आयनिक यौगिकों के भौतिक गुण — परिचय

आयनिक यौगिक — दैनिक जीवन के परिचित यौगिक: नमक, चूना, बेकिंग सोडा। इनके सब गुण — एक मूल कारण से: आयनों की क्रिस्टल जाली

मूल विचार

आयनिक यौगिकों में:

  • अलग-अलग 'अणु' नहीं होते।
  • आयन त्रि-आयामी जाली में बंधे रहते हैं।
  • एक Na⁺ — 6 Cl⁻ से घिरा।
  • एक Cl⁻ — 6 Na⁺ से घिरा।
  • (NaCl में — फेस-सेंटर्ड क्यूबिक संरचना।)

यह संरचना ही — सब गुणों की जड़।

मुख्य भौतिक गुण

1. भौतिक अवस्था:

  • आयनिक यौगिक प्रायः ठोस होते हैं।
  • कठोर परंतु भंगुर।
  • क्रिस्टलीय।

2. गलनांक और क्वथनांक:

  • उच्च गलनांक और क्वथनांक।
  • क्योंकि आयनों के बीच प्रबल आकर्षण।

उदाहरण:

  • NaCl: गलनांक 801°C
  • MgO: गलनांक 2852°C
  • Al₂O₃: गलनांक ~2050°C
  • CaO: गलनांक 2572°C

3. भंगुरता:

  • आयनिक क्रिस्टल भंगुर होते हैं।
  • थोड़ा बल लगाने पर — टूट जाते हैं।
  • क्यों? दबाव से आयन शिफ्ट होकर समान आवेश सामने आ जाते हैं — विकर्षण से क्रिस्टल टूटता।

4. कठोरता:

  • आम तौर पर कठोर
  • आयनों के बीच मजबूत बल।

आयनों की प्रबल आकर्षण से जुड़े गुण

कूलॉम का नियम: F=kq1q2r2F = \frac{kq_1q_2}{r^2}

यानी:

  • अधिक आवेश → अधिक आकर्षण → उच्च गलनांक।

तुलना:

यौगिक आवेश गलनांक
NaCl +1, -1 801°C
MgO +2, -2 2852°C
Al₂O₃ +3, -2 2050°C

MgO और CaO का गलनांक NaCl से बहुत अधिक — क्योंकि आवेश अधिक।

सोडियम क्लोराइड का एकांतर आयनों वाला क्रिस्टल जालक

आरेख के अंग्रेज़ी लेबलों के हिन्दी अर्थ:

English (in image) हिन्दी
Sodium ion (Na+) सोडियम आयन (Na+)
Chloride ion (Cl-) क्लोराइड आयन (Cl-)
Crystal lattice क्रिस्टल जालक
High melting and boiling point उच्च गलनांक और क्वथनांक
Conducts electricity when molten or dissolved in water पिघलने या घुलने पर विद्युत चालन

विलेयता

जल में विलेयता

अधिकांश आयनिक यौगिक — जल में विलेय होते हैं।

उदाहरण:

  • NaCl, KCl, KNO₃ — पूर्ण विलेय।
  • CuSO4CuSO_4, ZnSO4ZnSO_4, FeSO4FeSO_4 — विलेय।
  • MgCl2MgCl_2, CaCl2CaCl_2 — विलेय।

विलेय न होने वाले:

  • AgCl, BaSO₄, PbI₂, CaCO₃ — अल्प-विलेय या अविलेय।

क्यों जल में विलेय?

जल का स्वभाव: जल एक ध्रुवीय (polar) अणु है।

  • HH का सिरा — आंशिक धन।
  • OO का सिरा — आंशिक ऋण।

विलयन का तंत्र:

  1. जल के δ\delta^- (OO) — Na+Na^+ को घेर लेते हैं।
  2. जल के δ+\delta^+ (HH) — ClCl^- को घेर लेते हैं।
  3. आयन क्रिस्टल जाली से बाहर निकलते हैं।
  4. जलीय विलयन बनता है।

यह प्रक्रिया = विलेयन (Hydration)

कार्बनिक विलायकों में विलेयता

केरोसिन, पेट्रोल, बेंज़ीन — अध्रुवीय (non-polar)

आयनिक यौगिक इन में अविलेय

नियम: 'जैसा घुलनशील वैसे में' (Like dissolves like)।

  • ध्रुवीय यौगिक — ध्रुवीय विलायक में।
  • अध्रुवीय यौगिक — अध्रुवीय विलायक में।

एक रोचक तथ्य

तेल और पानी क्यों नहीं मिलते?

  • तेल: अध्रुवीय (कार्बनिक)।
  • पानी: ध्रुवीय।
  • नियम: ध्रुवीय और अध्रुवीय नहीं मिलते।

विलेयता तालिका — कुछ प्रसिद्ध आयनिक यौगिक

यौगिक जल में केरोसिन में
NaCl ✓ अति-विलेय
KNO₃
CuSO₄ ✓ (नीला)
AgCl ✗ अविलेय
CaCO₃
MgO ✗ अल्प

विद्युत-चालकता

मुख्य प्रश्न: आयनिक यौगिक विद्युत-चालक कब?

आयनिक यौगिक — तीन अवस्थाओं में:

1. ठोस अवस्था में: विद्युत-चालक नहीं। क्यों? आयन क्रिस्टल जाली में स्थिर — गति नहीं कर सकते।

2. पिघली अवस्था (Molten) में: विद्युत-चालक। क्यों? गलने पर जाली टूटती है — आयन गति-शील हो जाते हैं।

3. जलीय विलयन में: विद्युत-चालक। क्यों? जल में आयन — स्वतंत्र रूप से चलते हैं।

विद्युत-चालन का तंत्र

धनात्मक आयन (cations) → धनात्मक सिरे (cathode) पर जाते हैं। ऋणात्मक आयन (anions) → ऋणात्मक सिरे (anode) पर जाते हैं।

आयनों की यह गति = विद्युत धारा।

व्यावहारिक प्रदर्शन

सरल प्रयोग:

  • एक बैटरी, बल्ब, और दो इलेक्ट्रोड।
  • तीन माध्यम: सूखा NaCl ठोस, पिघला NaCl, NaCl विलयन।
  • कौन-कौन में बल्ब जलेगा?

