निष्कर्षण और क्रियाशीलता का सम्बन्ध
धातु की क्रियाशीलता — उसके निष्कर्षण की विधि निर्धारित करती है।
तीन श्रेणियों में निष्कर्षण
1. कम क्रियाशील धातुएँ (श्रेणी के तल में):
- Hg, Cu, Ag, Au
- अति-सरल — सीधे गर्म करके या वायु में जलाकर।
2. मध्यम क्रियाशील धातुएँ (श्रेणी के मध्य में):
- Zn, Fe, Pb, Sn
- मध्यम कठिन — कार्बन (कोयला) से अपचयन।
3. अधिक क्रियाशील धातुएँ (श्रेणी के शीर्ष में):
- Na, K, Ca, Mg, Al
- अति-कठिन — विद्युत-अपघटन (electrolysis) से।
क्रियाशीलता और विधि — सारांश
सक्रिय श्रेणी (top → bottom)
K, Na, Ca, Mg, Al → विद्युत-अपघटन
Zn, Fe, Pb, (Cu) → कार्बन से अपचयन
Hg, Ag, (Au) → सीधे गर्म करके
सिद्धांत
अधिक क्रियाशील धातु = अधिक स्थिर यौगिक = अधिक ऊर्जा निष्कर्षण के लिए।
Na, K जैसी अति-क्रियाशील — कार्बन भी इन्हें अपचयित नहीं कर सकता। केवल विद्युत प्रवाह। Hg, Ag — कम स्थिर यौगिक — सरल गर्म करना ही काफी।
क्यों क्रियाशीलता मायने रखती है?
अधिक क्रियाशील धातु → अधिक प्रबलता से अधातु से जुड़ा। उसे 'मुक्त' करना — अधिक मेहनत।
कम क्रियाशील धातु → कमज़ोर बंध। 'मुक्त' करना — आसान।
निष्कर्षण की दो मुख्य प्रक्रियाएँ
1. भर्जन (Roasting): सल्फाइड अयस्क को वायु में गर्म करना। 2. निस्तापन (Calcination): कार्बोनेट/हाइड्रॉक्साइड को वायु के बिना गर्म करना।
दोनों — अयस्क को ऑक्साइड में बदलते हैं। ऑक्साइड फिर अपचयित।
यह क्यों? क्योंकि ऑक्साइड का अपचयन — सरल।

आरेख के अंग्रेज़ी लेबलों के हिन्दी अर्थ:
| English (in image) | हिन्दी |
|---|---|
| Metals of high reactivity | उच्च सक्रियता वाली धातुएँ |
| Electrolysis of molten ore | गलित अयस्क का विद्युत अपघटन |
| Metals of medium reactivity | मध्यम सक्रियता वाली धातुएँ |
| Roasting / Calcination | भर्जन / निस्तापन |
| Reduction (with carbon) | अपचयन (कार्बन द्वारा) |
| Metals of low reactivity | निम्न सक्रियता वाली धातुएँ |
| Found in free state | मुक्त अवस्था में प्राप्त |
भर्जन और निस्तापन
अयस्क को ऑक्साइड में बदलने की दो विधियाँ।
भर्जन (Roasting)
सल्फाइड अयस्क को वायु की उपस्थिति में गर्म करना।
सिद्धांत: अधिक ऑक्सीजन — अधिक तीव्र ऑक्सीकरण।
उदाहरण: ZnS का भर्जन:
ZnS → ZnO (ऑक्साइड) SO₂ — हानिकारक गैस, वातावरण में निकलती।
अन्य उदाहरण:
Cu पाइराइट्स का भर्जन:
HgS का भर्जन:
PbS का भर्जन:
निस्तापन (Calcination)
कार्बोनेट/हाइड्रॉक्साइड को वायु की अनुपस्थिति (या सीमित) में गर्म करना।
सिद्धांत: अपघटन — CO₂ या H₂O निकलता है, ऑक्साइड बचता।
उदाहरण: Calamine (ZnCO₃) का निस्तापन:
अन्य उदाहरण:
Limestone (CaCO₃) का निस्तापन:
Magnesite (MgCO₃) का निस्तापन:
Bauxite (Al(OH)₃) का निस्तापन:
तुलना — भर्जन vs निस्तापन
| गुण | भर्जन | निस्तापन |
|---|---|---|
| अयस्क | सल्फाइड | कार्बोनेट/हाइड्रॉक्साइड |
| वायु | हाँ (अधिक) | नहीं (या सीमित) |
| उत्पाद | ऑक्साइड + SO₂ | ऑक्साइड + CO₂/H₂O |
| उदाहरण | ZnS → ZnO | ZnCO₃ → ZnO |
क्यों दोनों ज़रूरी?
मूल नियम: सल्फाइड और कार्बोनेट — अपचयन के लिए सीधे प्रयोग नहीं। पहले उन्हें ऑक्साइड में बदलें — फिर ही कार्बन या विद्युत से अपचयन सरल।
अगला चरण
अब ऑक्साइड तैयार है — अब इसे धातु में बदलना है। यह — क्रियाशीलता पर निर्भर।
कम क्रियाशील धातुओं का निष्कर्षण
Hg, Cu, Ag — श्रेणी के तल पर। इनके यौगिक — कम स्थिर। सरल विधि से निष्कर्षण।
पारा (Hg) का निष्कर्षण
अयस्क: सिंदूर (Cinnabar, HgS)
चरण 1: भर्जन
चरण 2: HgO का अपघटन (और गर्म करें):
यानी — HgO गर्म करने पर खुद ही Hg में बदल जाता है।
यह HgO का गुण — कम स्थिर। आसानी से अपघटित।
यही — एक 'अति-सरल' निष्कर्षण।
कॉपर (Cu) का निष्कर्षण
अयस्क: कॉपर पाइराइट्स (CuFeS₂) या क्यूप्राइट (Cu₂O)
Cu₂S से (एक सरल विधि):
यदि Cu₂O और Cu₂S दोनों उपलब्ध हों — स्व-अपचयन (self-reduction):
यानी — एक अयस्क ने दूसरे को अपचयित किया! 'Self-reduction' — एक रोचक प्रक्रिया।
सिल्वर (Ag) का निष्कर्षण
अयस्क: Argentite (Ag₂S)
आधुनिक विधि — साइनाइड लीचिंग:
1. Ag₂S को NaCN विलयन में:
2. Zn से विस्थापन:
Ag अवक्षेप — शुद्ध रूप में।
एक रोचक तथ्य
Hg, Cu, Ag — तीनों के निष्कर्षण की विधियाँ बहुत सरल हैं। यही कारण कि — ये धातुएँ हजारों साल पहले से जानी जाती थीं। 'पाषाण युग' के बाद — 'तांब्र युग' (Copper Age) सीधे आया! Fe, Al — हाल ही में (पिछले 200 साल)।
मध्यम क्रियाशील धातुओं का निष्कर्षण — कार्बन से अपचयन
Zn, Fe, Pb — श्रेणी के मध्य में। अयस्क → ऑक्साइड → कार्बन से अपचयन → धातु।
मूल सिद्धांत
