इस खंड के बारे में

इस खंड में अध्याय 4 से बोर्ड परीक्षाओं के पिछले वर्षों के प्रश्न (सीबीएसई और राज्य बोर्ड) आदर्श उत्तरों सहित संकलित हैं, ताकि परीक्षा में अपेक्षित प्रारूप और गहराई का पता चल सके।

बोर्ड PYQ — अति लघु उत्तरीय (1 अंक)

Q1. ब्रिटेन में नए औद्योगिक युग का पहला प्रतीक कौन-सा उद्योग था? उत्तर. सूती उद्योग।

Q2. 1781 में भाप के इंजन में सुधार करके उसका पेटेंट किसने कराया? उत्तर. जेम्स वाट (James Watt)।

Q3. किस उपकरण ने बुनकरों के लिए चौड़े कपड़े बुनना संभव बनाया? उत्तर. फ्लाई शटल (fly shuttle)।

बोर्ड PYQ — लघु उत्तरीय (3 अंक)

Q4. 'ब्रिटेन में महिला मज़दूरों ने स्पिनिंग जेनी पर हमला किया।' समझाइए। उत्तर. स्पिनिंग जेनी (Spinning Jenny) से एक ही मज़दूर एक साथ कई धागे कात सकता था, जिससे हाथ से कातने वालों की माँग घट गई। जो महिलाएँ हाथ से कताई पर निर्भर थीं, उन्हें बेरोज़गारी का डर था, इसलिए उन्होंने नई मशीनों पर हमला किया; यह टकराव लंबे समय तक चला।

Q5. उन्नीसवीं सदी के ब्रिटेन में तकनीकी बदलाव की गति धीमी क्यों थी? उत्तर. नई तकनीक महँगी थी; मशीनें अक्सर खराब हो जाती थीं और उनकी मरम्मत महँगी पड़ती थी, और वे उतनी कारगर नहीं थीं जितना दावा किया जाता था। इसलिए उद्योगपति सतर्क रहते थे — उदाहरण के लिए, सदी के आरंभ में पूरे इंग्लैंड में केवल 321 भाप के इंजन थे।

बोर्ड PYQ — लघु उत्तरीय (3 अंक)

Q6. उन्नीसवीं सदी में भारतीय सूती बुनकरों के सामने आई किन्हीं तीन समस्याओं को समझाइए। उत्तर. (1) ब्रिटेन द्वारा शुल्क लगाए जाने से उनका निर्यात बाज़ार ढह गया; (2) उनका स्थानीय बाज़ार सस्ते मैनचेस्टर के कपड़े से भर गया जिससे वे मुकाबला नहीं कर सकते थे; और (3) अमेरिकी गृहयुद्ध के दौरान कच्ची कपास की कीमतें बढ़ गईं, जिससे उन्हें आपूर्ति नहीं मिली। बाद में भारतीय कारखानों ने भी बाज़ार को मशीन के माल से भर दिया।

Q7. प्रथम विश्व युद्ध भारतीय उद्योगों के लिए किस प्रकार वरदान साबित हुआ? उत्तर. ब्रिटिश मिलें युद्ध में व्यस्त होने से मैनचेस्टर से आयात घट गया, जिससे भारतीय मिलों को घरेलू बाज़ार मिल गया। भारतीय कारखानों ने युद्ध की ज़रूरतें (वर्दियाँ, तंबू, जूट के बोरे, जूते) पूरी कीं, कई पालियों में चले, अधिक मज़दूर रखे, और औद्योगिक उत्पादन में ज़बरदस्त उछाल आया।

बोर्ड PYQ — दीर्घ उत्तरीय (5 अंक)

Q8. विक्टोरियाई ब्रिटेन में मज़दूरों के जीवन और काम की परिस्थितियों का वर्णन कीजिए। उत्तर. श्रम की भरमार होने से नौकरियाँ दुर्लभ थीं और रिश्तेदारी तथा मित्रता के तंत्र पर निर्भर थीं; बेरोज़गार लोग पुलों के नीचे या रैन बसेरों और कैज़ुअल वार्डों (Night Refuges and Casual Wards) में सोते थे। काम मौसमी था, इसलिए बेरोज़गारी के लंबे दौर आते थे; नेपोलियन युद्ध (Napoleonic War) के दौरान मज़दूरी का वास्तविक मूल्य गिर गया; और 1830 के दशक जैसी मंदी में बेरोज़गारी 35–75 प्रतिशत तक पहुँच गई। बेरोज़गारी के डर से मज़दूर अक्सर स्पिनिंग जेनी जैसी मशीनों के विरोधी रहते थे।

Q9. औपनिवेशिक भारत में औद्योगिक विकास की विशेषताओं को समझाइए। उत्तर. यूरोपीय मैनेजिंग एजेंसियाँ (Managing Agencies) निर्यात उत्पादों (चाय, कॉफ़ी, खनन, नील, जूट) पर ध्यान देती थीं। भारतीय मिलें आरंभ में मैनचेस्टर से मुकाबला न करने के लिए मोटा सूत बनाती थीं, जिसे चीन को निर्यात करती थीं और हथकरघों को आपूर्ति करती थीं। स्वदेशी और सबसे बढ़कर प्रथम विश्व युद्ध ने भारतीय कपड़ा उत्पादन को बढ़ावा दिया, जबकि छोटे पैमाने और हथकरघा उत्पादन का बोलबाला बना रहा और यहाँ तक कि बढ़ा भी — जो दर्शाता है कि भारत में औद्योगीकरण असमान था और औपनिवेशिक शासन से आकार पाता था।