उत्तर:

  • सूखा NaCl: नहीं।
  • पिघला NaCl: हाँ! (तेज़)
  • NaCl विलयन: हाँ।

विद्युत-अपघटन (Electrolysis)

यह सिद्धांत — कई औद्योगिक प्रक्रियाओं का आधार:

  1. धातुओं का निष्कर्षण (Na, K, Al — विद्युत-अपघटन से) (अनुभाग 7)
  2. विद्युत-लेपन (Electroplating) (अनुभाग 8)
  3. पानी का अपघटन (अध्याय 1 का संदर्भ)
  4. NaOH और Cl₂ का निर्माण (अध्याय 2 — क्लोर-एल्कली)

विरोधाभास — सहसंयोजी यौगिक

सहसंयोजी यौगिक — सामान्यतः विद्युत-चालक नहीं। (आयन नहीं बनते।)

अपवाद: HCl, H₂SO₄ जैसे अम्ल — जल में आयनित होते हैं।

रासायनिक प्रकृति और अन्य गुण

धात्विक ऑक्साइडों का स्वभाव

धातुओं के ऑक्साइड — मुख्यतः क्षारकीय (basic) (अनुभाग 2 का संदर्भ।)

उदाहरण:

  • Na2O+H2O2NaOHNa_2O + H_2O \rightarrow 2NaOH (क्षार)
  • CaO+H2OCa(OH)2CaO + H_2O \rightarrow Ca(OH)_2 (क्षार)

अपवाद — उभयधर्मी:

  • Al2O3Al_2O_3, ZnOZnO — अम्ल और क्षारक दोनों से क्रिया।

धात्विक हाइड्रॉक्साइड

अधिकांश — क्षारकीय (alkali)

उदाहरण:

  • NaOHNaOH (कॉस्टिक सोडा)
  • KOHKOH (कॉस्टिक पोटाश)
  • Ca(OH)2Ca(OH)_2 (बुझा चूना)
  • Mg(OH)2Mg(OH)_2 (मिल्क ऑफ मैग्नीशिया)

अधात्विक हाइड्राइड

अधातु + H — सहसंयोजी। उदाहरण: H₂O, NH₃, HCl, HF

HCl और HF — जल में आयनिक हो जाते हैं → अम्लीय।

एक तुलना — आयनिक vs सहसंयोजी

गुण आयनिक सहसंयोजी
बंध इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण इलेक्ट्रॉन साझा
गलनांक उच्च कम
क्वथनांक उच्च कम
अवस्था ठोस ठोस/द्रव/गैस
जल में विलेयता विलेय प्रायः अविलेय
अध्रुवीय विलायक में अविलेय विलेय
ठोस में चालकता नहीं नहीं
पिघले/विलयन में हाँ प्रायः नहीं
उदाहरण NaCl, MgO H₂O, CO₂

कुछ रोचक तथ्य

1. हीरा (Diamond):

  • सहसंयोजी क्रिस्टल — पर बहुत कठोर!
  • अपवाद — सब सहसंयोजी कम कठोर नहीं होते।

2. ग्रेफाइट:

  • सहसंयोजी, परंतु — विद्युत चालक!
  • क्योंकि असाझा (delocalised) इलेक्ट्रॉन।

3. नमक का स्वाद:

  • NaCl — नमकीन।
  • KCl — कड़वा-नमकीन।
  • मानव जीभ Na⁺ को विशेष पहचानती है।

आयनिक यौगिकों का व्यावहारिक उपयोग

1. NaCl (साधारण नमक)

उपयोग:

  • खाने में — स्वाद, पाचन।
  • अचार, भोजन परिरक्षण।
  • सोडियम से NaOH, Cl₂, Na — के लिए कच्चा माल।
  • गर्म देशों में निर्जलीकरण रोकने के लिए।

2. CaO (अनबुझा चूना)

उपयोग:

  • सीमेंट निर्माण।
  • चीनी शोधन।
  • कागज़ निर्माण।
  • काग़ज़ बनाने में।
  • अम्लीय मिट्टी का pH बढ़ाने।

3. Ca(OH)₂ (बुझा चूना)

उपयोग:

  • दीवारों की सफेदी।
  • पनीर बनाने में।
  • जल का pH समायोजन।
  • ब्लीचिंग पाउडर निर्माण।

4. CaCO₃ (कैल्शियम कार्बोनेट)

अल्प-विलेय आयनिक यौगिक।

उपयोग:

  • सीमेंट का मुख्य घटक।
  • मार्बल, चूना-पत्थर।
  • खाद्य योजक (E170)।
  • कक्षा-डस्टर के 'चॉक' में।
  • पेस्ट के अवयव।

5. Na₂CO₃ (वाशिंग सोडा)

उपयोग:

  • कपड़ों की धुलाई।
  • काँच निर्माण।
  • कागज़ उद्योग।

6. NaHCO₃ (बेकिंग सोडा)

उपयोग:

  • रसोई में पकाने।
  • अग्नि-शामक।
  • एंटासिड (पेट की अम्लता)।

7. CuSO₄ (नीला थोथा)

उपयोग:

  • कीटनाशक।
  • फफूँद-नाशक।
  • विद्युत-लेपन।
  • रंग-वर्णक।

सारांश तालिका — गुण और उदाहरण

गुण आयनिक कारण
भौतिक अवस्था ठोस प्रबल आकर्षण
गलनांक उच्च प्रबल आयनिक बंध
भंगुरता भंगुर आवेश-विकर्षण
जल में विलेय जल ध्रुवीय
अध्रुवीय में अविलेय विपरीत प्रकृति
ठोस चालकता नहीं आयन स्थिर
जलीय/पिघला हाँ आयन गतिशील

[बोर्ड महत्वपूर्ण] सब गुणों का कारण = क्रिस्टल जाली + आयनों के प्रबल बल।

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बोर्ड परीक्षा से ठीक पहले एक नज़र में।