कार्बन — एक प्रबल अपचायक। यह ऑक्सीजन को अपनी ओर खींचता। 'धातु ऑक्साइड' से धातु को मुक्त करता।
सामान्य अभिक्रिया
या
Fe का निष्कर्षण — Blast Furnace में
अयस्क: Hematite (Fe₂O₃)
चरण 1: सान्द्रण (अनुभाग 6 — गुरुत्वीय)
चरण 2: निस्तापन/भर्जन अशुद्धियाँ हटाने के लिए अयस्क को गर्म।
चरण 3: अपचयन (Blast Furnace):
ऊँची, बेलनाकार भट्टी। ऊपर से डालें: अयस्क + कोयला (कोक) + चूना-पत्थर। नीचे से: गर्म हवा।
तीन क्षेत्रों में अभिक्रियाएँ:
1. ऊपरी क्षेत्र (~500°C):
2. मध्य क्षेत्र (~1000°C):
3. निचला क्षेत्र (~1500°C):
CaO + अशुद्धि (SiO₂):
यानी CaCO₃ — फ्लक्स के रूप में काम।
अंतिम उत्पाद:
- नीचे से: पिघला Fe (Pig iron — pig लोहा)।
- ऊपर: slag (CaSiO₃) — अलग।
Zn का निष्कर्षण
अयस्क: Zinc blende (ZnS) या Calamine (ZnCO₃)
चरण 1: ZnS का भर्जन:
(या ZnCO₃ का निस्तापन: ZnCO₃ → ZnO + CO₂)
चरण 2: ZnO का कार्बन से अपचयन:
Zn धातु बनी।
Pb का निष्कर्षण
अयस्क: Galena (PbS)
चरण 1: PbS का भर्जन:
चरण 2: PbO का अपचयन:
फ्लक्स और स्लैग — फिर से
अयस्क के साथ छिपी अशुद्धियाँ:
- अम्लीय गैंग (SiO₂) → क्षारकीय फ्लक्स (CaCO₃) से।
- क्षारकीय गैंग (CaO) → अम्लीय फ्लक्स (SiO₂) से।
फ्लक्स + गैंग → स्लैग (slag) — पिघली अवस्था में, अलग कर दिया।
अधिक क्रियाशील धातुओं का निष्कर्षण — विद्युत-अपघटन
Na, K, Ca, Mg, Al — श्रेणी के शीर्ष पर। कार्बन से अपचयन — पर्याप्त नहीं। केवल विद्युत-अपघटन।
सिद्धांत
पिघले हुए ऑक्साइड या क्लोराइड में विद्युत प्रवाहित। Cathode पर — धातु जमा। Anode पर — अधातु निकले।
Al का निष्कर्षण — Hall-Héroult प्रक्रिया
अयस्क: Bauxite ()
चरण 1: सान्द्रण (Bayer Process) (अनुभाग 6) अंत में शुद्ध Al₂O₃।
चरण 2: विद्युत-अपघटन (Hall-Héroult):
Al₂O₃ का गलनांक बहुत उच्च (~2050°C)। अकेले इसे पिघलाना — अति-महंगा।
समाधान: Al₂O₃ को क्रायोलाइट (Na₃AlF₆) में घोलें। अब गलनांक — ~950°C। बहुत सस्ता।
व्यवस्था:
- एक स्टील का बक्सा — कार्बन से लाइन।
- कार्बन ही Cathode (-)।
- ऊपर से कार्बन की छड़ें — Anode (+)।
- विलयन: Al₂O₃ + Na₃AlF₆ + CaF₂ (पिघले)।
अभिक्रियाएँ:
Cathode (-) पर:
पिघला Al — नीचे जमा।
Anode (+) पर:
O₂ निकलती — कार्बन से क्रिया करके CO/CO₂।
यही कारण कार्बन Anode धीरे-धीरे जलते — समय-समय पर बदले जाते।
कुल अभिक्रिया:
Na का निष्कर्षण — Down's Cell
अयस्क: Rock salt (NaCl)
चरण: पिघले NaCl का विद्युत-अपघटन
पिघले NaCl में CaCl₂ डालें — गलनांक कम (800°C → 600°C)।
अभिक्रियाएँ:
Cathode पर:
Anode पर:
यानी — Na धातु + Cl₂ गैस।
Ca का निष्कर्षण
पिघले CaCl₂ का विद्युत-अपघटन।
क्यों जलीय विलयन से नहीं?
अति-क्रियाशील धातुओं (Na, K, Ca) के जलीय विलयन से विद्युत-अपघटन — Na/K नहीं बनेगा!
क्यों? Cathode पर — H⁺ (जल से) पहले अपचयित होगा (H₂ बनेगा)।
इसलिए — पिघले अयस्क से ही।
सारांश तालिका — निष्कर्षण की विधियाँ
| धातु | अयस्क | विधि |
|---|---|---|
| Hg | HgS | सिर्फ गर्म करके |
| Cu | Cu₂S | स्व-अपचयन |
| Ag | Ag₂S | साइनाइड |
| Pb | PbS | भर्जन + कार्बन |
| Zn | ZnS/ZnCO₃ | भर्जन/निस्तापन + कार्बन |
| Fe | Fe₂O₃ | Blast furnace + कार्बन |
| Al | Al₂O₃ | Hall-Héroult (विद्युत) |
| Mg | MgCl₂ | विद्युत-अपघटन |
| Na | NaCl | Down's cell (विद्युत) |
| K | KCl | विद्युत-अपघटन |
मूल सिद्धांत
'क्रियाशीलता का स्तर' = निष्कर्षण की कठिनाई।
अधिक क्रियाशील = विद्युत-अपघटन। मध्यम = कार्बन से अपचयन। कम क्रियाशील = सीधे गर्म करके।
[बोर्ड महत्वपूर्ण] यह तालिका — हर साल बोर्ड में 5-अंक प्रश्न।
🧠 स्मृति कैप्सूल (Memory Capsule)
बोर्ड परीक्षा से ठीक पहले एक नज़र में।
1. क्रियाशीलता और निष्कर्षण विधि
| श्रेणी | धातुएँ | विधि |
|---|---|---|
| उच्च | K, Na, Ca, Mg, Al | विद्युत-अपघटन |
| मध्यम | Zn, Fe, Pb | कार्बन से अपचयन |
| निम्न | Hg, Cu, Ag, Au | सीधे गर्म करके |
2. भर्जन vs निस्तापन
| गुण | भर्जन | निस्तापन |
|---|---|---|
| अयस्क | सल्फाइड | कार्बोनेट |
| वायु | हाँ | नहीं |
| उदाहरण | ZnS → ZnO + SO₂ | ZnCO₃ → ZnO + CO₂ |
3. प्रसिद्ध अभिक्रियाएँ
ZnS का भर्जन:
ZnCO₃ का निस्तापन:
ZnO का कार्बन से अपचयन:
Fe निष्कर्षण:
HgO का अपघटन:
4. Al निष्कर्षण (Hall-Héroult)
- विद्युत-अपघटन: Al₂O₃ + क्रायोलाइट (Na₃AlF₆)।
- गलनांक 950°C।
- Cathode: ।
- Anode: ।
5. Na निष्कर्षण (Down's cell)
- पिघले NaCl + CaCl₂।
- Cathode: Na।
- Anode: Cl₂।
6. Blast Furnace में Fe
- अयस्क: Fe₂O₃
- कोयला (कोक) + CaCO₃ + गर्म हवा।
- मुख्य अभिक्रिया: ।
- फ्लक्स (CaO) + गैंग (SiO₂) → स्लैग (CaSiO₃)।
7. क्यों कार्बन Na को अपचयित नहीं कर सकता?
