निष्कर्षण और क्रियाशीलता का सम्बन्ध

धातु की क्रियाशीलता — उसके निष्कर्षण की विधि निर्धारित करती है।

तीन श्रेणियों में निष्कर्षण

1. कम क्रियाशील धातुएँ (श्रेणी के तल में):

  • Hg, Cu, Ag, Au
  • अति-सरल — सीधे गर्म करके या वायु में जलाकर

2. मध्यम क्रियाशील धातुएँ (श्रेणी के मध्य में):

  • Zn, Fe, Pb, Sn
  • मध्यम कठिन — कार्बन (कोयला) से अपचयन

3. अधिक क्रियाशील धातुएँ (श्रेणी के शीर्ष में):

  • Na, K, Ca, Mg, Al
  • अति-कठिन — विद्युत-अपघटन (electrolysis) से।

क्रियाशीलता और विधि — सारांश

   सक्रिय श्रेणी (top → bottom)

   K, Na, Ca, Mg, Al    →  विद्युत-अपघटन

   Zn, Fe, Pb, (Cu)     →  कार्बन से अपचयन

   Hg, Ag, (Au)         →  सीधे गर्म करके

सिद्धांत

अधिक क्रियाशील धातु = अधिक स्थिर यौगिक = अधिक ऊर्जा निष्कर्षण के लिए।

Na, K जैसी अति-क्रियाशील — कार्बन भी इन्हें अपचयित नहीं कर सकता। केवल विद्युत प्रवाह। Hg, Ag — कम स्थिर यौगिक — सरल गर्म करना ही काफी।

क्यों क्रियाशीलता मायने रखती है?

अधिक क्रियाशील धातु → अधिक प्रबलता से अधातु से जुड़ा। उसे 'मुक्त' करना — अधिक मेहनत।

कम क्रियाशील धातु → कमज़ोर बंध। 'मुक्त' करना — आसान।

निष्कर्षण की दो मुख्य प्रक्रियाएँ

1. भर्जन (Roasting): सल्फाइड अयस्क को वायु में गर्म करना2. निस्तापन (Calcination): कार्बोनेट/हाइड्रॉक्साइड को वायु के बिना गर्म करना

दोनों — अयस्क को ऑक्साइड में बदलते हैं। ऑक्साइड फिर अपचयित।

यह क्यों? क्योंकि ऑक्साइड का अपचयन — सरल

अभिक्रियाशीलता के अनुसार धातु निष्कर्षण का प्रवाह चित्र

आरेख के अंग्रेज़ी लेबलों के हिन्दी अर्थ:

English (in image) हिन्दी
Metals of high reactivity उच्च सक्रियता वाली धातुएँ
Electrolysis of molten ore गलित अयस्क का विद्युत अपघटन
Metals of medium reactivity मध्यम सक्रियता वाली धातुएँ
Roasting / Calcination भर्जन / निस्तापन
Reduction (with carbon) अपचयन (कार्बन द्वारा)
Metals of low reactivity निम्न सक्रियता वाली धातुएँ
Found in free state मुक्त अवस्था में प्राप्त

भर्जन और निस्तापन

अयस्क को ऑक्साइड में बदलने की दो विधियाँ।

भर्जन (Roasting)

सल्फाइड अयस्क को वायु की उपस्थिति में गर्म करना।

सिद्धांत: अधिक ऑक्सीजन — अधिक तीव्र ऑक्सीकरण।

उदाहरण: ZnS का भर्जन:

2ZnS+3O2Δ2ZnO+2SO22ZnS + 3O_2 \xrightarrow{\Delta} 2ZnO + 2SO_2\uparrow

ZnS → ZnO (ऑक्साइड) SO₂ — हानिकारक गैस, वातावरण में निकलती।

अन्य उदाहरण:

Cu पाइराइट्स का भर्जन: 2Cu2S+3O2Δ2Cu2O+2SO22Cu_2S + 3O_2 \xrightarrow{\Delta} 2Cu_2O + 2SO_2

HgS का भर्जन: 2HgS+3O2Δ2HgO+2SO22HgS + 3O_2 \xrightarrow{\Delta} 2HgO + 2SO_2

PbS का भर्जन: 2PbS+3O2Δ2PbO+2SO22PbS + 3O_2 \xrightarrow{\Delta} 2PbO + 2SO_2

निस्तापन (Calcination)

कार्बोनेट/हाइड्रॉक्साइड को वायु की अनुपस्थिति (या सीमित) में गर्म करना।

सिद्धांत: अपघटन — CO₂ या H₂O निकलता है, ऑक्साइड बचता।

उदाहरण: Calamine (ZnCO₃) का निस्तापन:

ZnCO3ΔZnO+CO2ZnCO_3 \xrightarrow{\Delta} ZnO + CO_2\uparrow

अन्य उदाहरण:

Limestone (CaCO₃) का निस्तापन: CaCO3ΔCaO+CO2CaCO_3 \xrightarrow{\Delta} CaO + CO_2

Magnesite (MgCO₃) का निस्तापन: MgCO3ΔMgO+CO2MgCO_3 \xrightarrow{\Delta} MgO + CO_2

Bauxite (Al(OH)₃) का निस्तापन: 2Al(OH)3ΔAl2O3+3H2O2Al(OH)_3 \xrightarrow{\Delta} Al_2O_3 + 3H_2O

तुलना — भर्जन vs निस्तापन

गुण भर्जन निस्तापन
अयस्क सल्फाइड कार्बोनेट/हाइड्रॉक्साइड
वायु हाँ (अधिक) नहीं (या सीमित)
उत्पाद ऑक्साइड + SO₂ ऑक्साइड + CO₂/H₂O
उदाहरण ZnS → ZnO ZnCO₃ → ZnO

क्यों दोनों ज़रूरी?

मूल नियम: सल्फाइड और कार्बोनेट — अपचयन के लिए सीधे प्रयोग नहीं। पहले उन्हें ऑक्साइड में बदलें — फिर ही कार्बन या विद्युत से अपचयन सरल।

अगला चरण

अब ऑक्साइड तैयार है — अब इसे धातु में बदलना है। यह — क्रियाशीलता पर निर्भर।

कम क्रियाशील धातुओं का निष्कर्षण

Hg, Cu, Ag — श्रेणी के तल पर। इनके यौगिक — कम स्थिर। सरल विधि से निष्कर्षण।

पारा (Hg) का निष्कर्षण

अयस्क: सिंदूर (Cinnabar, HgS)

चरण 1: भर्जन 2HgS+3O2Δ2HgO+2SO22HgS + 3O_2 \xrightarrow{\Delta} 2HgO + 2SO_2

चरण 2: HgO का अपघटन (और गर्म करें): 2HgOΔ2Hg+O22HgO \xrightarrow{\Delta} 2Hg + O_2

यानी — HgO गर्म करने पर खुद ही Hg में बदल जाता है।

यह HgO का गुण — कम स्थिर। आसानी से अपघटित।

यही — एक 'अति-सरल' निष्कर्षण।

कॉपर (Cu) का निष्कर्षण

अयस्क: कॉपर पाइराइट्स (CuFeS₂) या क्यूप्राइट (Cu₂O)

Cu₂S से (एक सरल विधि):

यदि Cu₂O और Cu₂S दोनों उपलब्ध हों — स्व-अपचयन (self-reduction):

2Cu2O+Cu2SΔ6Cu+SO22Cu_2O + Cu_2S \xrightarrow{\Delta} 6Cu + SO_2\uparrow

यानी — एक अयस्क ने दूसरे को अपचयित किया! 'Self-reduction' — एक रोचक प्रक्रिया।

सिल्वर (Ag) का निष्कर्षण

अयस्क: Argentite (Ag₂S)

आधुनिक विधि — साइनाइड लीचिंग:

1. Ag₂S को NaCN विलयन में: Ag2S+4NaCN2Na[Ag(CN)2]+Na2SAg_2S + 4NaCN \rightarrow 2Na[Ag(CN)_2] + Na_2S

2. Zn से विस्थापन: 2Na[Ag(CN)2]+ZnNa2[Zn(CN)4]+2Ag2Na[Ag(CN)_2] + Zn \rightarrow Na_2[Zn(CN)_4] + 2Ag\downarrow

Ag अवक्षेप — शुद्ध रूप में।

एक रोचक तथ्य

Hg, Cu, Ag — तीनों के निष्कर्षण की विधियाँ बहुत सरल हैं। यही कारण कि — ये धातुएँ हजारों साल पहले से जानी जाती थीं। 'पाषाण युग' के बाद — 'तांब्र युग' (Copper Age) सीधे आया! Fe, Al — हाल ही में (पिछले 200 साल)।