1. आयनिक यौगिकों के 5 मुख्य भौतिक गुण

  1. ठोस अवस्था — कठोर, भंगुर, क्रिस्टलीय।
  2. उच्च गलनांक/क्वथनांक — प्रबल आकर्षण।
  3. जल में विलेय — जल ध्रुवीय है।
  4. अध्रुवीय विलायकों में अविलेय — केरोसिन, बेंज़ीन।
  5. विद्युत-चालकता: ठोस में नहीं, पिघले/विलयन में हाँ।

2. गलनांक के उदाहरण

यौगिक गलनांक
NaCl 801°C
MgO 2852°C
CaO 2572°C
Al₂O₃ ~2050°C

3. विद्युत-चालकता का नियम

ठोस — नहीं (आयन स्थिर) पिघला — हाँ (आयन मुक्त) जलीय — हाँ (आयन मुक्त)

4. विलेयन तंत्र

  • जल ध्रुवीय → आयनों को घेर लेता है → आयन जाली से निकलते हैं।
  • 'जैसा विलायक वैसा विलेय।'

5. भंगुरता का कारण

  • थोड़ा बल → आयन शिफ्ट → समान आवेश सामने → विकर्षण → क्रिस्टल टूट।

6. आयनिक vs सहसंयोजी (तुरंत याद)

गुण आयनिक सहसंयोजी
गलनांक उच्च कम
जल विलेय अविलेय
ठोस चालकता नहीं नहीं
जल चालकता हाँ नहीं

7. बोर्ड के 'सुनहरे' प्रश्न

  1. आयनिक यौगिकों के पाँच गुण।
  2. क्यों ठोस NaCl विद्युत-चालक नहीं?
  3. क्यों MgO का गलनांक NaCl से अधिक?
  4. आयनिक यौगिक भंगुर क्यों होते हैं?
  5. जल में आयनिक यौगिक क्यों विलेय?

अंतिम सूत्र: सब गुण = क्रिस्टल जाली + आयन-आयन प्रबल आकर्षण।

हल किए गए उदाहरण

उदाहरण 1: NCERT — आयनिक यौगिकों के गुण

आयनिक यौगिकों के पाँच मुख्य भौतिक गुण लिखिए।

हल:

आयनिक यौगिकों के 5 भौतिक गुण:

1. भौतिक अवस्था और बनावट

  • आयनिक यौगिक प्रायः ठोस होते हैं।
  • कठोर परंतु भंगुर।
  • क्रिस्टलीय। उदाहरण: NaCl, KCl — टेबल साल्ट।

2. गलनांक और क्वथनांक

  • उच्च गलनांक और क्वथनांक।
  • क्योंकि आयनों के बीच प्रबल विद्युत-स्थैतिक आकर्षण। उदाहरण: NaCl - 801°C; MgO - 2852°C।

3. विलेयता

  • जल में विलेय (अधिकांश)।
  • अध्रुवीय विलायकों में अविलेय (केरोसिन, पेट्रोल)। कारण: जल ध्रुवीय है।

4. विद्युत-चालकता

  • ठोस अवस्था में: नहीं (आयन स्थिर)।
  • पिघले/जलीय: हाँ (आयन गतिशील)।

5. प्रकृति

  • मुख्यतः धातु + अधातु
  • क्रिस्टल जाली में आयन।

[NCERT पाठ्यपुस्तक — हर साल पूछा जाता]

उदाहरण 2: NCERT — गलनांक की तुलना

NaCl और MgO में किसका गलनांक अधिक है? क्यों?

हल:

तुलना:

यौगिक आयन आवेश
NaCl Na⁺, Cl⁻ +1, -1
MgO Mg²⁺, O²⁻ +2, -2

गलनांक:

  • NaCl: 801°C
  • MgO: 2852°C (NaCl से 3.5 गुना अधिक!)

कारण — कूलॉम का नियम

F=kq1q2r2F = \frac{kq_1q_2}{r^2}

आकर्षण बल:

NaCl में: F(+1)(1)=1F \propto (+1)(-1) = 1 (इकाई)

MgO में: F(+2)(2)=4F \propto (+2)(-2) = 4 (इकाई)

MgO में आकर्षण 4 गुना अधिक

अधिक आकर्षण → अधिक ऊर्जा गलने के लिए → उच्च गलनांक।

अतिरिक्त कारण — आयन का आकार

  • Mg²⁺ और O²⁻ — दोनों छोटे आयन (छोटा त्रिज्या)।
  • rr (दूरी) कम → FF अधिक (कूलॉम का नियम)।
  • Na⁺ और Cl⁻ — अपेक्षाकृत बड़े → FF कम।

अंतिम उत्तर

MgO का गलनांक अधिक है क्योंकि:

  1. आयनों का आवेश अधिक (±2 vs ±1)।
  2. आयनों के बीच आकर्षण 4 गुना।
  3. आयन छोटे — दूरी कम।

यही सिद्धांत Al₂O₃ (Al³⁺O²⁻) — अति-उच्च गलनांक की व्याख्या करता है।

[बोर्ड में 3-अंक]

उदाहरण 3: NCERT — विद्युत-चालकता

एक प्रयोग में, सूखे NaCl, पिघले NaCl, और NaCl के जलीय विलयन से विद्युत प्रवाहित की गई। तीनों में से किस-किस में बल्ब जला?

हल:

व्यवस्था: बैटरी + बल्ब + दो इलेक्ट्रोड + परीक्षण माध्यम।

(a) सूखा NaCl ठोस

परिणाम: बल्ब नहीं जला।

कारण:

  • ठोस NaCl में, Na⁺ और Cl⁻ आयन क्रिस्टल जाली में स्थिर हैं।
  • वे गति नहीं कर सकते
  • विद्युत प्रवाह = आयनों की गति। यहाँ कोई गति नहीं → कोई धारा नहीं।

(b) पिघला NaCl

परिणाम: बल्ब जला! (बहुत तेज़ी)

कारण:

  • गलनांक (801°C) से ऊपर NaCl पिघलता है।
  • क्रिस्टल जाली टूटती है।
  • आयन मुक्त होकर विलयन में चलने लगते हैं।
  • Na⁺ → ऋण इलेक्ट्रोड (cathode) पर।
  • Cl⁻ → धन इलेक्ट्रोड (anode) पर।
  • यह आयन गति = धारा।

(c) NaCl का जलीय विलयन

परिणाम: बल्ब जला। (मध्यम)