Na, C से अधिक क्रियाशील। C के लिए O₂ छोड़ने के लिए — Na को मेहनत लगती। उत्तर: विद्युत-अपघटन।
8. बोर्ड के 'सुनहरे' प्रश्न
- Fe निष्कर्षण — Blast Furnace।
- Al निष्कर्षण — Hall-Héroult।
- Na निष्कर्षण — क्यों विद्युत-अपघटन?
- भर्जन और निस्तापन में अंतर।
- कम क्रियाशील धातुओं की निष्कर्षण विधि।
अंतिम सूत्र: 'क्रियाशीलता ↑ → निष्कर्षण कठिनाई ↑ → ऊर्जा ↑।'
हल किए गए उदाहरण
उदाहरण 1: NCERT — निष्कर्षण की तीन श्रेणियाँ
धातुओं का निष्कर्षण उनकी क्रियाशीलता पर कैसे निर्भर करता है? तीन श्रेणियों में बाँटें।
हल:
मूल सिद्धांत
अधिक क्रियाशील धातु → अधिक स्थिर यौगिक → अधिक ऊर्जा निष्कर्षण के लिए।
तीन श्रेणियाँ
1. अधिक क्रियाशील (श्रेणी का शीर्ष)
धातुएँ: K, Na, Ca, Mg, Al
विधि: विद्युत-अपघटन।
क्यों? कार्बन भी इन्हें अपचयित नहीं कर सकता। केवल विद्युत प्रवाह — पर्याप्त ऊर्जा।
उदाहरण:
- Al: Hall-Héroult प्रक्रिया (Al₂O₃ + क्रायोलाइट)
- Na: Down's cell (पिघला NaCl)
- Mg: पिघला MgCl₂
2. मध्यम क्रियाशील (श्रेणी का मध्य)
धातुएँ: Zn, Fe, Pb, Sn, (Cu)
विधि: अयस्क → ऑक्साइड → कार्बन से अपचयन।
चरण:
- भर्जन/निस्तापन (अयस्क → ऑक्साइड)।
- कार्बन से अपचयन।
उदाहरण: Zn:
- (भर्जन)
- (अपचयन)
उदाहरण: Fe:
- (Blast Furnace में)
3. कम क्रियाशील (श्रेणी का तल)
धातुएँ: Hg, Cu, Ag, Au
विधि: सीधे गर्म करके या स्व-अपचयन।
क्यों? यौगिक कम स्थिर — गर्मी से ही धातु बनती।
उदाहरण: Hg:
उदाहरण: Au, Pt:
- मुक्त रूप में पाए — सिर्फ चुनना और शुद्ध करना।
सारांश तालिका
| श्रेणी | धातुएँ | विधि |
|---|---|---|
| उच्च | K-Al | विद्युत-अपघटन |
| मध्यम | Zn, Fe, Pb | कार्बन से अपचयन |
| कम | Hg, Cu, Ag, Au | सीधे/प्राकृतिक |
एक रोचक बिंदु
यही कारण कि:
- 'पाषाण युग' के बाद तांब्र युग सीधे आया (Cu — सरल निष्कर्षण)।
- लोहे का युग — Cu के बाद (Fe निष्कर्षण कठिन)।
- Al — हाल ही में (1825 में), क्योंकि विद्युत-अपघटन तकनीक ज़रूरी।
[NCERT पाठ्यपुस्तक — मूलभूत]
उदाहरण 2: NCERT — भर्जन और निस्तापन
भर्जन और निस्तापन क्या हैं? रासायनिक अभिक्रियाओं के साथ अंतर बताएँ।
हल:
भर्जन (Roasting)
परिभाषा: सल्फाइड अयस्क को वायु की उपस्थिति में गर्म करना — ताकि वह ऑक्साइड में बदल जाए।
सामान्य रूप:
उदाहरण:
1. Zinc blende (ZnS):
2. Cinnabar (HgS):
3. Galena (PbS):
4. Iron pyrites (FeS₂):
निस्तापन (Calcination)
परिभाषा: कार्बोनेट या हाइड्रॉक्साइड अयस्क को वायु की अनुपस्थिति (या सीमित) में गर्म करना — ताकि वह ऑक्साइड में बदल जाए।
सामान्य रूप:
या
उदाहरण:
1. Calamine (ZnCO₃):
2. Limestone (CaCO₃):
3. Magnesite (MgCO₃):
4. Bauxite hydroxide (Al(OH)₃):
मुख्य अंतर
| गुण | भर्जन | निस्तापन |
|---|---|---|
| अयस्क प्रकार | सल्फाइड | कार्बोनेट / हाइड्रॉक्साइड |
| वायु | हाँ (अधिक) | नहीं (या सीमित) |
| उत्पाद | ऑक्साइड + SO₂ | ऑक्साइड + CO₂ या H₂O |
| गैस | SO₂ (विषाक्त) | CO₂ (अपेक्षाकृत हानिरहित) |
क्यों दोनों ज़रूरी?
अपचयन सीधे सल्फाइड या कार्बोनेट से कठिन। ऑक्साइड का अपचयन — सरल।
अतः पहले इन अयस्कों को ऑक्साइड में बदलें — फिर अपचयन करें।
एक रोचक बिंदु
SO₂ — पर्यावरण समस्या। भर्जन की वायु में निकली SO₂ — अम्लीय वर्षा का कारण। आधुनिक उद्योग — SO₂ को पकड़कर में बदल देते। यानी 'अपशिष्ट' से 'मूल्यवान उत्पाद'।
[NCERT — हर साल पूछा जाता]
उदाहरण 3: NCERT — Fe का निष्कर्षण
Blast Furnace में Fe का निष्कर्षण समझाएँ। मुख्य अभिक्रियाएँ लिखें।
हल:
Blast Furnace (विस्तृत)
व्यवस्था:
- ऊँची, बेलनाकार भट्टी (~25-30 m)।
- ऊपर: 'चार्ज' (अयस्क + कोयला + चूना-पत्थर) डालें।
- नीचे: गर्म हवा प्रवाहित।
चार्ज (Charge) में क्या?