मध्यम क्रियाशील धातुओं का निष्कर्षण — कार्बन से अपचयन

Zn, Fe, Pb — श्रेणी के मध्य में। अयस्क → ऑक्साइड → कार्बन से अपचयन → धातु।

मूल सिद्धांत

कार्बन — एक प्रबल अपचायक। यह ऑक्सीजन को अपनी ओर खींचता। 'धातु ऑक्साइड' से धातु को मुक्त करता।

सामान्य अभिक्रिया

धातु ऑक्साइड+Cधातु+CO2\text{धातु ऑक्साइड} + C \rightarrow \text{धातु} + CO_2

या

धातु ऑक्साइड+COधातु+CO2\text{धातु ऑक्साइड} + CO \rightarrow \text{धातु} + CO_2

Fe का निष्कर्षण — Blast Furnace में

अयस्क: Hematite (Fe₂O₃)

चरण 1: सान्द्रण (अनुभाग 6 — गुरुत्वीय)

चरण 2: निस्तापन/भर्जन अशुद्धियाँ हटाने के लिए अयस्क को गर्म।

चरण 3: अपचयन (Blast Furnace):

ऊँची, बेलनाकार भट्टी। ऊपर से डालें: अयस्क + कोयला (कोक) + चूना-पत्थर। नीचे से: गर्म हवा।

तीन क्षेत्रों में अभिक्रियाएँ:

1. ऊपरी क्षेत्र (~500°C): CaCO3ΔCaO+CO2CaCO_3 \xrightarrow{\Delta} CaO + CO_2

2. मध्य क्षेत्र (~1000°C): Fe2O3+3CO2Fe+3CO2Fe_2O_3 + 3CO \rightarrow 2Fe + 3CO_2

3. निचला क्षेत्र (~1500°C): C+O2CO2C + O_2 \rightarrow CO_2 CO2+C2COCO_2 + C \rightarrow 2CO

CaO + अशुद्धि (SiO₂): CaO+SiO2CaSiO3 (slag)CaO + SiO_2 \rightarrow CaSiO_3 \text{ (slag)}

यानी CaCO₃ — फ्लक्स के रूप में काम।

अंतिम उत्पाद:

  • नीचे से: पिघला Fe (Pig iron — pig लोहा)।
  • ऊपर: slag (CaSiO₃) — अलग।

Zn का निष्कर्षण

अयस्क: Zinc blende (ZnS) या Calamine (ZnCO₃)

चरण 1: ZnS का भर्जन: 2ZnS+3O2Δ2ZnO+2SO22ZnS + 3O_2 \xrightarrow{\Delta} 2ZnO + 2SO_2

(या ZnCO₃ का निस्तापन: ZnCO₃ → ZnO + CO₂)

चरण 2: ZnO का कार्बन से अपचयन: ZnO+CΔZn+COZnO + C \xrightarrow{\Delta} Zn + CO\uparrow

Zn धातु बनी।

Pb का निष्कर्षण

अयस्क: Galena (PbS)

चरण 1: PbS का भर्जन: 2PbS+3O2Δ2PbO+2SO22PbS + 3O_2 \xrightarrow{\Delta} 2PbO + 2SO_2

चरण 2: PbO का अपचयन: PbO+CΔPb+COPbO + C \xrightarrow{\Delta} Pb + CO\uparrow

फ्लक्स और स्लैग — फिर से

अयस्क के साथ छिपी अशुद्धियाँ:

  • अम्लीय गैंग (SiO₂) → क्षारकीय फ्लक्स (CaCO₃) से।
  • क्षारकीय गैंग (CaO) → अम्लीय फ्लक्स (SiO₂) से।

फ्लक्स + गैंग → स्लैग (slag) — पिघली अवस्था में, अलग कर दिया।

अधिक क्रियाशील धातुओं का निष्कर्षण — विद्युत-अपघटन

Na, K, Ca, Mg, Al — श्रेणी के शीर्ष पर। कार्बन से अपचयन — पर्याप्त नहीं। केवल विद्युत-अपघटन।

सिद्धांत

पिघले हुए ऑक्साइड या क्लोराइड में विद्युत प्रवाहित। Cathode पर — धातु जमा। Anode पर — अधातु निकले।

Al का निष्कर्षण — Hall-Héroult प्रक्रिया

अयस्क: Bauxite (Al2O32H2OAl_2O_3 \cdot 2H_2O)

चरण 1: सान्द्रण (Bayer Process) (अनुभाग 6) अंत में शुद्ध Al₂O₃।

चरण 2: विद्युत-अपघटन (Hall-Héroult):

Al₂O₃ का गलनांक बहुत उच्च (~2050°C)। अकेले इसे पिघलाना — अति-महंगा।

समाधान: Al₂O₃ को क्रायोलाइट (Na₃AlF₆) में घोलें। अब गलनांक — ~950°C। बहुत सस्ता।

व्यवस्था:

  • एक स्टील का बक्सा — कार्बन से लाइन।
  • कार्बन ही Cathode (-)।
  • ऊपर से कार्बन की छड़ें — Anode (+)।
  • विलयन: Al₂O₃ + Na₃AlF₆ + CaF₂ (पिघले)।

अभिक्रियाएँ:

Cathode (-) पर: Al3++3eAl(l)Al^{3+} + 3e^- \rightarrow Al(l)

पिघला Al — नीचे जमा।

Anode (+) पर: 2O2O2+4e2O^{2-} \rightarrow O_2 + 4e^-

O₂ निकलती — कार्बन से क्रिया करके CO/CO₂।

यही कारण कार्बन Anode धीरे-धीरे जलते — समय-समय पर बदले जाते।

कुल अभिक्रिया: 2Al2O3विद्युत4Al+3O22Al_2O_3 \xrightarrow{\text{विद्युत}} 4Al + 3O_2

Na का निष्कर्षण — Down's Cell

अयस्क: Rock salt (NaCl)

चरण: पिघले NaCl का विद्युत-अपघटन

पिघले NaCl में CaCl₂ डालें — गलनांक कम (800°C → 600°C)।

अभिक्रियाएँ:

Cathode पर: Na++eNaNa^+ + e^- \rightarrow Na

Anode पर: 2ClCl2+2e2Cl^- \rightarrow Cl_2 + 2e^-

यानी — Na धातु + Cl₂ गैस।

Ca का निष्कर्षण

पिघले CaCl₂ का विद्युत-अपघटन।

क्यों जलीय विलयन से नहीं?

अति-क्रियाशील धातुओं (Na, K, Ca) के जलीय विलयन से विद्युत-अपघटन — Na/K नहीं बनेगा!

क्यों? Cathode पर — H⁺ (जल से) पहले अपचयित होगा (H₂ बनेगा)।

इसलिए — पिघले अयस्क से ही।

सारांश तालिका — निष्कर्षण की विधियाँ

धातु अयस्क विधि
Hg HgS सिर्फ गर्म करके
Cu Cu₂S स्व-अपचयन
Ag Ag₂S साइनाइड
Pb PbS भर्जन + कार्बन
Zn ZnS/ZnCO₃ भर्जन/निस्तापन + कार्बन
Fe Fe₂O₃ Blast furnace + कार्बन
Al Al₂O₃ Hall-Héroult (विद्युत)
Mg MgCl₂ विद्युत-अपघटन
Na NaCl Down's cell (विद्युत)
K KCl विद्युत-अपघटन

मूल सिद्धांत

'क्रियाशीलता का स्तर' = निष्कर्षण की कठिनाई।

अधिक क्रियाशील = विद्युत-अपघटन। मध्यम = कार्बन से अपचयन। कम क्रियाशील = सीधे गर्म करके।

[बोर्ड महत्वपूर्ण] यह तालिका — हर साल बोर्ड में 5-अंक प्रश्न।

🧠 स्मृति कैप्सूल (Memory Capsule)

बोर्ड परीक्षा से ठीक पहले एक नज़र में।

1. क्रियाशीलता और निष्कर्षण विधि

श्रेणी धातुएँ विधि
उच्च K, Na, Ca, Mg, Al विद्युत-अपघटन
मध्यम Zn, Fe, Pb कार्बन से अपचयन
निम्न Hg, Cu, Ag, Au सीधे गर्म करके

2. भर्जन vs निस्तापन

गुण भर्जन निस्तापन
अयस्क सल्फाइड कार्बोनेट
वायु हाँ नहीं
उदाहरण ZnS → ZnO + SO₂ ZnCO₃ → ZnO + CO₂