कारण:

  • जल में NaCl → Na⁺ + Cl⁻ (आयनित)।
  • जलीय आयन स्वतंत्र रूप से चलते हैं।
  • विद्युत प्रवाहित।
  • (पिघले से थोड़ा कम — क्योंकि आयन जल अणुओं से घिरे, थोड़ी अवरोध।)

सारांश

माध्यम विद्युत-चालक? कारण
सूखा NaCl नहीं आयन स्थिर
पिघला NaCl हाँ (तेज़) आयन मुक्त
NaCl विलयन हाँ जलीय आयन

सीख

आयनिक यौगिकों की चालकता — आयनों की गति पर निर्भर। यही औद्योगिक 'विद्युत-अपघटन' का आधार।

[NCERT पाठ्यपुस्तक — महत्वपूर्ण प्रयोग]

उदाहरण 4: NCERT — विलेयता

क्यों NaCl जल में विलेय है, परंतु केरोसिन में अविलेय?

हल:

सिद्धांत — 'जैसा विलायक वैसा विलेय'

ध्रुवीय विलेय — ध्रुवीय विलायक में। अध्रुवीय विलेय — अध्रुवीय विलायक में।

NaCl: आयनिक → 'अति-ध्रुवीय'

Na⁺ और Cl⁻ — पूर्ण आवेश वाले आयन।

जल: ध्रुवीय अणु

  • HH का सिरा: आंशिक धन (δ+\delta^+)।
  • OO का सिरा: आंशिक ऋण (δ\delta^-)।

यानी जल — एक 'द्विध्रुव' (dipole)।

विलेयन का तंत्र

चरण 1: NaCl को जल में डालें।

चरण 2: जल अणु आयनों को घेरते हैं।

  • H2OH_2O का OO (δ\delta^-) → Na+Na^+ की ओर।
  • H2OH_2O का HH (δ+\delta^+) → ClCl^- की ओर।

चरण 3: जल का आकर्षण — आयन-आयन आकर्षण से अधिक मजबूत।

  • आयन क्रिस्टल जाली से बाहर निकलते हैं।

चरण 4: जलीय आयन = Na+(aq)Na^+(aq) और Cl(aq)Cl^-(aq)

  • यह 'जलीयन (Hydration)'।

केरोसिन: अध्रुवीय (Non-polar)

केरोसिन — हाइड्रोकार्बन (C-H बंध)। अध्रुवीय — कोई आंशिक आवेश नहीं।

केरोसिन से क्रिया:

  • कोई आकर्षण नहीं Na⁺ या Cl⁻ की ओर।
  • आयन क्रिस्टल जाली में रहते हैं।
  • NaCl अविलेय

एक रोचक प्रदर्शन

तेल और पानी के साथ NaCl:

  • NaCl पानी में घुल जाता है।
  • तेल में नहीं।
  • अंत में: नीचे — पानी + NaCl; ऊपर — तेल।

सारांश

NaCl + जल → विलयन (विलेय) — जल ध्रुवीय। NaCl + केरोसिन → अविलेय — केरोसिन अध्रुवीय।

'जैसा घुलनशील वैसे में' — रसायन का बुनियादी नियम।

[NCERT — 3-अंक]

उदाहरण 5: NCERT — भंगुरता

आयनिक यौगिक भंगुर क्यों होते हैं?

हल:

क्रिस्टल जाली

NaCl में: हर Na⁺ — 6 Cl⁻ से घिरा। हर Cl⁻ — 6 Na⁺ से। यह संरचना — 3D क्यूबिक जाली

सामान्य अवस्था

आयन इस तरह से व्यवस्थित कि:

  • विपरीत आवेश पास।
  • समान आवेश दूर। = विद्युत-स्थैतिक स्थायित्व

जब बल लगता है

1. हम क्रिस्टल पर थोड़ा बल लगाते हैं (हथौड़ी, दबाव)।

2. एक परत के आयन — दूसरी परत से शिफ्ट हो जाते हैं।

3. अब समान आवेश एक-दूसरे के सामने आ जाते हैं!

  • Na⁺ के सामने Na⁺ — विकर्षण।
  • Cl⁻ के सामने Cl⁻ — विकर्षण।

4. प्रबल विकर्षण → क्रिस्टल टूट जाता है।

तुलना — धातु से

धातु में: इलेक्ट्रॉन समुद्र (electron sea)।

  • परतें शिफ्ट हो सकती हैं — फिर भी इलेक्ट्रॉन भर देते हैं।
  • धातु — मृदु (मालेबल) और तन्य (डक्टाइल)।

आयनिक यौगिक में: निश्चित आयन।

  • शिफ्ट = तुरंत टूट।
  • आयनिक — भंगुर।

व्यावहारिक प्रदर्शन

नमक के बड़े क्रिस्टल पर हथौड़ी:

  • तुरंत — कई छोटे टुकड़ों में टूट।
  • टुकड़े भी — क्यूबिक होते हैं! (क्योंकि क्रिस्टल जाली के साथ टूटे)।

अन्य प्रसिद्ध भंगुर पदार्थ

  • काँच (सहसंयोजी, फिर भी भंगुर — क्रिस्टल जैसी संरचना)।
  • सिरामिक (Al₂O₃ आधारित — आयनिक, भंगुर)।
  • नमक के क्रिस्टल।
  • शक्कर (हालाँकि सहसंयोजी, क्रिस्टल जैसी)।

सारांश

आयनिक यौगिक भंगुर हैं क्योंकि:

  1. क्रिस्टल जाली में स्थिर।
  2. बल → परतों का विस्थापन।
  3. समान आवेश सामने → विकर्षण।
  4. क्रिस्टल टूट जाता।

[बोर्ड में 3-अंक]

उदाहरण 6: NCERT — दो प्रदर्शन

(a) सूखी NaCl छड़ — बल्ब और बैटरी से जोड़ें। क्या होगा? (b) NaCl के विलयन में दो ग्रेफाइट छड़ डालें। बल्ब जलाएँ — क्या होगा?