1. अयस्क: Fe₂O₃ (Hematite) — सान्द्रित। 2. कोक (Coke): शुद्ध कार्बन — ईंधन और अपचायक। 3. चूना-पत्थर (Limestone): CaCO₃ — फ्लक्स।
तीन क्षेत्रों में अभिक्रियाएँ
क्षेत्र 1: निचला (~1500-2000°C) — दहन क्षेत्र
1. कोयला + हवा:
2. CO₂ + और कोयला (उच्च ताप पर):
CO — मुख्य अपचायक।
क्षेत्र 2: मध्य (~1000°C) — अपचयन क्षेत्र
Fe का अपचयन (CO से):
यह मुख्य अभिक्रिया — Fe निकलता है।
अन्य अभिक्रियाएँ:
क्षेत्र 3: ऊपरी (~500°C) — पूर्व-तैयारी
1. CaCO₃ का अपघटन:
2. CaO + अशुद्धि (SiO₂):
यानी CaO — फ्लक्स के रूप में, गैंग (SiO₂) से जुड़ता।
अंतिम उत्पाद
भट्टी के निचे:
- पिघला Fe (नीचे, भारी)।
- पिघला slag (CaSiO₃) (ऊपर, हल्का)।
दोनों — अलग-अलग छिद्रों से बाहर।
Pig Iron — पहला उत्पाद
Blast Furnace से निकला Fe — 'pig iron' (कच्चा लोहा)। 4% C + अन्य अशुद्धियाँ।
इसे आगे शुद्ध करना — 'cast iron' या 'wrought iron'।
एक मुख्य चित्र (शब्दों में):
ऊपर — चार्ज (अयस्क + कोयला + चूना)
↓
500°C — CaCO₃ → CaO + CO₂
↓
1000°C — Fe₂O₃ + 3CO → 2Fe + 3CO₂
↓
1500°C — C + O₂ → CO₂; CO₂ + C → 2CO
↓
नीचे — पिघला Fe (निकालें)
पिघला slag (अलग)
गर्म हवा अंदर ←
सारांश
Blast Furnace = आधुनिक स्टील उद्योग की रीढ़। भारत में: Tata Steel, SAIL, Bhilai Steel Plant — सब Blast Furnace।
[NCERT — हर साल बोर्ड में 5-अंक]
उदाहरण 4: NCERT — Al का निष्कर्षण (Hall-Héroult)
Aluminium का निष्कर्षण विस्तार से बताएँ।
हल:
अयस्क
Bauxite ()
अशुद्धियाँ: Fe₂O₃, SiO₂, TiO₂
चरण 1: सान्द्रण — Bayer Process (अनुभाग 6)
यहाँ संक्षेप में:
1. NaOH में Al₂O₃ घुलना:
2. छानें — अशुद्धियाँ हटाएँ।
3. NaAlO₂ से Al(OH)₃:
4. Al(OH)₃ को गर्म करें (निस्तापन):
अब शुद्ध Al₂O₃।
चरण 2: विद्युत-अपघटन — Hall-Héroult
समस्या: Al₂O₃ का गलनांक ~2050°C। बहुत महंगा।
समाधान: Al₂O₃ को क्रायोलाइट (Na₃AlF₆) में घोलें। अब गलनांक — 950°C।
व्यवस्था:
- स्टील का बक्सा — कार्बन की लाइनिंग।
- कार्बन लाइनिंग = Cathode (-)।
- ऊपर से कार्बन की छड़ें = Anode (+)।
- विलयन: पिघला (Al₂O₃ + Na₃AlF₆ + CaF₂)।
अभिक्रियाएँ:
Al₂O₃ → 2Al³⁺ + 3O²⁻ (पिघले अवस्था में)
Cathode (-) पर:
पिघला Al — नीचे जमा। बक्से के तल से निकाला।
Anode (+) पर:
O₂ निकलती — पर अधिक ताप पर कार्बन से क्रिया:
यही कारण कार्बन Anode धीरे-धीरे जलते। समय-समय पर बदले जाते।
कुल अभिक्रिया:
महत्वपूर्ण बिंदु
1. क्रायोलाइट का काम:
- गलनांक कम करना (2050 → 950°C)।
- विद्युत चालकता बढ़ाना।
2. CaF₂ का काम:
- गलनांक और कम करना।
- विलयन को स्थिर रखना।
3. ऊर्जा:
- Al निष्कर्षण — अति-ऊर्जा-गहन।
- 1 kg Al ≈ 14-15 kWh विद्युत।
- यही कारण — Al का पुनर्चक्रण (recycling) महत्वपूर्ण।
एक रोचक तथ्य
Al — पृथ्वी की पपड़ी की सबसे प्रचुर धातु (~8%)। फिर भी, Al का व्यावसायिक उत्पादन — 1886 तक संभव नहीं था।
Hall (USA) और Héroult (फ्रांस) — दोनों ने एक ही समय (1886) में अलग-अलग यह विधि खोजी। दोनों के सम्मान में — 'Hall-Héroult' प्रक्रिया।
[NCERT — बोर्ड में 5-अंक]
उदाहरण 5: NCERT — कम क्रियाशील धातुओं का निष्कर्षण
Hg और Cu के निष्कर्षण की विधियाँ बताएँ।
हल:
Hg का निष्कर्षण
अयस्क: Cinnabar (HgS)
चरण 1: भर्जन
HgS पहले HgO में बदला।
चरण 2: HgO का स्व-अपघटन
HgO अधिक ताप पर — स्वतः अपघटित होता:
यानी कोई बाहरी अपचायक की ज़रूरत नहीं! HgO स्वयं ही अस्थिर।
अंतिम उत्पाद: पिघला Hg — सीधे एकत्र किया जाता।
एक रोचक प्रदर्शन — एक चरण में
यदि भट्टी का तापमान बहुत अधिक रखा जाए — दोनों चरण एक साथ:
यानी HgS से सीधे Hg!
Cu का निष्कर्षण
अयस्क: Copper pyrites (CuFeS₂)
चरण 1: सान्द्रण (फेन-प्लवन)
चरण 2: भर्जन
Cu₂S और FeO बने।
चरण 3: फ्लक्स के साथ गलाना
Cu₂S और FeO + SiO₂ (फ्लक्स):
Fe slag के रूप में अलग। Cu₂S — 'matte' के रूप में नीचे।
चरण 4: स्व-अपचयन
'Matte' (Cu₂S) को हवा में गर्म करें:
1. कुछ Cu₂S → Cu₂O:
2. फिर Cu₂O + Cu₂S (बचा):
यानी — एक भाग ने दूसरे को अपचयित किया! यह 'स्व-अपचयन (self-reduction)'।
क्यों स्व-अपचयन?
Cu की क्रियाशीलता — मध्यम/कम। यौगिक स्थिर नहीं। S से एक 'स्वाभाविक अपचायक' मिल जाता।
सारांश
| धातु | अयस्क | विधि |
|---|---|---|
| Hg | HgS | भर्जन + स्व-अपघटन |
| Cu | CuFeS₂ | भर्जन + स्व-अपचयन |
| Ag | Ag₂S | साइनाइड + Zn विस्थापन |
अंतिम सीख
'कम क्रियाशील' = 'सरल विधि'। यही कारण कि — Cu, Hg, Ag — हजारों साल से ज्ञात।
[NCERT — महत्वपूर्ण]
उदाहरण 6: NCERT — Na का निष्कर्षण
Na का निष्कर्षण क्यों जलीय विलयन के विद्युत-अपघटन से नहीं होता? सही विधि क्या है?
हल:
क्यों जलीय NaCl से नहीं?
यदि NaCl जलीय विलयन का विद्युत-अपघटन करें:
Cathode पर — दो विकल्प:
- (Na का अपचयन)
- (जल का अपचयन)
कौन-सा होगा?