3. प्रसिद्ध अभिक्रियाएँ

ZnS का भर्जन: 2ZnS+3O22ZnO+2SO22ZnS + 3O_2 \rightarrow 2ZnO + 2SO_2

ZnCO₃ का निस्तापन: ZnCO3ZnO+CO2ZnCO_3 \rightarrow ZnO + CO_2

ZnO का कार्बन से अपचयन: ZnO+CZn+COZnO + C \rightarrow Zn + CO

Fe निष्कर्षण: Fe2O3+3CO2Fe+3CO2Fe_2O_3 + 3CO \rightarrow 2Fe + 3CO_2

HgO का अपघटन: 2HgOΔ2Hg+O22HgO \xrightarrow{\Delta} 2Hg + O_2

4. Al निष्कर्षण (Hall-Héroult)

  • विद्युत-अपघटन: Al₂O₃ + क्रायोलाइट (Na₃AlF₆)।
  • गलनांक 950°C।
  • Cathode: Al3++3eAlAl^{3+} + 3e^- \rightarrow Al
  • Anode: 2O2O2+4e2O^{2-} \rightarrow O_2 + 4e^-

5. Na निष्कर्षण (Down's cell)

  • पिघले NaCl + CaCl₂।
  • Cathode: Na।
  • Anode: Cl₂।

6. Blast Furnace में Fe

  • अयस्क: Fe₂O₃
  • कोयला (कोक) + CaCO₃ + गर्म हवा।
  • मुख्य अभिक्रिया: Fe2O3+3CO2Fe+3CO2Fe_2O_3 + 3CO \rightarrow 2Fe + 3CO_2
  • फ्लक्स (CaO) + गैंग (SiO₂) → स्लैग (CaSiO₃)।

7. क्यों कार्बन Na को अपचयित नहीं कर सकता?

Na, C से अधिक क्रियाशील। C के लिए O₂ छोड़ने के लिए — Na को मेहनत लगती। उत्तर: विद्युत-अपघटन।

8. बोर्ड के 'सुनहरे' प्रश्न

  1. Fe निष्कर्षण — Blast Furnace।
  2. Al निष्कर्षण — Hall-Héroult।
  3. Na निष्कर्षण — क्यों विद्युत-अपघटन?
  4. भर्जन और निस्तापन में अंतर।
  5. कम क्रियाशील धातुओं की निष्कर्षण विधि।

अंतिम सूत्र: 'क्रियाशीलता ↑ → निष्कर्षण कठिनाई ↑ → ऊर्जा ↑।'

हल किए गए उदाहरण

उदाहरण 1: NCERT — निष्कर्षण की तीन श्रेणियाँ

धातुओं का निष्कर्षण उनकी क्रियाशीलता पर कैसे निर्भर करता है? तीन श्रेणियों में बाँटें।

हल:

मूल सिद्धांत

अधिक क्रियाशील धातु → अधिक स्थिर यौगिक → अधिक ऊर्जा निष्कर्षण के लिए।

तीन श्रेणियाँ

1. अधिक क्रियाशील (श्रेणी का शीर्ष)

धातुएँ: K, Na, Ca, Mg, Al

विधि: विद्युत-अपघटन।

क्यों? कार्बन भी इन्हें अपचयित नहीं कर सकता। केवल विद्युत प्रवाह — पर्याप्त ऊर्जा।

उदाहरण:

  • Al: Hall-Héroult प्रक्रिया (Al₂O₃ + क्रायोलाइट)
  • Na: Down's cell (पिघला NaCl)
  • Mg: पिघला MgCl₂

2. मध्यम क्रियाशील (श्रेणी का मध्य)

धातुएँ: Zn, Fe, Pb, Sn, (Cu)

विधि: अयस्क → ऑक्साइड → कार्बन से अपचयन।

चरण:

  1. भर्जन/निस्तापन (अयस्क → ऑक्साइड)।
  2. कार्बन से अपचयन।

उदाहरण: Zn:

  • 2ZnS+3O22ZnO+2SO22ZnS + 3O_2 \rightarrow 2ZnO + 2SO_2 (भर्जन)
  • ZnO+CZn+COZnO + C \rightarrow Zn + CO (अपचयन)

उदाहरण: Fe:

  • Fe2O3+3CO2Fe+3CO2Fe_2O_3 + 3CO \rightarrow 2Fe + 3CO_2 (Blast Furnace में)

3. कम क्रियाशील (श्रेणी का तल)

धातुएँ: Hg, Cu, Ag, Au

विधि: सीधे गर्म करके या स्व-अपचयन।

क्यों? यौगिक कम स्थिर — गर्मी से ही धातु बनती।

उदाहरण: Hg:

  • 2HgS+3O22HgO+2SO22HgS + 3O_2 \rightarrow 2HgO + 2SO_2
  • 2HgO2Hg+O22HgO \rightarrow 2Hg + O_2

उदाहरण: Au, Pt:

  • मुक्त रूप में पाए — सिर्फ चुनना और शुद्ध करना।

सारांश तालिका

श्रेणी धातुएँ विधि
उच्च K-Al विद्युत-अपघटन
मध्यम Zn, Fe, Pb कार्बन से अपचयन
कम Hg, Cu, Ag, Au सीधे/प्राकृतिक

एक रोचक बिंदु

यही कारण कि:

  • 'पाषाण युग' के बाद तांब्र युग सीधे आया (Cu — सरल निष्कर्षण)।
  • लोहे का युग — Cu के बाद (Fe निष्कर्षण कठिन)।
  • Al — हाल ही में (1825 में), क्योंकि विद्युत-अपघटन तकनीक ज़रूरी।

[NCERT पाठ्यपुस्तक — मूलभूत]

उदाहरण 2: NCERT — भर्जन और निस्तापन

भर्जन और निस्तापन क्या हैं? रासायनिक अभिक्रियाओं के साथ अंतर बताएँ।

हल:

भर्जन (Roasting)

परिभाषा: सल्फाइड अयस्क को वायु की उपस्थिति में गर्म करना — ताकि वह ऑक्साइड में बदल जाए।

सामान्य रूप: 2MS+3O2Δ2MO+2SO22MS + 3O_2 \xrightarrow{\Delta} 2MO + 2SO_2

उदाहरण:

1. Zinc blende (ZnS): 2ZnS+3O2Δ2ZnO+2SO22ZnS + 3O_2 \xrightarrow{\Delta} 2ZnO + 2SO_2

2. Cinnabar (HgS): 2HgS+3O2Δ2HgO+2SO22HgS + 3O_2 \xrightarrow{\Delta} 2HgO + 2SO_2

3. Galena (PbS): 2PbS+3O2Δ2PbO+2SO22PbS + 3O_2 \xrightarrow{\Delta} 2PbO + 2SO_2

4. Iron pyrites (FeS₂): 4FeS2+11O2Δ2Fe2O3+8SO24FeS_2 + 11O_2 \xrightarrow{\Delta} 2Fe_2O_3 + 8SO_2

निस्तापन (Calcination)

परिभाषा: कार्बोनेट या हाइड्रॉक्साइड अयस्क को वायु की अनुपस्थिति (या सीमित) में गर्म करना — ताकि वह ऑक्साइड में बदल जाए।

सामान्य रूप: MCO3ΔMO+CO2MCO_3 \xrightarrow{\Delta} MO + CO_2\uparrow

या

M(OH)xΔऑक्साइड+H2OM(OH)_x \xrightarrow{\Delta} \text{ऑक्साइड} + H_2O\uparrow

उदाहरण:

1. Calamine (ZnCO₃): ZnCO3ΔZnO+CO2ZnCO_3 \xrightarrow{\Delta} ZnO + CO_2

2. Limestone (CaCO₃): CaCO3ΔCaO+CO2CaCO_3 \xrightarrow{\Delta} CaO + CO_2

3. Magnesite (MgCO₃): MgCO3ΔMgO+CO2MgCO_3 \xrightarrow{\Delta} MgO + CO_2

4. Bauxite hydroxide (Al(OH)₃): 2Al(OH)3ΔAl2O3+3H2O2Al(OH)_3 \xrightarrow{\Delta} Al_2O_3 + 3H_2O

मुख्य अंतर

गुण भर्जन निस्तापन
अयस्क प्रकार सल्फाइड कार्बोनेट / हाइड्रॉक्साइड
वायु हाँ (अधिक) नहीं (या सीमित)
उत्पाद ऑक्साइड + SO₂ ऑक्साइड + CO₂ या H₂O
गैस SO₂ (विषाक्त) CO₂ (अपेक्षाकृत हानिरहित)

क्यों दोनों ज़रूरी?