हल:

(a) सूखी NaCl छड़

परिणाम: बल्ब नहीं जला।

कारण:

  • ठोस NaCl में आयन क्रिस्टल जाली में स्थिर।
  • कोई गतिशील आवेश-वाहक नहीं।
  • विद्युत-चालकता = 0।

निष्कर्ष: ठोस आयनिक यौगिक — विसंवाहक।

(b) NaCl विलयन

व्यवस्था:

  • बीकर में NaCl + जल का विलयन।
  • दो ग्रेफाइट छड़ — इलेक्ट्रोड के रूप में।
  • बैटरी से जुड़ी।
  • सर्किट में बल्ब।

परिणाम: बल्ब जला! (मध्यम तेज़ी से)

तंत्र:

1. NaCl जल में आयनित: NaClNa++ClNaCl \rightarrow Na^+ + Cl^-

2. आयनों की गति:

  • Na⁺ → cathode (-) पर
  • Cl⁻ → anode (+) पर

3. इलेक्ट्रोड पर अभिक्रिया:

  • Cathode: Na++eNaNa^+ + e^- \rightarrow Na (या वास्तव में, यदि जलीय हो — H+H^+ कम क्रियाशील Na के बजाय)
  • वास्तव में: 2H2O+2eH2+2OH2H_2O + 2e^- \rightarrow H_2 + 2OH^-
  • Anode: 2ClCl2+2e2Cl^- \rightarrow Cl_2 + 2e^-

4. प्रेक्षण:

  • Cathode पर बुलबुले (H₂)।
  • Anode पर बुलबुले और हल्की पीली गैस (Cl₂)।
  • बल्ब जलता है।

महत्वपूर्ण बिंदु

यह 'क्लोर-एल्कली प्रक्रिया' की मूल विधि! (अध्याय 2 का संदर्भ)

उद्योग में: 2NaCl+2H2Oविद्युत2NaOH+H2+Cl22NaCl + 2H_2O \xrightarrow{\text{विद्युत}} 2NaOH + H_2 + Cl_2

सारांश

प्रयोग विद्युत-चालक?
सूखी NaCl छड़ नहीं
NaCl विलयन हाँ

[NCERT पाठ्यपुस्तक प्रयोग]

उदाहरण 7: NCERT — आयनिक vs सहसंयोजी पहचान

निम्न में किस-किस के गुण आयनिक हैं? NaCl, सुगर (C₁₂H₂₂O₁₁), MgO, ग्लूकोज, KBr, CO2CO_2

हल:

विश्लेषण

1. NaCl:

  • तत्व: Na (धातु) + Cl (अधातु)
  • आयनिक

2. सुगर (C₁₂H₂₂O₁₁):

  • तत्व: C, H, O — सब अधातु।
  • सहसंयोजी

3. MgO:

  • तत्व: Mg (धातु) + O (अधातु)।
  • आयनिक

4. ग्लूकोज (C₆H₁₂O₆):

  • तत्व: C, H, O।
  • सहसंयोजी

5. KBr:

  • तत्व: K (धातु) + Br (अधातु)।
  • आयनिक

6. CO₂:

  • तत्व: C + O (दोनों अधातु)।
  • सहसंयोजी

गुणों की पुष्टि

तीनों आयनिक की पुष्टि:

गुण NaCl MgO KBr
गलनांक उच्च? 801°C ✓ 2852°C ✓ 734°C ✓
जल में विलेय? ✗ अल्प
जल में चालक? थोड़ा

तीनों सहसंयोजी की पुष्टि:

गुण सुगर ग्लूकोज CO₂
गलनांक 186°C (कम) 146°C -78°C
जल में चालक?

अंतिम सूची

आयनिक: NaCl, MgO, KBr सहसंयोजी: सुगर, ग्लूकोज, CO₂

एक चेतावनी

सब आयनिक यौगिकों के सब गुण समान नहीं। उदाहरण: AgCl — आयनिक, परंतु जल में अविलेय। MgO — आयनिक, परंतु जल में अल्प-विलेय। यह अपवाद विशेष कारणों से।

[बोर्ड में 5-अंक]

उदाहरण 8: एक रोचक — गलनांक की रैंकिंग

निम्न आयनिक यौगिकों को बढ़ते गलनांक के क्रम में रखें — कारण भी: NaCl, MgO, NaF, MgCl₂

हल:

प्रत्येक का विश्लेषण

1. NaCl:

  • आवेश: +1, -1
  • आकर्षण 1\propto 1

2. MgO:

  • आवेश: +2, -2
  • आकर्षण 4\propto 4 (बहुत अधिक!)

3. NaF:

  • आवेश: +1, -1
  • आकर्षण 1\propto 1
  • पर F⁻ छोटा, Cl⁻ से छोटा → आयन के बीच दूरी कम → आकर्षण थोड़ा अधिक।

4. MgCl₂:

  • आवेश: +2, -1 (शुद्ध आयनिक से कम 'शुद्ध')
  • आकर्षण 2\propto 2

गलनांक मान

यौगिक गलनांक
MgO 2852°C
NaF 993°C
NaCl 801°C
MgCl₂ 714°C

बढ़ता क्रम

MgCl2<NaCl<NaF<MgO\boxed{MgCl_2 < NaCl < NaF < MgO}

तर्क

MgO सबसे ऊपर:

  • आवेश ±2, छोटे आयन — सबसे अधिक आकर्षण।

NaF, NaCl से अधिक:

  • दोनों ±1, परंतु F⁻ छोटा।
  • आकर्षण थोड़ा अधिक।

MgCl₂ सबसे कम:

  • विशेष: Mg²⁺ बहुत प्रबल — इलेक्ट्रॉन को थोड़ा 'खींच' लेता है।
  • फलस्वरूप — आंशिक सहसंयोजी प्रकृति।
  • (फजान का नियम — Fajans' Rules।)
  • गलनांक थोड़ा कम।

सीख

गलनांक तय करते हैं:

  1. आयनों के आवेश (अधिक → उच्च)।
  2. आयनों का आकार (छोटे → उच्च)।
  3. आंशिक सहसंयोजी प्रकृति (अधिक → कम)।

[बोर्ड में 5-अंक तर्क]

उदाहरण 9: NCERT — विलायक की पसंद

निम्न में सबसे अच्छा विलायक चुनें — कारण के साथ:

(a) NaCl के लिए — पानी या केरोसिन? (b) नेफ्थलीन (अध्रुवीय) के लिए — पानी या बेंज़ीन? (c) सोडियम क्लोराइड के लिए — एथेनॉल (हल्का ध्रुवीय) या जल (अति-ध्रुवीय)?