क्रियाशीलता श्रेणी देखें: Na (अति-क्रियाशील) > H₂O
नियम: Cathode पर — कम क्रियाशील आयन/अणु अपचयित होगा।
अतः — H₂O ही अपचयित। Na नहीं।
यानी — जलीय NaCl से H₂ निकलेगा, Na नहीं।
सही विधि — Down's Cell
पिघले NaCl का विद्युत-अपघटन।
व्यवस्था:
- एक स्टील का बक्सा।
- विलयन: पिघला NaCl + CaCl₂।
- क्यों CaCl₂? NaCl का गलनांक 800°C कम करने के लिए (~600°C)।
- Cathode: स्टील वलय (Na एकत्र करने के लिए)।
- Anode: कार्बन छड़ (Cl₂ निकलने के लिए)।
अभिक्रियाएँ:
Cathode (-) पर:
पिघला Na — हल्का, ऊपर तैरता। एक ट्यूब से बाहर।
Anode (+) पर:
Cl₂ गैस — अलग ट्यूब से बाहर।
कुल:
सावधानियाँ
*1. Na और Cl₂ — एक-दूसरे से दूर रखे जाएँ। *(अन्यथा वापस NaCl बन जाएँ — और विस्फोट।)* 2. वायुरुद्ध बक्सा — Na को वायु से बचाए। 3. पिघले Na को केरोसिन में डालें — संरक्षण।
तुलना — पिघले vs जलीय
| गुण | पिघला NaCl | जलीय NaCl |
|---|---|---|
| विद्युत-अपघटन | Na + Cl₂ | H₂ + Cl₂ + NaOH |
| उत्पाद | Na धातु | NaOH |
| गलनांक | 800°C (CaCl₂ से कम) | कमरे का ताप |
| उपयोग | Na निष्कर्षण | क्लोर-एल्कली प्रक्रिया |
व्यापक सिद्धांत
अति-क्रियाशील धातुओं (K, Na, Ca, Mg, Al) के लिए: केवल पिघले अयस्क के विद्युत-अपघटन से निष्कर्षण।
मध्यम (Zn, Fe, Pb) के लिए: कार्बन से अपचयन।
एक रोचक तथ्य
Na का जलीय विद्युत-अपघटन — अध्याय 2 की 'क्लोर-एल्कली प्रक्रिया'। उसमें Na नहीं, NaOH निकलता। यह प्रक्रिया — व्यावसायिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण।
[NCERT — हर साल बोर्ड में]
उदाहरण 7: NCERT — कौन-सी विधि?
निम्न धातुओं के निष्कर्षण की उपयुक्त विधि बताएँ:
(a) Mg, (b) Cu, (c) Au, (d) Zn, (e) Pb
हल:
पहले क्रियाशीलता श्रेणी देखें: K > Na > Ca > Mg > Al > Zn > Fe > Pb > H > Cu > Hg > Ag > Au
(a) Mg
श्रेणी: उच्च क्रियाशीलता।
विधि: विद्युत-अपघटन।
अयस्क: MgCl₂ (पिघले रूप में)।
Cathode पर: Mg²⁺ + 2e⁻ → Mg। Anode पर: 2Cl⁻ → Cl₂।
कार्बन से अपचयन क्यों नहीं? Mg, C से अधिक क्रियाशील।
(b) Cu
श्रेणी: कम क्रियाशीलता।
विधि: भर्जन + स्व-अपचयन।
अयस्क: CuFeS₂
भर्जन: 2CuFeS₂ + O₂ → Cu₂S + … स्व-अपचयन: 2Cu₂O + Cu₂S → 6Cu + SO₂।
(c) Au
श्रेणी: अति-कम क्रियाशीलता (श्रेणी का तल)।
विधि: मुक्त रूप में (panning या cyanide leaching)।
1. मुक्त सोना — सीधे चुनें। 2. सान्द्र रूप: साइनाइड लीचिंग + Zn विस्थापन।
क्यों कोई 'अपचयन' नहीं? Au यौगिक — दुर्लभ।
(d) Zn
श्रेणी: मध्यम क्रियाशीलता।
विधि: भर्जन + कार्बन से अपचयन।
अयस्क: ZnS या ZnCO₃
1. भर्जन: 2ZnS + 3O₂ → 2ZnO + 2SO₂ (या निस्तापन: ZnCO₃ → ZnO + CO₂)
2. अपचयन: ZnO + C → Zn + CO।
(e) Pb
श्रेणी: मध्यम क्रियाशीलता।
विधि: भर्जन + कार्बन से अपचयन।
अयस्क: PbS (Galena)
1. भर्जन: 2PbS + 3O₂ → 2PbO + 2SO₂ 2. अपचयन: PbO + C → Pb + CO।
सारांश तालिका
| धातु | क्रियाशीलता | विधि | मुख्य अभिक्रिया |
|---|---|---|---|
| Mg | उच्च | विद्युत-अपघटन | |
| Cu | कम | स्व-अपचयन | |
| Au | अति-कम | प्राकृतिक | (मुक्त रूप) |
| Zn | मध्यम | C से अपचयन | |
| Pb | मध्यम | C से अपचयन |
सीख
'क्रियाशीलता तय करती है — विधि।'
[NCERT पाठ्यपुस्तक — आवेदन]
उदाहरण 8: एक रोचक — स्व-अपचयन
Cu का निष्कर्षण — स्व-अपचयन (self-reduction) की प्रक्रिया से कैसे होता है?
हल:
स्व-अपचयन — परिभाषा
'स्व-अपचयन' = अयस्क के एक भाग ने अयस्क के दूसरे भाग को अपचयित किया। कोई बाहरी अपचायक नहीं।
Cu के लिए चरण-दर-चरण
अयस्क: Cu₂S (Cu pyrites से प्राप्त 'matte')
चरण 1: आंशिक भर्जन
Cu₂S का कुछ हिस्सा वायु में जलाएँ:
अब मिश्रण: Cu₂O + बचा हुआ Cu₂S।
चरण 2: स्व-अपचयन
Cu₂O और Cu₂S — आपस में अभिक्रिया:
यानी:
- Cu₂O ने O छोड़ा (अपचयित)।
- Cu₂S ने S छोड़ा (ऑक्सीकृत)।
- अंत में: शुद्ध Cu बना।
विश्लेषण
यहाँ कौन क्या?
Cu₂O में:
- Cu: +1
- अंत में Cu: 0 → अपचयन!
Cu₂S में:
- S: -2
- अंत में S: +4 (SO₂ में) → ऑक्सीकरण!
यानी — एक ही धातु (Cu) के एक यौगिक ने Cu को मुक्त किया।
क्यों Cu के लिए संभव?
Cu — कम क्रियाशील। Cu₂O और Cu₂S — दोनों कम स्थिर। Cu आसानी से मुक्त हो जाती।
क्या Fe के लिए भी?