अपचयन सीधे सल्फाइड या कार्बोनेट से कठिन। ऑक्साइड का अपचयन — सरल।

अतः पहले इन अयस्कों को ऑक्साइड में बदलें — फिर अपचयन करें।

एक रोचक बिंदु

SO₂ — पर्यावरण समस्या। भर्जन की वायु में निकली SO₂ — अम्लीय वर्षा का कारण। आधुनिक उद्योग — SO₂ को पकड़कर H2SO4H_2SO_4 में बदल देते। यानी 'अपशिष्ट' से 'मूल्यवान उत्पाद'।

[NCERT — हर साल पूछा जाता]

उदाहरण 3: NCERT — Fe का निष्कर्षण

Blast Furnace में Fe का निष्कर्षण समझाएँ। मुख्य अभिक्रियाएँ लिखें।

हल:

Blast Furnace (विस्तृत)

व्यवस्था:

  • ऊँची, बेलनाकार भट्टी (~25-30 m)।
  • ऊपर: 'चार्ज' (अयस्क + कोयला + चूना-पत्थर) डालें।
  • नीचे: गर्म हवा प्रवाहित।

चार्ज (Charge) में क्या?

1. अयस्क: Fe₂O₃ (Hematite) — सान्द्रित। 2. कोक (Coke): शुद्ध कार्बन — ईंधन और अपचायक। 3. चूना-पत्थर (Limestone): CaCO₃ — फ्लक्स।

तीन क्षेत्रों में अभिक्रियाएँ

क्षेत्र 1: निचला (~1500-2000°C) — दहन क्षेत्र

1. कोयला + हवा: C+O2CO2+ऊष्माC + O_2 \rightarrow CO_2 + \text{ऊष्मा}

2. CO₂ + और कोयला (उच्च ताप पर): CO2+C2COCO_2 + C \rightarrow 2CO

CO — मुख्य अपचायक।

क्षेत्र 2: मध्य (~1000°C) — अपचयन क्षेत्र

Fe का अपचयन (CO से): Fe2O3+3CO2Fe+3CO2Fe_2O_3 + 3CO \rightarrow 2Fe + 3CO_2

यह मुख्य अभिक्रिया — Fe निकलता है।

अन्य अभिक्रियाएँ: Fe3O4+4CO3Fe+4CO2Fe_3O_4 + 4CO \rightarrow 3Fe + 4CO_2

क्षेत्र 3: ऊपरी (~500°C) — पूर्व-तैयारी

1. CaCO₃ का अपघटन: CaCO3CaO+CO2CaCO_3 \rightarrow CaO + CO_2

2. CaO + अशुद्धि (SiO₂): CaO+SiO2CaSiO3 (slag)CaO + SiO_2 \rightarrow CaSiO_3 \text{ (slag)}

यानी CaO — फ्लक्स के रूप में, गैंग (SiO₂) से जुड़ता।

अंतिम उत्पाद

भट्टी के निचे:

  • पिघला Fe (नीचे, भारी)।
  • पिघला slag (CaSiO₃) (ऊपर, हल्का)।

दोनों — अलग-अलग छिद्रों से बाहर।

Pig Iron — पहला उत्पाद

Blast Furnace से निकला Fe — 'pig iron' (कच्चा लोहा)। 4% C + अन्य अशुद्धियाँ।

इसे आगे शुद्ध करना — 'cast iron' या 'wrought iron'।

एक मुख्य चित्र (शब्दों में):

  ऊपर — चार्ज (अयस्क + कोयला + चूना)
   ↓
  500°C — CaCO₃ → CaO + CO₂
   ↓
  1000°C — Fe₂O₃ + 3CO → 2Fe + 3CO₂
   ↓ 
  1500°C — C + O₂ → CO₂; CO₂ + C → 2CO
   ↓
  नीचे — पिघला Fe (निकालें)
           पिघला slag (अलग)

  गर्म हवा अंदर ←

सारांश

Blast Furnace = आधुनिक स्टील उद्योग की रीढ़। भारत में: Tata Steel, SAIL, Bhilai Steel Plant — सब Blast Furnace।

[NCERT — हर साल बोर्ड में 5-अंक]

उदाहरण 4: NCERT — Al का निष्कर्षण (Hall-Héroult)

Aluminium का निष्कर्षण विस्तार से बताएँ।

हल:

अयस्क

Bauxite (Al2O32H2OAl_2O_3 \cdot 2H_2O)

अशुद्धियाँ: Fe₂O₃, SiO₂, TiO₂

चरण 1: सान्द्रण — Bayer Process (अनुभाग 6)

यहाँ संक्षेप में:

1. NaOH में Al₂O₃ घुलना: Al2O3+2NaOH2NaAlO2+H2OAl_2O_3 + 2NaOH \rightarrow 2NaAlO_2 + H_2O

2. छानें — अशुद्धियाँ हटाएँ।

3. NaAlO₂ से Al(OH)₃: NaAlO2+2H2ONaOH+Al(OH)3NaAlO_2 + 2H_2O \rightarrow NaOH + Al(OH)_3\downarrow

4. Al(OH)₃ को गर्म करें (निस्तापन): 2Al(OH)3ΔAl2O3+3H2O2Al(OH)_3 \xrightarrow{\Delta} Al_2O_3 + 3H_2O

अब शुद्ध Al₂O₃।

चरण 2: विद्युत-अपघटन — Hall-Héroult

समस्या: Al₂O₃ का गलनांक ~2050°C। बहुत महंगा।

समाधान: Al₂O₃ को क्रायोलाइट (Na₃AlF₆) में घोलें। अब गलनांक — 950°C।

व्यवस्था:

  • स्टील का बक्सा — कार्बन की लाइनिंग।
  • कार्बन लाइनिंग = Cathode (-)।
  • ऊपर से कार्बन की छड़ें = Anode (+)।
  • विलयन: पिघला (Al₂O₃ + Na₃AlF₆ + CaF₂)।

अभिक्रियाएँ:

Al₂O₃ → 2Al³⁺ + 3O²⁻ (पिघले अवस्था में)

Cathode (-) पर: Al3++3eAl(l)Al^{3+} + 3e^- \rightarrow Al(l)

पिघला Al — नीचे जमा। बक्से के तल से निकाला।

Anode (+) पर: 2O2O2+4e2O^{2-} \rightarrow O_2 + 4e^-

O₂ निकलती — पर अधिक ताप पर कार्बन से क्रिया: C+O2CO2C + O_2 \rightarrow CO_2

यही कारण कार्बन Anode धीरे-धीरे जलते। समय-समय पर बदले जाते।

कुल अभिक्रिया: 2Al2O3विद्युत4Al+3O22Al_2O_3 \xrightarrow{\text{विद्युत}} 4Al + 3O_2

महत्वपूर्ण बिंदु

1. क्रायोलाइट का काम:

  • गलनांक कम करना (2050 → 950°C)।
  • विद्युत चालकता बढ़ाना।

2. CaF₂ का काम:

  • गलनांक और कम करना।
  • विलयन को स्थिर रखना।

3. ऊर्जा:

  • Al निष्कर्षण — अति-ऊर्जा-गहन।
  • 1 kg Al ≈ 14-15 kWh विद्युत।
  • यही कारण — Al का पुनर्चक्रण (recycling) महत्वपूर्ण।

एक रोचक तथ्य

Al — पृथ्वी की पपड़ी की सबसे प्रचुर धातु (~8%)। फिर भी, Al का व्यावसायिक उत्पादन — 1886 तक संभव नहीं था।

Hall (USA) और Héroult (फ्रांस) — दोनों ने एक ही समय (1886) में अलग-अलग यह विधि खोजी। दोनों के सम्मान में — 'Hall-Héroult' प्रक्रिया।

[NCERT — बोर्ड में 5-अंक]

उदाहरण 5: NCERT — कम क्रियाशील धातुओं का निष्कर्षण

Hg और Cu के निष्कर्षण की विधियाँ बताएँ।

हल:

Hg का निष्कर्षण

अयस्क: Cinnabar (HgS)

चरण 1: भर्जन

2HgS(s)+3O2(g)Δ2HgO(s)+2SO2(g)2HgS(s) + 3O_2(g) \xrightarrow{\Delta} 2HgO(s) + 2SO_2(g)

HgS पहले HgO में बदला।

चरण 2: HgO का स्व-अपघटन

HgO अधिक ताप पर — स्वतः अपघटित होता:

2HgO(s)Δ2Hg(l)+O2(g)2HgO(s) \xrightarrow{\Delta} 2Hg(l) + O_2(g)

यानी कोई बाहरी अपचायक की ज़रूरत नहीं! HgO स्वयं ही अस्थिर।

अंतिम उत्पाद: पिघला Hg — सीधे एकत्र किया जाता।

एक रोचक प्रदर्शन — एक चरण में

यदि भट्टी का तापमान बहुत अधिक रखा जाए — दोनों चरण एक साथ: HgS+O2ΔHg+SO2HgS + O_2 \xrightarrow{\Delta} Hg + SO_2

यानी HgS से सीधे Hg!

