उद्योगपतियों ने हस्त श्रम को प्राथमिकता क्यों दी

विक्टोरियाई ब्रिटेन (Victorian Britain) में मानव श्रम की कोई कमी नहीं थी। गरीब किसान और घुमंतू लोग काम की तलाश में बड़ी संख्या में शहरों की ओर आए। जब श्रम प्रचुर मात्रा में हो, तो मज़दूरी कम रहती है, इसलिए उद्योगपतियों के सामने श्रम की कमी या ऊँची मज़दूरी लागत की कोई समस्या नहीं थी — और वे ऐसी मशीनें लगाना नहीं चाहते थे जो मानव श्रम को हटा देतीं और जिनमें बड़ी पूँजी निवेश की ज़रूरत होती।

कई उद्योगों में श्रम की माँग मौसमी थी। गैस कारखाने और शराब की भट्ठियाँ ठंडे महीनों में व्यस्त रहतीं; जिल्दसाज़ों और मुद्रकों को क्रिसमस से पहले अतिरिक्त हाथों की ज़रूरत होती; बंदरगाह पर जहाज़ों की मरम्मत सर्दियों में होती। ऐसे उद्योगों में, उद्योगपति हस्त श्रम को प्राथमिकता देते, और श्रमिकों को केवल मौसम भर के लिए काम पर रखते।

हस्तनिर्मित वस्तुएँ और कौशल

अनेक उत्पाद ऐसे थे जो केवल हस्त श्रम से ही बनाए जा सकते थे। मशीनें बड़े बाज़ार के लिए एकसमान, मानकीकृत वस्तुएँ बनातीं, लेकिन बाज़ार अक्सर जटिल डिज़ाइनों और विशिष्ट आकारों वाली वस्तुओं की माँग करता। उदाहरण के लिए, उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य के ब्रिटेन में हथौड़ों की 500 किस्में और कुल्हाड़ियों की 45 किस्में बनाई जाती थीं — इनके लिए मानव कौशल की आवश्यकता थी, न कि यांत्रिक तकनीक की

विक्टोरियाई ब्रिटेन में, उच्च वर्ग — कुलीन और पूँजीपति (bourgeoisie) — हस्तनिर्मित वस्तुओं को प्राथमिकता देते थे, जो परिष्कार और वर्ग (refinement and class) का प्रतीक बन गईं; वे बेहतर परिष्कृत और सावधानीपूर्वक डिज़ाइन की गई होती थीं। मशीन-निर्मित वस्तुएँ उपनिवेशों को निर्यात के लिए थीं। (जिन देशों में श्रम की कमी थी, जैसे उन्नीसवीं शताब्दी का अमेरिका, वहाँ उद्योगपति इसके बजाय मशीनों का उपयोग करने के इच्छुक थे।)

श्रमिकों का कठिन जीवन

श्रम की प्रचुरता ने श्रमिकों के जीवन को प्रभावित किया। नौकरी पाना अक्सर मित्रता और रिश्तेदारी के जाल पर निर्भर करता था — जिनके पास ऐसे संपर्क नहीं थे, वे हफ़्तों इंतज़ार करते, पुलों के नीचे या गरीब कानून (Poor Law) अधिकारियों द्वारा चलाए जाने वाले रैन बसेरों (Night Refuges) और कैज़ुअल वार्डों (Casual Wards) में सोते। काम की मौसमी प्रकृति का अर्थ था बेरोज़गारी के लंबे दौर।

हालाँकि उन्नीसवीं शताब्दी के आरंभ में मज़दूरी कुछ बढ़ी, पर यह कल्याण के बारे में बहुत कम बताती है: नेपोलियन युद्ध (Napoleonic War) के दौरान बढ़ती कीमतों का अर्थ था कि मज़दूरी का वास्तविक मूल्य गिर गया। अच्छे समय में भी लगभग 10 प्रतिशत शहरी आबादी अत्यंत गरीब थी, और 1830 के दशक जैसी मंदी में बेरोज़गारी बढ़कर 35–75 प्रतिशत हो जाती। बेरोज़गारी के भय ने श्रमिकों को नई मशीनों के प्रति शत्रुतापूर्ण बना दिया: जब स्पिनिंग जेनी (Spinning Jenny) (जिसे जेम्स हरग्रीव्ज़ ने 1764 में बनाया) आई, तो हाथ से कताई पर जीवन बिताने वाली महिलाओं ने मशीनों पर हमला किया

प्रश्न और उत्तर

Q1. विक्टोरियाई ब्रिटेन के उद्योगपति अक्सर मशीनों की तुलना में हस्त श्रम को प्राथमिकता क्यों देते थे? उत्तर. क्योंकि श्रम की कोई कमी नहीं थी और मज़दूरी कम थी, इसलिए बड़ी पूँजी की माँग करने वाली महँगी मशीनें खरीदने की कोई ज़रूरत नहीं थी। साथ ही, अधिकांश माँग मौसमी और विशिष्ट, हस्तनिर्मित वस्तुओं के लिए थी, इसलिए हस्त श्रम इन ज़रूरतों के अनुकूल था।

Q2. ब्रिटेन के उच्च वर्ग हस्तनिर्मित वस्तुओं को प्राथमिकता क्यों देते थे? उत्तर. हस्तनिर्मित वस्तुएँ परिष्कार और वर्ग का प्रतीक थीं — वे बेहतर परिष्कृत, अलग-अलग बनाई गई और सावधानीपूर्वक डिज़ाइन की गई होती थीं। मशीन-निर्मित वस्तुएँ, मानकीकृत होने के कारण, मुख्यतः उपनिवेशों को निर्यात की जाती थीं।

प्रश्न और उत्तर (जारी)

Q3. ब्रिटेन की महिला श्रमिकों ने स्पिनिंग जेनी पर हमला क्यों किया? उत्तर. स्पिनिंग जेनी (Spinning Jenny) (जिसे जेम्स हरग्रीव्ज़ ने 1764 में आविष्कृत किया) से एक श्रमिक एक साथ कई धागे कात सकता था, जिससे श्रम की माँग घट गई। जो महिलाएँ हाथ से कताई पर जीवन बिताती थीं, उन्हें बेरोज़गारी का डर था, इसलिए उन्होंने नई मशीनों पर हमला किया

Q4. औद्योगिक ब्रिटेन में श्रमिकों के कठिन जीवन का वर्णन कीजिए। उत्तर. श्रम की प्रचुरता के कारण नौकरी पाना कठिन था और यह व्यक्तिगत संपर्कों पर निर्भर करता था; बेरोज़गार लोग रैन बसेरों और कैज़ुअल वार्डों में सोते थे। काम मौसमी था, मज़दूरी का वास्तविक मूल्य गिर सकता था (जैसे नेपोलियन युद्ध के दौरान), और मंदी में बेरोज़गारी 35–75 प्रतिशत तक पहुँच जाती थी।