Fe — अधिक क्रियाशील। Fe₂O₃ अधिक स्थिर। स्व-अपचयन से Fe नहीं निकल सकता।
Fe के लिए — कार्बन से अपचयन ज़रूरी।
एक रोचक तुलना
| धातु | निष्कर्षण | अपचायक |
|---|---|---|
| Cu | स्व-अपचयन | अयस्क का दूसरा भाग (S²⁻) |
| Zn | C से | बाहरी कार्बन |
| Fe | C से (CO) | बाहरी कार्बन |
| Hg | स्व-अपघटन | कोई नहीं (केवल ऊष्मा) |
| Al | विद्युत | विद्युत प्रवाह |
व्यावहारिक महत्व
स्व-अपचयन — कम ऊर्जा-गहन। कोयला नहीं चाहिए। उद्योग के लिए — कुशल।
यही कारण कि Cu — Bronze Age (3300 BC) से जाना।
[बोर्ड में 5-अंक]
उदाहरण 9: NCERT — फ्लक्स और स्लैग
फ्लक्स और स्लैग क्या हैं? Fe निष्कर्षण में इनकी भूमिका।
हल:
परिभाषाएँ
फ्लक्स (Flux): निष्कर्षण के दौरान — गैंग को हटाने के लिए डाला गया रसायन।
स्लैग (Slag): फ्लक्स + गैंग की अभिक्रिया से बना पिघला यौगिक।
सिद्धांत
अम्लीय फ्लक्स + क्षारकीय गैंग → स्लैग। क्षारकीय फ्लक्स + अम्लीय गैंग → स्लैग।
यानी — विपरीत प्रकृति।
फ्लक्स के प्रकार
1. अम्लीय फ्लक्स:
- (सिलिका)
- क्षारकीय अशुद्धि के लिए।
2. क्षारकीय फ्लक्स:
- (चूना — CaCO₃ के अपघटन से)
- अम्लीय अशुद्धि के लिए।
Fe निष्कर्षण में फ्लक्स
अयस्क: Fe₂O₃ (Hematite)
अशुद्धि (गैंग): (सिलिका — रेत) — अम्लीय।
फ्लक्स: (चूना-पत्थर) → गर्म होकर CaO बनता — क्षारकीय।
अभिक्रियाएँ:
1. CaCO₃ का अपघटन:
2. CaO + SiO₂ → CaSiO₃ (स्लैग):
यह स्लैग — पिघला हुआ, हल्का, Fe के ऊपर तैरता। अलग छिद्र से बाहर।
उद्योग में स्लैग का उपयोग
स्लैग को 'अपशिष्ट' न समझें — कई उपयोग:
- सीमेंट निर्माण: Slag cement।
- सड़क निर्माण: Slag aggregate।
- उर्वरक: कैल्शियम स्रोत।
- फिलिंग सामग्री।
Cu निष्कर्षण में फ्लक्स
अशुद्धि: FeO फ्लक्स: SiO₂
अभिक्रिया:
यानी — Cu और Fe — फ्लक्स की मदद से अलग।
सारांश तालिका
| धातु | अशुद्धि (गैंग) | फ्लक्स | स्लैग |
|---|---|---|---|
| Fe | SiO₂ (अम्लीय) | CaCO₃ (क्षारकीय) | CaSiO₃ |
| Cu | FeO (क्षारकीय) | SiO₂ (अम्लीय) | FeSiO₃ |
एक मूल नियम
अशुद्धि + फ्लक्स = स्लैग 'अम्लीय + क्षारकीय' संयोजन से।
यह 'धातुकर्म' का बुनियादी सिद्धांत।
[NCERT — महत्वपूर्ण]
उदाहरण 10: एक संख्यात्मक — Al का निष्कर्षण
100 kg Al₂O₃ से कितना Al मिलेगा? (Al=27, O=16)
हल:
अभिक्रिया:
अणुभार:
- g/mol
- 1 mol Al = 27 g
अनुपात:
- 1 mol Al₂O₃ → 2 mol Al
- 102 g Al₂O₃ → 54 g Al
100 kg Al₂O₃ से:
≈ 53 kg Al।
उत्तर: 100 kg Al₂O₃ से लगभग 53 kg Al मिलेगा।
अतिरिक्त जानकारी
उत्पादकता:
- 100 kg Al₂O₃ × 53% = 53 kg Al।
- Al₂O₃ में Al का प्रतिशत = 53%।
बायर प्रक्रिया से: ~2 टन बॉक्साइट → ~1 टन Al₂O₃।
हॉल-हीरॉल्ट से: ~2 टन Al₂O₃ → ~1 टन Al।
कुल: ~4 टन बॉक्साइट → ~1 टन शुद्ध Al।
ऊर्जा की गणना
Al निष्कर्षण के लिए ऊर्जा: ~14-15 kWh प्रति kg Al।
100 kg Al₂O₃ से 53 kg Al → ~750-800 kWh विद्युत।
यह एक माह की भारतीय औसत घरेलू खपत के बराबर!
क्यों Al पुनर्चक्रण ज़रूरी?
1 kg Al पुनर्चक्रित → 95% कम ऊर्जा। केवल 0.7-0.8 kWh, बजाय 14-15 kWh।
यानी पुनर्चक्रण = ऊर्जा बचत + पर्यावरण लाभ।
'Aluminium can recycling' — दुनिया भर में।
[बोर्ड में 3-अंक संख्यात्मक]
उदाहरण 11: एक तार्किक — सही या गलत?