Cu का निष्कर्षण

अयस्क: Copper pyrites (CuFeS₂)

चरण 1: सान्द्रण (फेन-प्लवन)

चरण 2: भर्जन

2CuFeS2+3O22Cu2S+2FeO+2SO22CuFeS_2 + 3O_2 \rightarrow 2Cu_2S + 2FeO + 2SO_2

Cu₂S और FeO बने।

चरण 3: फ्लक्स के साथ गलाना

Cu₂S और FeO + SiO₂ (फ्लक्स):

FeO+SiO2FeSiO3 (slag)FeO + SiO_2 \rightarrow FeSiO_3 \text{ (slag)}

Fe slag के रूप में अलग। Cu₂S — 'matte' के रूप में नीचे।

चरण 4: स्व-अपचयन

'Matte' (Cu₂S) को हवा में गर्म करें:

1. कुछ Cu₂S → Cu₂O: 2Cu2S+3O22Cu2O+2SO22Cu_2S + 3O_2 \rightarrow 2Cu_2O + 2SO_2

2. फिर Cu₂O + Cu₂S (बचा): 2Cu2O+Cu2S6Cu+SO22Cu_2O + Cu_2S \rightarrow 6Cu + SO_2

यानी — एक भाग ने दूसरे को अपचयित किया! यह 'स्व-अपचयन (self-reduction)'

क्यों स्व-अपचयन?

Cu की क्रियाशीलता — मध्यम/कम। यौगिक स्थिर नहीं। S से एक 'स्वाभाविक अपचायक' मिल जाता।

सारांश

धातु अयस्क विधि
Hg HgS भर्जन + स्व-अपघटन
Cu CuFeS₂ भर्जन + स्व-अपचयन
Ag Ag₂S साइनाइड + Zn विस्थापन

अंतिम सीख

'कम क्रियाशील' = 'सरल विधि'। यही कारण कि — Cu, Hg, Ag — हजारों साल से ज्ञात।

[NCERT — महत्वपूर्ण]

उदाहरण 6: NCERT — Na का निष्कर्षण

Na का निष्कर्षण क्यों जलीय विलयन के विद्युत-अपघटन से नहीं होता? सही विधि क्या है?

हल:

क्यों जलीय NaCl से नहीं?

यदि NaCl जलीय विलयन का विद्युत-अपघटन करें:

Cathode पर — दो विकल्प:

  • Na++eNaNa^+ + e^- \rightarrow Na (Na का अपचयन)
  • 2H2O+2eH2+2OH2H_2O + 2e^- \rightarrow H_2 + 2OH^- (जल का अपचयन)

कौन-सा होगा?

क्रियाशीलता श्रेणी देखें: Na (अति-क्रियाशील) > H₂O

नियम: Cathode पर — कम क्रियाशील आयन/अणु अपचयित होगा।

अतः — H₂O ही अपचयित। Na नहीं।

यानी — जलीय NaCl से H₂ निकलेगा, Na नहीं।

सही विधि — Down's Cell

पिघले NaCl का विद्युत-अपघटन।

व्यवस्था:

  • एक स्टील का बक्सा।
  • विलयन: पिघला NaCl + CaCl₂।
  • क्यों CaCl₂? NaCl का गलनांक 800°C कम करने के लिए (~600°C)।
  • Cathode: स्टील वलय (Na एकत्र करने के लिए)।
  • Anode: कार्बन छड़ (Cl₂ निकलने के लिए)।

अभिक्रियाएँ:

Cathode (-) पर: Na++eNa(l)Na^+ + e^- \rightarrow Na(l)

पिघला Na — हल्का, ऊपर तैरता। एक ट्यूब से बाहर।

Anode (+) पर: 2ClCl2+2e2Cl^- \rightarrow Cl_2 + 2e^-

Cl₂ गैस — अलग ट्यूब से बाहर।

कुल: 2NaCl(l)विद्युत2Na(l)+Cl2(g)2NaCl(l) \xrightarrow{\text{विद्युत}} 2Na(l) + Cl_2(g)

सावधानियाँ

*1. Na और Cl₂ — एक-दूसरे से दूर रखे जाएँ। *(अन्यथा वापस NaCl बन जाएँ — और विस्फोट।)* 2. वायुरुद्ध बक्सा — Na को वायु से बचाए। 3. पिघले Na को केरोसिन में डालें — संरक्षण।

तुलना — पिघले vs जलीय

गुण पिघला NaCl जलीय NaCl
विद्युत-अपघटन Na + Cl₂ H₂ + Cl₂ + NaOH
उत्पाद Na धातु NaOH
गलनांक 800°C (CaCl₂ से कम) कमरे का ताप
उपयोग Na निष्कर्षण क्लोर-एल्कली प्रक्रिया

व्यापक सिद्धांत

अति-क्रियाशील धातुओं (K, Na, Ca, Mg, Al) के लिए: केवल पिघले अयस्क के विद्युत-अपघटन से निष्कर्षण।

मध्यम (Zn, Fe, Pb) के लिए: कार्बन से अपचयन।

एक रोचक तथ्य

Na का जलीय विद्युत-अपघटन — अध्याय 2 की 'क्लोर-एल्कली प्रक्रिया'। उसमें Na नहीं, NaOH निकलता। यह प्रक्रिया — व्यावसायिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण।

[NCERT — हर साल बोर्ड में]

उदाहरण 7: NCERT — कौन-सी विधि?

निम्न धातुओं के निष्कर्षण की उपयुक्त विधि बताएँ:

(a) Mg, (b) Cu, (c) Au, (d) Zn, (e) Pb

हल:

पहले क्रियाशीलता श्रेणी देखें: K > Na > Ca > Mg > Al > Zn > Fe > Pb > H > Cu > Hg > Ag > Au

(a) Mg

श्रेणी: उच्च क्रियाशीलता।

विधि: विद्युत-अपघटन।

अयस्क: MgCl₂ (पिघले रूप में)।

Cathode पर: Mg²⁺ + 2e⁻ → Mg। Anode पर: 2Cl⁻ → Cl₂।

कार्बन से अपचयन क्यों नहीं? Mg, C से अधिक क्रियाशील।

(b) Cu

श्रेणी: कम क्रियाशीलता।

विधि: भर्जन + स्व-अपचयन।

अयस्क: CuFeS₂

भर्जन: 2CuFeS₂ + O₂ → Cu₂S + … स्व-अपचयन: 2Cu₂O + Cu₂S → 6Cu + SO₂।

(c) Au

श्रेणी: अति-कम क्रियाशीलता (श्रेणी का तल)।

विधि: मुक्त रूप में (panning या cyanide leaching)।

1. मुक्त सोना — सीधे चुनें। 2. सान्द्र रूप: साइनाइड लीचिंग + Zn विस्थापन।

क्यों कोई 'अपचयन' नहीं? Au यौगिक — दुर्लभ।

(d) Zn

श्रेणी: मध्यम क्रियाशीलता।

विधि: भर्जन + कार्बन से अपचयन।

अयस्क: ZnS या ZnCO₃

1. भर्जन: 2ZnS + 3O₂ → 2ZnO + 2SO₂ (या निस्तापन: ZnCO₃ → ZnO + CO₂)

2. अपचयन: ZnO + C → Zn + CO।

(e) Pb

श्रेणी: मध्यम क्रियाशीलता।

विधि: भर्जन + कार्बन से अपचयन।

अयस्क: PbS (Galena)

1. भर्जन: 2PbS + 3O₂ → 2PbO + 2SO₂ 2. अपचयन: PbO + C → Pb + CO।

सारांश तालिका

धातु क्रियाशीलता विधि मुख्य अभिक्रिया
Mg उच्च विद्युत-अपघटन Mg2++2eMgMg^{2+} + 2e^- \rightarrow Mg
Cu कम स्व-अपचयन 2Cu2O+Cu2S6Cu+SO22Cu_2O + Cu_2S \rightarrow 6Cu + SO_2
Au अति-कम प्राकृतिक (मुक्त रूप)
Zn मध्यम C से अपचयन ZnO+CZn+COZnO + C \rightarrow Zn + CO
Pb मध्यम C से अपचयन PbO+CPb+COPbO + C \rightarrow Pb + CO

सीख

'क्रियाशीलता तय करती है — विधि।'

[NCERT पाठ्यपुस्तक — आवेदन]

उदाहरण 8: एक रोचक — स्व-अपचयन

Cu का निष्कर्षण — स्व-अपचयन (self-reduction) की प्रक्रिया से कैसे होता है?

