरपेक्ष राज्य: एक ऐसा राज्य जिसका कोई आधिकारिक धर्म नहीं है, जो सभी धर्मों के साथ समान व्यवहार करता है और धर्म की स्वतंत्रता की रक्षा करता है।
- पारिवारिक कानून: विवाह, तलाक, गोद लेने और उत्तराधिकार से संबंधित कानून; भारत में विभिन्न धर्मों पर विभिन्न पारिवारिक कानून लागू होते हैं।
- व्यावसायिक गतिशीलता: एक व्यवसाय से दूसरे व्यवसाय की ओर स्थानांतरण, आमतौर पर पीढ़ियों में।
- शहरीकरण: ग्रामीण से शहरी क्षेत्रों की ओर जनसंख्या का स्थानांतरण।
त्वरित पुनरावृत्ति — तथ्य और आँकड़े
| मद | मुख्य तथ्य |
|---|---|
| महिला साक्षरता बनाम पुरुष साक्षरता | 54 प्रतिशत बनाम 76 प्रतिशत |
| समान मजदूरी कानून | समान पारिश्रमिक अधिनियम, 1976 |
| बाल लिंग-अनुपात (जनगणना 2011) | प्रति 1000 लड़कों पर 919 बालिकाएँ |
| लोक सभा में महिलाएँ (2019) | 14.36 प्रतिशत (पहली बार) |
| राज्य विधानसभाओं में महिलाएँ | 5 प्रतिशत से कम |
| स्थानीय निकायों में आरक्षण | महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें |
| महिला आरक्षण अधिनियम, 2023 | नारी शक्ति वंदन अधिनियम — 33 प्रतिशत |
| अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति (2011) | 16.6 प्रतिशत / 8.6 प्रतिशत |
| अन्य पिछड़ा वर्ग (NSS 2004-05) | लगभग 41 प्रतिशत |
| भारत की विशेष सामाजिक विभाजन | जाति |
त्वरित पुनरावृत्ति — एक-पंक्ति उत्तर
- लिंग-भेद का आधार? सामाजिक अपेक्षाएँ और रूढ़ियाँ, जीव-विज्ञान नहीं।
- नारीवादी कौन है? जो महिलाओं और पुरुषों के लिए समान अधिकारों में विश्वास करता है।
- कौन-सा कानून समान मजदूरी अनिवार्य करता है? समान पारिश्रमिक अधिनियम, 1976।
- स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण? एक-तिहाई सीटें।
- लोक सभा/विधानसभाओं में महिला आरक्षण (2023)? 33 प्रतिशत (नारी शक्ति वंदन अधिनियम)।
- सांप्रदायिकता का आधार? धर्म को सामाजिक समुदाय का प्रमुख आधार मानना।
- क्या भारत का कोई आधिकारिक धर्म है? नहीं — भारत एक धर्मनिरपेक्ष राज्य है।
- कौन-सा सामाजिक विभाजन भारत की अपनी विशेषता है? जाति।
- क्या अकेली जाति चुनाव तय करती है? नहीं — कई अन्य कारक मायने रखते हैं।