निम्न कथनों को सही/गलत बताएँ — कारण के साथ:
(a) Al को कार्बन से अपचयित किया जा सकता है। (b) Hg का निष्कर्षण विद्युत-अपघटन से होता है। (c) ZnCO₃ को पहले निस्तापित किया जाता है। (d) Na को जलीय NaCl के विद्युत-अपघटन से प्राप्त किया जाता है।
हल:
(a) Al को कार्बन से अपचयित — गलत ✗
कारण: Al, C से अधिक क्रियाशील।
क्रियाशीलता:
अधिक क्रियाशील — कम क्रियाशील को विस्थापित करता। उल्टा नहीं।
अतः: C, Al₂O₃ से Al नहीं निकाल सकता।
सही विधि: विद्युत-अपघटन (Hall-Héroult)।
(b) Hg का विद्युत-अपघटन से — गलत ✗
कारण: Hg — कम क्रियाशील। HgO अति-अस्थिर — सिर्फ गर्म करने पर अपघटित।
विद्युत-अपघटन — अनावश्यक खर्च।
सही विधि: (भर्जन) (अपघटन)
केवल गर्म करना — पर्याप्त।
(c) ZnCO₃ को पहले निस्तापित — सही ✓
कारण: ZnCO₃ कार्बोनेट अयस्क। निस्तापन = कार्बोनेट को ऑक्साइड में बदलना।
अब ZnO का अपचयन कार्बन से सरल।
यह मानक विधि।
(d) Na को जलीय NaCl से — गलत ✗
कारण: जलीय NaCl में:
- Cathode पर: Na vs H₂O — Na अधिक क्रियाशील।
- अतः H₂O अपचयित (H₂ निकलता)।
- Na नहीं बनता।
उत्पाद: H₂ + Cl₂ + NaOH (क्लोर-एल्कली प्रक्रिया)।
सही विधि: पिघले NaCl का विद्युत-अपघटन (Down's cell)।
सारांश
| कथन | सही/गलत | सही उत्तर |
|---|---|---|
| Al + C | ✗ गलत | विद्युत-अपघटन |
| Hg + विद्युत | ✗ गलत | भर्जन + अपघटन |
| ZnCO₃ + निस्तापन | ✓ सही | — |
| Na + जलीय | ✗ गलत | पिघला NaCl |
सीख
ज्ञान = क्रियाशीलता श्रेणी + अयस्क प्रकार।
[बोर्ड में 5-अंक तार्किक]
उदाहरण 12: NCERT — Cu का निष्कर्षण
Copper pyrites (CuFeS₂) से Cu का निष्कर्षण — सब चरणों के साथ बताएँ।
हल:
अयस्क
Copper pyrites — (Cu और Fe दोनों के सल्फाइड)।
चरण 1: सान्द्रण
फेन-प्लवन विधि (अनुभाग 6)। अब सान्द्रित CuFeS₂।
चरण 2: भर्जन
हवा में गर्म:
उत्पाद: Cu₂S, FeO, SO₂।
चरण 3: फ्लक्स के साथ गलाना (Smelting)
'Reverberatory furnace' में:
FeO + SiO₂ (फ्लक्स) → FeSiO₃ (स्लैग):
यानी — Fe slag के रूप में अलग। Cu₂S — 'matte' के रूप में नीचे।
चरण 4: स्व-अपचयन (Self Reduction)
'Bessemer converter' में Cu₂S का आंशिक भर्जन:
अब मिश्रण: Cu₂O + Cu₂S।
स्व-अपचयन:
अंत में — खुरदुरा (blister) Cu। यह 99% शुद्ध, परंतु अशुद्धियाँ हैं।
चरण 5: परिष्करण (Refining) — अनुभाग 8
विद्युत-अपघटनी परिष्करण से 99.99% शुद्ध Cu।
प्रवाह आरेख
CuFeS₂ (Copper pyrites)
↓ सान्द्रण (फेन-प्लवन)
सान्द्रित CuFeS₂
↓ भर्जन (हवा + गर्म)
Cu₂S + FeO + SO₂
↓ + SiO₂ (फ्लक्स)
Cu₂S (matte) + FeSiO₃ (slag)
↓ हवा + गर्म
Cu₂O
↓ + Cu₂S (बचा)
6Cu + SO₂ (Blister Cu)
↓ विद्युत-अपघटनी परिष्करण
शुद्ध Cu (99.99%)
कुल अभिक्रिया (एक नज़र में)
अयस्क → धातु — कई चरणों में।
प्रत्येक अभिक्रिया का उद्देश्य:
- भर्जन: सल्फाइड को ऑक्साइड में।
- गलाना (smelting): अशुद्धियाँ हटाना।
- स्व-अपचयन: Cu मुक्त करना।
- परिष्करण: शुद्धता।
Cu का व्यावहारिक उपयोग
99.99% शुद्ध Cu — विद्युत के तार बनाने। उच्च चालकता। टिकाऊपन।
हर साल भारत में लाखों टन Cu का उत्पादन।
[NCERT — हर साल बोर्ड में]
उदाहरण 13: एक तुलनात्मक — कार्बन से अपचयन के 3 उदाहरण
Fe, Zn, Pb — तीनों के कार्बन से अपचयन की अभिक्रियाएँ।
हल:
सामान्य सिद्धांत
तीनों मध्यम क्रियाशील। तीनों के लिए: अयस्क → ऑक्साइड → कार्बन से अपचयन।
Fe निष्कर्षण
अयस्क: Fe₂O₃ (Hematite)
मुख्य अभिक्रियाएँ (Blast Furnace):
1. कोयला + हवा:
2. CO₂ + और कोयला:
3. मुख्य अपचयन:
यहाँ अपचायक: CO (न कि C सीधे)।
उपयुक्त ताप: ~1500°C।
Zn निष्कर्षण
अयस्क: ZnS (Zinc blende)
अभिक्रियाएँ:
1. भर्जन:
2. अपचयन:
यहाँ अपचायक: C सीधे।
उपयुक्त ताप: ~1100°C।
Pb निष्कर्षण
अयस्क: PbS (Galena)
अभिक्रियाएँ:
1. भर्जन:
2. अपचयन:
अपचायक: C सीधे।
उपयुक्त ताप: ~1000°C।
तुलनात्मक तालिका
| धातु | अयस्क | प्रथम चरण | अपचायक | ताप |
|---|---|---|---|---|
| Fe | Fe₂O₃ | (कोई नहीं) | CO | 1500°C |
| Zn | ZnS | भर्जन → ZnO | C | 1100°C |
| Pb | PbS | भर्जन → PbO | C | 1000°C |
क्यों Fe में CO, अन्य में C सीधे?
Blast Furnace में:
- ऊँची भट्टी।
- गर्म हवा अंदर।
- CO बनती है — पूरी भट्टी में।
- CO अधिक प्रबल अपचायक — विशेष रूप से कम ताप पर।
Zn, Pb के लिए छोटी भट्टी:
- अधिक ताप (1000-1100°C)।
- C सीधे ही पर्याप्त।
एक रोचक बिंदु
यदि Zn गैस अवस्था में बने (1000°C से ऊपर): Zn गैस ठंडी हो — द्रव → ठोस। यानी 'distillation' से शुद्ध Zn।
Fe — पिघलकर तरल। नीचे एकत्र।
सीख
तीनों = कार्बन का अपचयन। पर — विधि के विवरण भिन्न। प्रत्येक धातु के लिए — विशेष परिस्थितियाँ।
[बोर्ड में 5-अंक तुलनात्मक]
उदाहरण 14: NCERT — एक मिश्र प्रश्न
निम्न के उत्तर दें:
(a) Bauxite का सूत्र क्या है? (b) Cryolite की भूमिका क्या? (c) Hall-Héroult प्रक्रिया में Cathode और Anode के पदार्थ? (d) कुल अभिक्रिया क्या?
हल:
(a) Bauxite का सूत्र
सूत्र:
यानी: हाइड्रेटेड एल्यूमिनियम ऑक्साइड।
'Bauxite' — फ्रांस के Les Baux गाँव के नाम पर। (वहाँ पहली बार खोजा।)
(b) Cryolite की भूमिका
Cryolite () — एक 'विलायक':
Al₂O₃ का गलनांक — ~2050°C। (बहुत महंगा।) Cryolite में Al₂O₃ डालें — गलनांक 950°C तक।
दो काम:
- गलनांक कम करना।
- विद्युत चालकता बढ़ाना।
अतिरिक्त: CaF₂ भी डाला जाता — और कम गलनांक।
(c) Cathode और Anode
Cathode (-):
- कार्बन की लाइनिंग (स्टील बक्से के अंदर)।
- कार्बन ही — Cathode का काम।
Anode (+):
- कार्बन की छड़ें (ऊपर से उतारी गईं)।
- समय-समय पर बदले जाते — क्योंकि जलते रहते।
(d) कुल अभिक्रिया
विद्युत-अपघटन:
Cathode पर: Anode पर:
Anode पर निकली O₂ कार्बन से क्रिया:
यही कारण कार्बन Anode धीरे-धीरे जलते।
व्यावहारिक विवरण
ऊर्जा उपयोग:
- ~14-15 kWh प्रति kg Al।
- भारत में: राज्य-स्तरीय बिजली विद्युत-संयंत्र।
- पास के राज्यों में: Hindalco, NALCO, Vedanta।
उत्पादन:
- 1 kg Al → ~2 kg Al₂O₃ चाहिए।
- 1 kg Al₂O₃ → ~2 kg बॉक्साइट चाहिए।
- कुल: 1 kg Al → ~4 kg बॉक्साइट।
एक रोचक तथ्य
Hall-Héroult से पहले — Al इतना दुर्लभ था कि सोने से भी महंगा!