हल:

स्व-अपचयन — परिभाषा

'स्व-अपचयन' = अयस्क के एक भाग ने अयस्क के दूसरे भाग को अपचयित किया। कोई बाहरी अपचायक नहीं।

Cu के लिए चरण-दर-चरण

अयस्क: Cu₂S (Cu pyrites से प्राप्त 'matte')

चरण 1: आंशिक भर्जन

Cu₂S का कुछ हिस्सा वायु में जलाएँ:

2Cu2S+3O2Δ2Cu2O+2SO22Cu_2S + 3O_2 \xrightarrow{\Delta} 2Cu_2O + 2SO_2\uparrow

अब मिश्रण: Cu₂O + बचा हुआ Cu₂S।

चरण 2: स्व-अपचयन

Cu₂O और Cu₂S — आपस में अभिक्रिया:

2Cu2O+Cu2SΔ6Cu+SO22Cu_2O + Cu_2S \xrightarrow{\Delta} 6Cu + SO_2\uparrow

यानी:

  • Cu₂O ने O छोड़ा (अपचयित)।
  • Cu₂S ने S छोड़ा (ऑक्सीकृत)।
  • अंत में: शुद्ध Cu बना।

विश्लेषण

यहाँ कौन क्या?

Cu₂O में:

  • Cu: +1
  • अंत में Cu: 0 → अपचयन!

Cu₂S में:

  • S: -2
  • अंत में S: +4 (SO₂ में) → ऑक्सीकरण!

यानी — एक ही धातु (Cu) के एक यौगिक ने Cu को मुक्त किया।

क्यों Cu के लिए संभव?

Cu — कम क्रियाशील। Cu₂O और Cu₂S — दोनों कम स्थिर। Cu आसानी से मुक्त हो जाती।

क्या Fe के लिए भी?

Fe — अधिक क्रियाशील। Fe₂O₃ अधिक स्थिर। स्व-अपचयन से Fe नहीं निकल सकता।

Fe के लिए — कार्बन से अपचयन ज़रूरी।

एक रोचक तुलना

धातु निष्कर्षण अपचायक
Cu स्व-अपचयन अयस्क का दूसरा भाग (S²⁻)
Zn C से बाहरी कार्बन
Fe C से (CO) बाहरी कार्बन
Hg स्व-अपघटन कोई नहीं (केवल ऊष्मा)
Al विद्युत विद्युत प्रवाह

व्यावहारिक महत्व

स्व-अपचयन — कम ऊर्जा-गहन। कोयला नहीं चाहिए। उद्योग के लिए — कुशल।

यही कारण कि Cu — Bronze Age (3300 BC) से जाना।

[बोर्ड में 5-अंक]

उदाहरण 9: NCERT — फ्लक्स और स्लैग

फ्लक्स और स्लैग क्या हैं? Fe निष्कर्षण में इनकी भूमिका।

हल:

परिभाषाएँ

फ्लक्स (Flux): निष्कर्षण के दौरान — गैंग को हटाने के लिए डाला गया रसायन

स्लैग (Slag): फ्लक्स + गैंग की अभिक्रिया से बना पिघला यौगिक

सिद्धांत

अम्लीय फ्लक्स + क्षारकीय गैंग → स्लैग। क्षारकीय फ्लक्स + अम्लीय गैंग → स्लैग।

यानी — विपरीत प्रकृति।

फ्लक्स के प्रकार

1. अम्लीय फ्लक्स:

  • SiO2SiO_2 (सिलिका)
  • क्षारकीय अशुद्धि के लिए।

2. क्षारकीय फ्लक्स:

  • CaOCaO (चूना — CaCO₃ के अपघटन से)
  • MgOMgO
  • अम्लीय अशुद्धि के लिए।

Fe निष्कर्षण में फ्लक्स

अयस्क: Fe₂O₃ (Hematite)

अशुद्धि (गैंग): SiO2SiO_2 (सिलिका — रेत) — अम्लीय।

फ्लक्स: CaCO3CaCO_3 (चूना-पत्थर) → गर्म होकर CaO बनता — क्षारकीय।

अभिक्रियाएँ:

1. CaCO₃ का अपघटन: CaCO3ΔCaO+CO2CaCO_3 \xrightarrow{\Delta} CaO + CO_2

2. CaO + SiO₂ → CaSiO₃ (स्लैग): CaO+SiO2CaSiO3CaO + SiO_2 \rightarrow CaSiO_3

यह स्लैग — पिघला हुआ, हल्का, Fe के ऊपर तैरता। अलग छिद्र से बाहर।

उद्योग में स्लैग का उपयोग

स्लैग को 'अपशिष्ट' न समझें — कई उपयोग:

  1. सीमेंट निर्माण: Slag cement।
  2. सड़क निर्माण: Slag aggregate।
  3. उर्वरक: कैल्शियम स्रोत।
  4. फिलिंग सामग्री।

Cu निष्कर्षण में फ्लक्स

अशुद्धि: FeO फ्लक्स: SiO₂

अभिक्रिया: FeO+SiO2FeSiO3 (slag)FeO + SiO_2 \rightarrow FeSiO_3 \text{ (slag)}

यानी — Cu और Fe — फ्लक्स की मदद से अलग।

सारांश तालिका

धातु अशुद्धि (गैंग) फ्लक्स स्लैग
Fe SiO₂ (अम्लीय) CaCO₃ (क्षारकीय) CaSiO₃
Cu FeO (क्षारकीय) SiO₂ (अम्लीय) FeSiO₃

एक मूल नियम

अशुद्धि + फ्लक्स = स्लैग 'अम्लीय + क्षारकीय' संयोजन से।

यह 'धातुकर्म' का बुनियादी सिद्धांत।

[NCERT — महत्वपूर्ण]

उदाहरण 10: एक संख्यात्मक — Al का निष्कर्षण

100 kg Al₂O₃ से कितना Al मिलेगा? (Al=27, O=16)

हल:

अभिक्रिया: 2Al2O3विद्युत4Al+3O22Al_2O_3 \xrightarrow{\text{विद्युत}} 4Al + 3O_2

अणुभार:

  • Al2O3=(2×27)+(3×16)=54+48=102Al_2O_3 = (2 \times 27) + (3 \times 16) = 54 + 48 = 102 g/mol
  • 1 mol Al = 27 g

अनुपात:

  • 1 mol Al₂O₃ → 2 mol Al
  • 102 g Al₂O₃ → 54 g Al

100 kg Al₂O₃ से:

Al=54102×100=52.94 kg\text{Al} = \frac{54}{102} \times 100 = 52.94 \text{ kg}

53 kg Al

उत्तर: 100 kg Al₂O₃ से लगभग 53 kg Al मिलेगा।

अतिरिक्त जानकारी

उत्पादकता:

  • 100 kg Al₂O₃ × 53% = 53 kg Al।
  • Al₂O₃ में Al का प्रतिशत = 53%।

बायर प्रक्रिया से: ~2 टन बॉक्साइट → ~1 टन Al₂O₃।

हॉल-हीरॉल्ट से: ~2 टन Al₂O₃ → ~1 टन Al।

कुल: ~4 टन बॉक्साइट → ~1 टन शुद्ध Al।

ऊर्जा की गणना

Al निष्कर्षण के लिए ऊर्जा: ~14-15 kWh प्रति kg Al।

100 kg Al₂O₃ से 53 kg Al → ~750-800 kWh विद्युत।

यह एक माह की भारतीय औसत घरेलू खपत के बराबर!

क्यों Al पुनर्चक्रण ज़रूरी?

1 kg Al पुनर्चक्रित → 95% कम ऊर्जा। केवल 0.7-0.8 kWh, बजाय 14-15 kWh।

यानी पुनर्चक्रण = ऊर्जा बचत + पर्यावरण लाभ

'Aluminium can recycling' — दुनिया भर में।

[बोर्ड में 3-अंक संख्यात्मक]

उदाहरण 11: एक तार्किक — सही या गलत?