हल:

सिद्धांत

'जैसा विलायक वैसा विलेय।'

(a) NaCl के लिए

विकल्प:

  • पानी: ध्रुवीय।
  • केरोसिन: अध्रुवीय।

NaCl आयनिक — अति-ध्रुवीय। ध्रुवीय विलायक चाहिए।

उत्तर: पानी।

प्रमाण: NaCl पानी में विलेय (35-40 g प्रति 100 g पानी)। केरोसिन में अविलेय।

(b) नेफ्थलीन (C₁₀H₈) के लिए

विकल्प:

  • पानी: ध्रुवीय।
  • बेंज़ीन: अध्रुवीय।

नेफ्थलीन — अध्रुवीय (हाइड्रोकार्बन)। अध्रुवीय विलायक चाहिए।

उत्तर: बेंज़ीन।

प्रमाण: नेफ्थलीन (कैम्फर / 'मॉथ-बॉल') पानी में अविलेय। बेंज़ीन में अति-विलेय।

(c) NaCl के लिए — एथेनॉल या जल?

विकल्प:

  • एथेनॉल (C₂H₅OH): हल्का ध्रुवीय (OH समूह)।
  • जल: अति-ध्रुवीय।

NaCl को अधिक ध्रुवीय विलायक चाहिए।

उत्तर: जल।

प्रमाण: NaCl जल में अति-विलेय (~360 g/L)। एथेनॉल में बहुत कम (~0.65 g/L)।

सारांश तालिका

विलेय प्रकृति अच्छा विलायक
NaCl आयनिक पानी
MgSO₄ आयनिक पानी
नेफ्थलीन अध्रुवीय बेंज़ीन
आयोडीन अध्रुवीय CCl₄
सुगर ध्रुवीय (OH) पानी

अंतिम सीख

यह नियम — सिर्फ रसायन नहीं — रोज़मर्रा का।

'तेल और पानी नहीं मिलते' — इसी नियम का प्रमाण!

[NCERT पाठ्यपुस्तक]

उदाहरण 10: एक रोचक — विद्युत-अपघटन की भूमिका

जल में NaCl के विलयन को विद्युत-अपघटन करने पर क्या-क्या मिलेगा?

हल:

व्यवस्था

  • NaCl का जलीय विलयन (ब्राइन)।
  • दो ग्रेफाइट इलेक्ट्रोड।
  • DC विद्युत स्रोत।

तंत्र

जल में NaCl आयनित: NaClNa++ClNaCl \rightarrow Na^+ + Cl^-

जल भी अल्प आयनित: H2OH++OHH_2O \rightleftharpoons H^+ + OH^-

इलेक्ट्रोड पर अभिक्रियाएँ

Cathode (-) पर: कम क्रियाशील आयन निकलता।

यहाँ — Na⁺ vs H⁺ (जल से):

  • Na — उच्च क्रियाशील (कोई H₂ नहीं)।
  • H₂ — आसानी से बनता।

2H2O+2eH2+2OH2H_2O + 2e^- \rightarrow H_2\uparrow + 2OH^-

Anode (+) पर: कम क्रियाशील आयन ऑक्सीकृत होता।

यहाँ — Cl⁻ vs OH⁻:

  • Cl⁻ → Cl₂ (अधिक संभावना सान्द्र विलयन में)।

2ClCl2+2e2Cl^- \rightarrow Cl_2\uparrow + 2e^-

कुल प्रतिक्रिया

2NaCl+2H2Oविद्युत2NaOH+H2+Cl22NaCl + 2H_2O \xrightarrow{\text{विद्युत}} 2NaOH + H_2\uparrow + Cl_2\uparrow

प्रेक्षण

  • Cathode पर: रंगहीन गैस (H₂) — पॉप टेस्ट।
  • Anode पर: हल्की पीली गैस (Cl₂) — दम घोंटू गंध।
  • विलयन में: NaOH (क्षारक)।

व्यावसायिक उपयोग

यह 'क्लोर-एल्कली प्रक्रिया':

  • NaOH (कॉस्टिक सोडा): साबुन, कागज़, टेक्सटाइल।
  • Cl₂: पीने योग्य पानी का शुद्धीकरण, ब्लीचिंग पाउडर।
  • H₂: ईंधन, अमोनिया।

कुछ रोचक तथ्य

'क्लोर-एल्कली':

  • क्लोर = क्लोरीन (Cl₂)
  • एल्कली = क्षारक (NaOH)
  • एक प्रक्रिया से तीन उत्पाद!

आयतन की गणना: यदि 1 mol NaCl लें (NTP):

  • 0.5 mol H₂ = 11.2 L
  • 0.5 mol Cl₂ = 11.2 L
  • 1 mol NaOH (विलयन में)।

[बोर्ड + व्यावसायिक]

उदाहरण 11: संख्यात्मक — विद्युत-चालकता

0.1 mol NaCl को 1 L जल में घोला गया। आयन कितने मुक्त हैं?

हल:

आयनन:

NaClNa++ClNaCl \rightarrow Na^+ + Cl^-

0.1 mol NaCl से:

  • 0.1 mol Na⁺
  • 0.1 mol Cl⁻
  • कुल = 0.2 mol आयन

आयनों की संख्या:

1 mol = 6.022×10236.022 \times 10^{23}

  • Na⁺ = 0.1×6.022×1023=6.022×10220.1 \times 6.022 \times 10^{23} = 6.022 \times 10^{22}
  • Cl⁻ = 6.022×10226.022 \times 10^{22}
  • कुल = 1.2×10231.2 \times 10^{23} आयन

सान्द्रता:

1 L विलयन में 1.2×10231.2 \times 10^{23} आयन।

1.2×10231000\frac{1.2 \times 10^{23}}{1000} = 1.2×10201.2 \times 10^{20} आयन प्रति mL।

विद्युत-चालन में योगदान:

Na⁺ → cathode पर। Cl⁻ → anode पर।

दोनों मिलकर — विद्युत धारा बनाते।

तुलना — सान्द्रता का प्रभाव

1 mol/L NaCl: अधिक चालकता। 0.1 mol/L NaCl: कम चालकता। 0.001 mol/L NaCl: बहुत कम चालकता।

यानी — सान्द्रता ↑ → आयन ↑ → चालकता ↑।

अंतिम संख्या

0.1 mol NaCl में 1 L विलयन में:

  • कुल आयन: 1.2×10231.2 \times 10^{23}
  • Na⁺ आयन: 6.022×10226.022 \times 10^{22}
  • Cl⁻ आयन: 6.022×10226.022 \times 10^{22}

[बोर्ड में 3-अंक संख्यात्मक]

उदाहरण 12: NCERT — दैनिक जीवन के यौगिक

निम्न आयनिक यौगिकों के दैनिक उपयोग बताएँ:

(a) NaCl (b) CaO (c) NaHCO₃ (d) Na₂CO₃

हल:

(a) NaCl — सोडियम क्लोराइड (साधारण नमक)

दैनिक उपयोग:

  1. खाने में: स्वाद, पाचन, इलेक्ट्रोलाइट।
  2. खाद्य परिरक्षण: मछली, अचार, मांस।
  3. औद्योगिक: NaOH, Cl₂, Na₂CO₃, Na के निर्माण के लिए।
  4. चिकित्सा: सलाइन (saline) — IV द्रव।
  5. सर्दी में: बर्फ पिघलाने।

भारत में: समुद्री जल वाष्पन से सबसे अधिक प्राप्ति।

(b) CaO — कैल्शियम ऑक्साइड (अनबुझा चूना)

दैनिक उपयोग:

  1. सीमेंट निर्माण: मुख्य अवयव।
  2. चीनी शोधन: अशुद्धियों को हटाने।
  3. जल का pH: एसिडिक जल को क्षारकीय बनाने।
  4. चूना: दीवार-पुताई के लिए (Ca(OH)₂ के रूप में)।
  5. कागज़ निर्माण।
  6. मिट्टी की उर्वरता।

(c) NaHCO₃ — सोडियम बाइकार्बोनेट (बेकिंग सोडा)

दैनिक उपयोग:

  1. पकाने में: केक, बिस्कुट — फूलने के लिए।
  2. एंटासिड: पेट की अम्लता।
  3. अग्नि-शामक (फ़ायर एक्सटिंगुइशर): 2NaHCO3ΔNa2CO3+H2O+CO22NaHCO_3 \xrightarrow{\Delta} Na_2CO_3 + H_2O + CO_2 CO₂ आग बुझाती।
  4. दंत-मंजन।
  5. वस्त्र-धुलाई।

(d) Na₂CO₃ — सोडियम कार्बोनेट (वाशिंग सोडा)

दैनिक उपयोग:

  1. धुलाई: कपड़ों के लिए डिटर्जेंट के साथ।
  2. काँच निर्माण: मुख्य कच्चा माल।
  3. कागज़ उद्योग।
  4. जल कठोरता दूर करने।
  5. बोरेक्स बनाने में।

'धोबी का सोडा' — Na₂CO₃·10H₂O।

सारांश

ये चार यौगिक — रसोई से उद्योग तक हर जगह!

[NCERT — दैनिक जीवन में रसायन]

उदाहरण 13: NCERT — एक तुलनात्मक प्रश्न

NaCl और चीनी (Sucrose) — दोनों ठोस सफ़ेद, दोनों जल में विलेय। पर भौतिक गुणों में क्या अंतर?

हल:

मूल अंतर — बंध प्रकार

NaCl: आयनिक (Na — धातु, Cl — अधातु)। चीनी (C₁₂H₂₂O₁₁): सहसंयोजी (C, H, O — सब अधातु)।

विस्तृत तुलना

गुण NaCl चीनी
बंध आयनिक सहसंयोजी
गलनांक 801°C 186°C
क्वथनांक 1465°C विघटित
जल में विलेयता 36 g/100mL 200 g/100mL
जल में चालक? हाँ नहीं!
पिघले अवस्था चालक? हाँ नहीं
क्रिस्टल क्यूबिक त्रिवृत्तीय
स्वाद नमकीन मीठा
भंगुरता भंगुर भंगुर (परंतु कम)

विशेष — विद्युत-चालकता

NaCl + जल → Na⁺ + Cl⁻ → विद्युत प्रवाहित।

चीनी + जल → C₁₂H₂₂O₁₁ अणु (अखंड) → आयन नहीं → विद्युत नहीं।

एक प्रदर्शन

दो बीकर:

  • एक: NaCl + जल
  • दूसरा: चीनी + जल

बल्ब-बैटरी से जोड़ें:

  • NaCl: बल्ब जलता।
  • चीनी: बल्ब नहीं जलता।

एक भ्रम — चीनी जल में 'घुलती' है, फिर भी चालक नहीं?

चीनी पानी में अणुओं के रूप में घुलती है — आयन नहीं। आयन = चालक के लिए ज़रूरी। अणु — चालक के लिए नहीं।

सीख

आयनिक यौगिक: आयन देते → चालक। सहसंयोजी: अणु → चालक नहीं। अपवाद: अम्ल जैसे HCl — सहसंयोजी, परंतु जल में आयनित → चालक।

[बोर्ड में 5-अंक तुलनात्मक]

उदाहरण 14: एक रोचक — KMnO₄ बनाम MgO

दोनों आयनिक हैं। फिर भी KMnO₄ जल में बैंगनी रंग देता है, MgO अल्प-विलेय। क्यों?