1855 की पेरिस प्रदर्शनी में Al — 'विश्व का सबसे महंगा धातु' घोषित।
Hall (USA) और Héroult (फ्रांस) — दोनों ने 1886 में, अलग-अलग, यह विधि खोजी।
तब से Al की कीमत — 200 गुना घटी।
आज: Al → सब जगह — विमान, गाड़ी, खिड़कियाँ, बर्तन।
[NCERT — महत्वपूर्ण]
उदाहरण 15: एक रोचक — स्टील का इतिहास
Fe निष्कर्षण से 'स्टील' तक — पूरी प्रक्रिया।
हल:
चरण 1: Blast Furnace से Pig Iron
Fe₂O₃ + 3CO → 2Fe + 3CO₂ (Blast Furnace में)
उत्पाद: Pig iron (कच्चा लोहा)
- 4% C
- अन्य अशुद्धियाँ (S, P, Si, Mn)
- भंगुर, कमज़ोर।
चरण 2: Pig Iron से Cast Iron
Pig iron को छोटी भट्टी में पिघलाकर — कुछ अशुद्धियाँ हटाएँ।
उत्पाद: Cast iron
- 2-4% C
- कठोर, परंतु भंगुर।
- उपयोग: रसोई के भारी बर्तन, पाइप।
चरण 3: Cast Iron से Wrought Iron
अधिक शुद्धीकरण — अधिकांश कार्बन हटाना।
उत्पाद: Wrought iron
- < 0.1% C
- मृदु, तन्य।
- उपयोग: गेट, ग्रिल।
चरण 4: स्टील का निर्माण
Cast iron को विशेष भट्टी में। कार्बन और अन्य अशुद्धियाँ नियंत्रित।
उत्पाद: स्टील (Steel)
- 0.2-2% C
- अति-कठोर और लचीला (दोनों)।
- आधुनिक निर्माण की रीढ़।
Bessemer प्रक्रिया (Steel निर्माण)
व्यवस्था:
- 'Bessemer converter' — अंडे के आकार का।
- पिघले pig iron में हवा की धारा।
अभिक्रियाएँ:
1. C + O₂ → CO₂ (कार्बन हटा) 2. Si + O₂ → SiO₂ 3. P → P₂O₅ 4. Mn → MnO
अशुद्धियाँ — स्लैग के रूप में। अंत में: नियंत्रित C वाला स्टील।
स्टील के प्रकार
| प्रकार | C % | उपयोग |
|---|---|---|
| Mild Steel | 0.2-0.3% | भवन, गाड़ियाँ |
| Medium Carbon Steel | 0.3-0.6% | रेल पटरियाँ |
| High Carbon Steel | 0.6-1.5% | औज़ार, चाकू |
| Stainless Steel | + Cr, Ni | बर्तन, रसोई |
स्टील में मिश्रधातु
स्टील = Fe + C + अन्य।
अन्य धातुएँ:
- Cr (स्टेनलेस): संक्षारण-प्रतिरोधी।
- Ni: टिकाऊ।
- Mn: कठोरता।
- W: उच्च-तापीय।
- V: टूल स्टील।
भारत में Fe उद्योग
प्रमुख कंपनियाँ:
- TATA Steel (जमशेदपुर)
- SAIL (Bhilai, Bokaro)
- JSW Steel
- Vizag Steel
भारत — विश्व का दूसरा सबसे बड़ा स्टील उत्पादक।
पूरी प्रक्रिया का सारांश
Fe₂O₃ (अयस्क)
↓ Blast Furnace + कोक + CaCO₃
Pig Iron (4% C)
↓ कुछ शुद्धीकरण
Cast Iron (2-4% C)
↓ अधिक शुद्धीकरण
Wrought Iron (<0.1% C) या Steel (0.2-2% C)
एक रोचक तथ्य
1856 में Bessemer की खोज — आधुनिक 'Industrial Revolution' की एक रीढ़। तब तक स्टील महंगा था। Bessemer के बाद — सस्ता स्टील — रेल, इमारतें, पुल।
[बोर्ड + सामान्य ज्ञान]
उदाहरण 16: एक समापन प्रश्न
(a) धातु निष्कर्षण के 3 चरण। (b) Al का निष्कर्षण — पूरा। (c) Fe निष्कर्षण की मुख्य अभिक्रिया। (d) क्यों Na को कार्बन से अपचयित नहीं किया जा सकता?
हल:
(a) निष्कर्षण के 3 चरण
चरण 1: सान्द्रण (Concentration)
- गैंग हटाना।
- विधियाँ: हस्त-चयन, गुरुत्वीय, चुंबकीय, फेन-प्लवन।
चरण 2: अपचयन (Reduction)
- अयस्क → धातु।
- विधियाँ: कार्बन से, विद्युत, स्व-अपचयन।
चरण 3: परिष्करण (Refining)
- शुद्धीकरण।
- मुख्य: विद्युत-अपघटनी।
(b) Al का निष्कर्षण
अयस्क: Bauxite (Al₂O₃·2H₂O)
1. सान्द्रण (Bayer):
2. विद्युत-अपघटन (Hall-Héroult):
- Al₂O₃ + क्रायोलाइट (Na₃AlF₆) → गलनांक 950°C।
- Cathode: ।
- Anode: ।
कुल: ।
(c) Fe निष्कर्षण की मुख्य अभिक्रिया
अयस्क: Fe₂O₃
Blast Furnace में:
अपचायक: CO (कोयले से बनी)।
यह मुख्य अभिक्रिया।
अन्य:
- (slag)
(d) क्यों Na को C से अपचयित नहीं?
सिद्धांत: अधिक क्रियाशील धातु — कम क्रियाशील को विस्थापित।
क्रियाशीलता: Na > C।
अतः: Na, C से अधिक प्रबलता से O₂ से जुड़ा। C, Na₂O से Na को मुक्त नहीं कर सकता।
यदि कोशिश करें: कोई अभिक्रिया नहीं।
उल्टा हो सकता: — पर यह Na निष्कर्षण नहीं।
सही विधि: पिघले NaCl का विद्युत-अपघटन (Down's cell)।
यहाँ विद्युत प्रवाह — Na को 'मुक्त' करने के लिए पर्याप्त ऊर्जा।
सारांश
अति-क्रियाशील धातुएँ (Na, K, Ca, Mg, Al) — विद्युत-अपघटन। मध्यम (Zn, Fe, Pb) — कार्बन से अपचयन। कम (Hg, Cu, Ag) — सीधे गर्म।
यह एक मूल नियम — पूरे अनुभाग का सार।
[बोर्ड में 5-अंक मिश्र प्रश्न]