निम्न कथनों को सही/गलत बताएँ — कारण के साथ:

(a) Al को कार्बन से अपचयित किया जा सकता है। (b) Hg का निष्कर्षण विद्युत-अपघटन से होता है। (c) ZnCO₃ को पहले निस्तापित किया जाता है। (d) Na को जलीय NaCl के विद्युत-अपघटन से प्राप्त किया जाता है।

हल:

(a) Al को कार्बन से अपचयित — गलत ✗

कारण: Al, C से अधिक क्रियाशील।

क्रियाशीलता: Al>CAl > C

अधिक क्रियाशील — कम क्रियाशील को विस्थापित करता। उल्टा नहीं।

अतः: C, Al₂O₃ से Al नहीं निकाल सकता।

सही विधि: विद्युत-अपघटन (Hall-Héroult)।

(b) Hg का विद्युत-अपघटन से — गलत ✗

कारण: Hg — कम क्रियाशील। HgO अति-अस्थिर — सिर्फ गर्म करने पर अपघटित।

विद्युत-अपघटन — अनावश्यक खर्च।

सही विधि: 2HgS+3O22HgO+2SO22HgS + 3O_2 \rightarrow 2HgO + 2SO_2 (भर्जन) 2HgO2Hg+O22HgO \rightarrow 2Hg + O_2 (अपघटन)

केवल गर्म करना — पर्याप्त।

(c) ZnCO₃ को पहले निस्तापित — सही ✓

कारण: ZnCO₃ कार्बोनेट अयस्क। निस्तापन = कार्बोनेट को ऑक्साइड में बदलना।

ZnCO3ΔZnO+CO2ZnCO_3 \xrightarrow{\Delta} ZnO + CO_2

अब ZnO का अपचयन कार्बन से सरल।

यह मानक विधि

(d) Na को जलीय NaCl से — गलत ✗

कारण: जलीय NaCl में:

  • Cathode पर: Na vs H₂O — Na अधिक क्रियाशील।
  • अतः H₂O अपचयित (H₂ निकलता)।
  • Na नहीं बनता।

उत्पाद: H₂ + Cl₂ + NaOH (क्लोर-एल्कली प्रक्रिया)।

सही विधि: पिघले NaCl का विद्युत-अपघटन (Down's cell)।

सारांश

कथन सही/गलत सही उत्तर
Al + C ✗ गलत विद्युत-अपघटन
Hg + विद्युत ✗ गलत भर्जन + अपघटन
ZnCO₃ + निस्तापन ✓ सही
Na + जलीय ✗ गलत पिघला NaCl

सीख

ज्ञान = क्रियाशीलता श्रेणी + अयस्क प्रकार।

[बोर्ड में 5-अंक तार्किक]

उदाहरण 12: NCERT — Cu का निष्कर्षण

Copper pyrites (CuFeS₂) से Cu का निष्कर्षण — सब चरणों के साथ बताएँ।

हल:

अयस्क

Copper pyrites — CuFeS2CuFeS_2 (Cu और Fe दोनों के सल्फाइड)।

चरण 1: सान्द्रण

फेन-प्लवन विधि (अनुभाग 6)। अब सान्द्रित CuFeS₂।

चरण 2: भर्जन

हवा में गर्म:

2CuFeS2+3O2Δ2Cu2S+2FeO+2SO22CuFeS_2 + 3O_2 \xrightarrow{\Delta} 2Cu_2S + 2FeO + 2SO_2

उत्पाद: Cu₂S, FeO, SO₂।

चरण 3: फ्लक्स के साथ गलाना (Smelting)

'Reverberatory furnace' में:

FeO + SiO₂ (फ्लक्स) → FeSiO₃ (स्लैग):

FeO+SiO2FeSiO3FeO + SiO_2 \rightarrow FeSiO_3

यानी — Fe slag के रूप में अलग। Cu₂S — 'matte' के रूप में नीचे।

चरण 4: स्व-अपचयन (Self Reduction)

'Bessemer converter' में Cu₂S का आंशिक भर्जन:

2Cu2S+3O22Cu2O+2SO22Cu_2S + 3O_2 \rightarrow 2Cu_2O + 2SO_2

अब मिश्रण: Cu₂O + Cu₂S।

स्व-अपचयन:

2Cu2O+Cu2S6Cu+SO22Cu_2O + Cu_2S \rightarrow 6Cu + SO_2\uparrow

अंत में — खुरदुरा (blister) Cu यह 99% शुद्ध, परंतु अशुद्धियाँ हैं।

चरण 5: परिष्करण (Refining) — अनुभाग 8

विद्युत-अपघटनी परिष्करण से 99.99% शुद्ध Cu।

प्रवाह आरेख

CuFeS₂ (Copper pyrites)
    ↓ सान्द्रण (फेन-प्लवन)
सान्द्रित CuFeS₂
    ↓ भर्जन (हवा + गर्म)
Cu₂S + FeO + SO₂
    ↓ + SiO₂ (फ्लक्स)
Cu₂S (matte) + FeSiO₃ (slag)
    ↓ हवा + गर्म
Cu₂O
    ↓ + Cu₂S (बचा)
6Cu + SO₂  (Blister Cu)
    ↓ विद्युत-अपघटनी परिष्करण
शुद्ध Cu (99.99%)

कुल अभिक्रिया (एक नज़र में)

अयस्क → धातु — कई चरणों में।

प्रत्येक अभिक्रिया का उद्देश्य:

  • भर्जन: सल्फाइड को ऑक्साइड में।
  • गलाना (smelting): अशुद्धियाँ हटाना।
  • स्व-अपचयन: Cu मुक्त करना।
  • परिष्करण: शुद्धता।

Cu का व्यावहारिक उपयोग

99.99% शुद्ध Cu — विद्युत के तार बनाने। उच्च चालकता। टिकाऊपन।

हर साल भारत में लाखों टन Cu का उत्पादन।

[NCERT — हर साल बोर्ड में]

उदाहरण 13: एक तुलनात्मक — कार्बन से अपचयन के 3 उदाहरण

Fe, Zn, Pb — तीनों के कार्बन से अपचयन की अभिक्रियाएँ।

हल:

सामान्य सिद्धांत

तीनों मध्यम क्रियाशील। तीनों के लिए: अयस्क → ऑक्साइड → कार्बन से अपचयन।

Fe निष्कर्षण

अयस्क: Fe₂O₃ (Hematite)

मुख्य अभिक्रियाएँ (Blast Furnace):

1. कोयला + हवा: C+O2CO2C + O_2 \rightarrow CO_2

2. CO₂ + और कोयला: CO2+C2COCO_2 + C \rightarrow 2CO

3. मुख्य अपचयन: Fe2O3+3CO2Fe+3CO2Fe_2O_3 + 3CO \rightarrow 2Fe + 3CO_2

यहाँ अपचायक: CO (न कि C सीधे)।

उपयुक्त ताप: ~1500°C।

Zn निष्कर्षण

अयस्क: ZnS (Zinc blende)

अभिक्रियाएँ:

1. भर्जन: 2ZnS+3O22ZnO+2SO22ZnS + 3O_2 \rightarrow 2ZnO + 2SO_2

2. अपचयन: ZnO+CZn+COZnO + C \rightarrow Zn + CO\uparrow

यहाँ अपचायक: C सीधे।

उपयुक्त ताप: ~1100°C।

Pb निष्कर्षण

अयस्क: PbS (Galena)

अभिक्रियाएँ:

1. भर्जन: 2PbS+3O22PbO+2SO22PbS + 3O_2 \rightarrow 2PbO + 2SO_2

2. अपचयन: PbO+CPb+COPbO + C \rightarrow Pb + CO\uparrow

अपचायक: C सीधे।

उपयुक्त ताप: ~1000°C।

तुलनात्मक तालिका

धातु अयस्क प्रथम चरण अपचायक ताप
Fe Fe₂O₃ (कोई नहीं) CO 1500°C
Zn ZnS भर्जन → ZnO C 1100°C
Pb PbS भर्जन → PbO C 1000°C

क्यों Fe में CO, अन्य में C सीधे?

Blast Furnace में:

  • ऊँची भट्टी।
  • गर्म हवा अंदर।
  • CO बनती है — पूरी भट्टी में।
  • CO अधिक प्रबल अपचायक — विशेष रूप से कम ताप पर।

Zn, Pb के लिए छोटी भट्टी:

  • अधिक ताप (1000-1100°C)।
  • C सीधे ही पर्याप्त।

एक रोचक बिंदु

यदि Zn गैस अवस्था में बने (1000°C से ऊपर): Zn गैस ठंडी हो — द्रव → ठोस। यानी 'distillation' से शुद्ध Zn।

Fe — पिघलकर तरल। नीचे एकत्र।

सीख

तीनों = कार्बन का अपचयन। पर — विधि के विवरण भिन्न। प्रत्येक धातु के लिए — विशेष परिस्थितियाँ।

[बोर्ड में 5-अंक तुलनात्मक]

उदाहरण 14: NCERT — एक मिश्र प्रश्न

निम्न के उत्तर दें:

(a) Bauxite का सूत्र क्या है? (b) Cryolite की भूमिका क्या? (c) Hall-Héroult प्रक्रिया में Cathode और Anode के पदार्थ? (d) कुल अभिक्रिया क्या?