हल:

KMnO₄

आयन: K+K^+ (+1) और MnO4MnO_4^- (-1)

MnO4MnO_4^- — पॉलीआटोमिक आयन।

विलेयता:

  • K⁺ छोटा परंतु आवेश +1।
  • MnO₄⁻ बड़ा।
  • आकर्षण मध्यम।
  • जल आसानी से अलग कर देता।

यानी जल में अति-विलेय

MnO₄⁻ बैंगनी रंग देता।

MgO

आयन: Mg2+Mg^{2+} और O2O^{2-}

विलेयता:

  • दोनों ±2 आवेश — प्रबल आकर्षण।
  • दोनों छोटे — दूरी कम।
  • आकर्षण 4\propto 4
  • जल का आकर्षण — Mg²⁺-O²⁻ आकर्षण से कम।
  • आयन क्रिस्टल जाली में रहते।

यानी जल में अल्प-विलेय

सिद्धांत

'विलेयता' पर निर्भर:

  1. लैटिस ऊर्जा (UlatticeU_{lattice}): आयन-आयन आकर्षण।
  2. जलीयन ऊर्जा (UhydrationU_{hydration}): आयन-जल आकर्षण।

यदि Uhydration>UlatticeU_{hydration} > U_{lattice} → विलेय। यदि Ulattice>UhydrationU_{lattice} > U_{hydration} → अविलेय।

तुलना

यौगिक UlatticeU_{lattice} UhydrationU_{hydration} विलेयता
KMnO₄ कम अधिक विलेय (बैंगनी)
NaCl मध्यम अधिक विलेय
MgO अति-उच्च मध्यम अविलेय
AgCl उच्च कम अविलेय

सीख

'सब आयनिक — जल में विलेय' — पूरी सच नहीं। यह संतुलन पर निर्भर।

अधिक आवेश + छोटे आयन → लैटिस ऊर्जा अधिक → कम विलेय।

[बोर्ड + व्यावहारिक]

उदाहरण 15: एक चुनौतीपूर्ण प्रश्न

क्या सच कहा जा सकता है — "सब आयनिक यौगिक जल में विलेय, सब विद्युत चालक"? तर्क के साथ बताएँ।

हल:

मूल कथन

"सब आयनिक यौगिक जल में विलेय, सब विद्युत चालक।"

उत्तर: यह पूरी तरह सच नहीं

विश्लेषण

'जल में विलेय' — अपवाद हैं:

यौगिक विलेयता कारण
NaCl, KCl अति-विलेय संतुलित आवेश
AgCl अविलेय उच्च लैटिस ऊर्जा
BaSO₄ अविलेय अति-स्थिर लैटिस
PbI₂ अविलेय बड़े आयन प्रबल आकर्षण
CaCO₃ अविलेय प्रबल बल
CaSO₄ अल्प-विलेय मध्यम
MgO अल्प-विलेय ±2 आवेश

अतः: लगभग 70-80% आयनिक यौगिक विलेय, 20-30% नहीं।

विद्युत चालकता — सही?

दो स्थितियाँ:

1. ठोस अवस्था में:

  • आयन स्थिर — कोई चालकता नहीं।
  • सब ठोस आयनिक यौगिक — विसंवाहक।

2. पिघले या जलीय:

  • आयन मुक्त — चालक।
  • सब आयनिक — पिघले/जलीय में चालक।

अपवाद:

  • यदि अविलेय (AgCl), तो जलीय चालक नहीं (आयन निकले ही नहीं)।
  • पिघले अवस्था में — फिर भी चालक

अद्यतन कथन

सही कथन:

'अधिकांश आयनिक यौगिक जल में विलेय।' 'सब आयनिक यौगिक — पिघले अवस्था में विद्युत-चालक।' 'विलेय आयनिक यौगिक — जलीय विलयन में चालक।' 'ठोस आयनिक यौगिक — विद्युत के विसंवाहक।'

अंतिम तर्क

प्रश्न में कही गई बात — एक 'सामान्यीकरण' है। कई अपवाद हैं। असली परीक्षण — गुणों पर निर्भर।

[बोर्ड में 5-अंक]

उदाहरण 16: एक समापन प्रश्न

(a) आयनिक यौगिकों के 5 भौतिक गुण। (b) क्यों ठोस NaCl विद्युत-चालक नहीं, पर पिघला है? (c) MgO का गलनांक NaCl से अधिक — कारण। (d) आयनिक vs सहसंयोजी — सबसे महत्वपूर्ण अंतर।

हल:

(a) 5 भौतिक गुण

  1. ठोस अवस्था: कठोर, क्रिस्टलीय, भंगुर।
  2. उच्च गलनांक/क्वथनांक: प्रबल आयन-आयन आकर्षण।
  3. जल में विलेय: ध्रुवीय जल आयनों को घेर लेता।
  4. अध्रुवीय में अविलेय: केरोसिन, बेंज़ीन में नहीं।
  5. विद्युत-चालकता: ठोस में नहीं, पिघले/जलीय में हाँ।

(b) NaCl की चालकता

ठोस NaCl:

  • आयन क्रिस्टल जाली में स्थिर।
  • गति नहीं → धारा नहीं।
  • ✗ चालक नहीं।

पिघला NaCl:

  • 801°C से ऊपर — गलता।
  • क्रिस्टल जाली टूटती।
  • आयन मुक्त — गति-शील।
  • Na⁺ → cathode, Cl⁻ → anode।
  • ✓ अति-चालक।

यह 'विद्युत-अपघटन' का मूल सिद्धांत।

(c) MgO का गलनांक — NaCl से अधिक

तुलना:

  • NaCl: ±1 आवेश, गलनांक 801°C
  • MgO: ±2 आवेश, गलनांक 2852°C

कारण (कूलॉम): Fq1q2F \propto q_1q_2

MgO में आकर्षण = 4 × NaCl।

अधिक आकर्षण → गलने के लिए अधिक ऊर्जा → उच्च गलनांक।

+ आयन का आकार छोटा → दूरी कम → आकर्षण और बढ़ा।

(d) आयनिक vs सहसंयोजी — सबसे महत्वपूर्ण अंतर

सबसे मूल अंतर:

आयनिक: इलेक्ट्रॉन का पूर्ण स्थानांतरण → आयन। सहसंयोजी: इलेक्ट्रॉन का साझाकरण → अणु।

व्यावहारिक प्रमाण: आयनिक — जलीय विलयन में चालक। सहसंयोजी — चालक नहीं (अपवाद: अम्ल)।

कूट तालिका

गुण आयनिक सहसंयोजी
गलनांक उच्च कम
जल चालकता हाँ नहीं (आम तौर)
बंध स्थानांतरण साझा
उदाहरण NaCl, MgO H₂O, CO₂

[बोर्ड में 5-अंक मिश्र प्रश्न]