हल:

(a) Bauxite का सूत्र

सूत्र: Al2O32H2OAl_2O_3 \cdot 2H_2O

यानी: हाइड्रेटेड एल्यूमिनियम ऑक्साइड।

'Bauxite' — फ्रांस के Les Baux गाँव के नाम पर। (वहाँ पहली बार खोजा।)

(b) Cryolite की भूमिका

Cryolite (Na3AlF6Na_3AlF_6) — एक 'विलायक':

Al₂O₃ का गलनांक — ~2050°C। (बहुत महंगा।) Cryolite में Al₂O₃ डालें — गलनांक 950°C तक।

दो काम:

  1. गलनांक कम करना।
  2. विद्युत चालकता बढ़ाना।

अतिरिक्त: CaF₂ भी डाला जाता — और कम गलनांक।

(c) Cathode और Anode

Cathode (-):

  • कार्बन की लाइनिंग (स्टील बक्से के अंदर)।
  • कार्बन ही — Cathode का काम।

Anode (+):

  • कार्बन की छड़ें (ऊपर से उतारी गईं)।
  • समय-समय पर बदले जाते — क्योंकि जलते रहते।

(d) कुल अभिक्रिया

विद्युत-अपघटन:

2Al2O3(l)विद्युत4Al(l)+3O2(g)2Al_2O_3(l) \xrightarrow{\text{विद्युत}} 4Al(l) + 3O_2(g)

Cathode पर: Al3++3eAlAl^{3+} + 3e^- \rightarrow Al Anode पर: 2O2O2+4e2O^{2-} \rightarrow O_2 + 4e^-

Anode पर निकली O₂ कार्बन से क्रिया: C+O2CO2C + O_2 \rightarrow CO_2

यही कारण कार्बन Anode धीरे-धीरे जलते।

व्यावहारिक विवरण

ऊर्जा उपयोग:

  • ~14-15 kWh प्रति kg Al।
  • भारत में: राज्य-स्तरीय बिजली विद्युत-संयंत्र।
  • पास के राज्यों में: Hindalco, NALCO, Vedanta।

उत्पादन:

  • 1 kg Al → ~2 kg Al₂O₃ चाहिए।
  • 1 kg Al₂O₃ → ~2 kg बॉक्साइट चाहिए।
  • कुल: 1 kg Al → ~4 kg बॉक्साइट।

एक रोचक तथ्य

Hall-Héroult से पहले — Al इतना दुर्लभ था कि सोने से भी महंगा!

1855 की पेरिस प्रदर्शनी में Al — 'विश्व का सबसे महंगा धातु' घोषित।

Hall (USA) और Héroult (फ्रांस) — दोनों ने 1886 में, अलग-अलग, यह विधि खोजी।

तब से Al की कीमत — 200 गुना घटी।

आज: Al → सब जगह — विमान, गाड़ी, खिड़कियाँ, बर्तन।

[NCERT — महत्वपूर्ण]

उदाहरण 15: एक रोचक — स्टील का इतिहास

Fe निष्कर्षण से 'स्टील' तक — पूरी प्रक्रिया।

हल:

चरण 1: Blast Furnace से Pig Iron

Fe₂O₃ + 3CO → 2Fe + 3CO₂ (Blast Furnace में)

उत्पाद: Pig iron (कच्चा लोहा)

  • 4% C
  • अन्य अशुद्धियाँ (S, P, Si, Mn)
  • भंगुर, कमज़ोर।

चरण 2: Pig Iron से Cast Iron

Pig iron को छोटी भट्टी में पिघलाकर — कुछ अशुद्धियाँ हटाएँ।

उत्पाद: Cast iron

  • 2-4% C
  • कठोर, परंतु भंगुर।
  • उपयोग: रसोई के भारी बर्तन, पाइप।

चरण 3: Cast Iron से Wrought Iron

अधिक शुद्धीकरण — अधिकांश कार्बन हटाना।

उत्पाद: Wrought iron

  • < 0.1% C
  • मृदु, तन्य।
  • उपयोग: गेट, ग्रिल।

चरण 4: स्टील का निर्माण

Cast iron को विशेष भट्टी में। कार्बन और अन्य अशुद्धियाँ नियंत्रित।

उत्पाद: स्टील (Steel)

  • 0.2-2% C
  • अति-कठोर और लचीला (दोनों)।
  • आधुनिक निर्माण की रीढ़।

Bessemer प्रक्रिया (Steel निर्माण)

व्यवस्था:

  • 'Bessemer converter' — अंडे के आकार का।
  • पिघले pig iron में हवा की धारा।

अभिक्रियाएँ:

1. C + O₂ → CO₂ (कार्बन हटा) 2. Si + O₂ → SiO₂ 3. P → P₂O₅ 4. Mn → MnO

अशुद्धियाँ — स्लैग के रूप में। अंत में: नियंत्रित C वाला स्टील।

स्टील के प्रकार

प्रकार C % उपयोग
Mild Steel 0.2-0.3% भवन, गाड़ियाँ
Medium Carbon Steel 0.3-0.6% रेल पटरियाँ
High Carbon Steel 0.6-1.5% औज़ार, चाकू
Stainless Steel + Cr, Ni बर्तन, रसोई

स्टील में मिश्रधातु

स्टील = Fe + C + अन्य।

अन्य धातुएँ:

  • Cr (स्टेनलेस): संक्षारण-प्रतिरोधी।
  • Ni: टिकाऊ।
  • Mn: कठोरता।
  • W: उच्च-तापीय।
  • V: टूल स्टील।

भारत में Fe उद्योग

प्रमुख कंपनियाँ:

  • TATA Steel (जमशेदपुर)
  • SAIL (Bhilai, Bokaro)
  • JSW Steel
  • Vizag Steel

भारत — विश्व का दूसरा सबसे बड़ा स्टील उत्पादक।

पूरी प्रक्रिया का सारांश

Fe₂O₃ (अयस्क)
   ↓ Blast Furnace + कोक + CaCO₃
Pig Iron (4% C)
   ↓ कुछ शुद्धीकरण
Cast Iron (2-4% C)
   ↓ अधिक शुद्धीकरण
Wrought Iron (<0.1% C) या Steel (0.2-2% C)

एक रोचक तथ्य

1856 में Bessemer की खोज — आधुनिक 'Industrial Revolution' की एक रीढ़। तब तक स्टील महंगा था। Bessemer के बाद — सस्ता स्टील — रेल, इमारतें, पुल।

[बोर्ड + सामान्य ज्ञान]

उदाहरण 16: एक समापन प्रश्न

(a) धातु निष्कर्षण के 3 चरण। (b) Al का निष्कर्षण — पूरा। (c) Fe निष्कर्षण की मुख्य अभिक्रिया। (d) क्यों Na को कार्बन से अपचयित नहीं किया जा सकता?

हल:

(a) निष्कर्षण के 3 चरण

चरण 1: सान्द्रण (Concentration)

  • गैंग हटाना।
  • विधियाँ: हस्त-चयन, गुरुत्वीय, चुंबकीय, फेन-प्लवन।

चरण 2: अपचयन (Reduction)

  • अयस्क → धातु।
  • विधियाँ: कार्बन से, विद्युत, स्व-अपचयन।

चरण 3: परिष्करण (Refining)

  • शुद्धीकरण।
  • मुख्य: विद्युत-अपघटनी।

(b) Al का निष्कर्षण

अयस्क: Bauxite (Al₂O₃·2H₂O)

1. सान्द्रण (Bayer): Al2O3+2NaOH2NaAlO2+H2OAl_2O_3 + 2NaOH \rightarrow 2NaAlO_2 + H_2O NaAlO2+2H2ONaOH+Al(OH)3NaAlO_2 + 2H_2O \rightarrow NaOH + Al(OH)_3 2Al(OH)3ΔAl2O3+3H2O2Al(OH)_3 \xrightarrow{\Delta} Al_2O_3 + 3H_2O

2. विद्युत-अपघटन (Hall-Héroult):

  • Al₂O₃ + क्रायोलाइट (Na₃AlF₆) → गलनांक 950°C।
  • Cathode: Al3++3eAlAl^{3+} + 3e^- \rightarrow Al
  • Anode: 2O2O2+4e2O^{2-} \rightarrow O_2 + 4e^-

कुल: 2Al2O3विद्युत4Al+3O22Al_2O_3 \xrightarrow{\text{विद्युत}} 4Al + 3O_2

(c) Fe निष्कर्षण की मुख्य अभिक्रिया

अयस्क: Fe₂O₃

Blast Furnace में:

अपचायक: CO (कोयले से बनी)।

Fe2O3+3CO2Fe+3CO2Fe_2O_3 + 3CO \rightarrow 2Fe + 3CO_2

यह मुख्य अभिक्रिया

अन्य:

  • C+O2CO2C + O_2 \rightarrow CO_2
  • CO2+C2COCO_2 + C \rightarrow 2CO
  • CaCO3CaO+CO2CaCO_3 \rightarrow CaO + CO_2
  • CaO+SiO2CaSiO3CaO + SiO_2 \rightarrow CaSiO_3 (slag)

(d) क्यों Na को C से अपचयित नहीं?

सिद्धांत: अधिक क्रियाशील धातु — कम क्रियाशील को विस्थापित।

क्रियाशीलता: Na > C।

अतः: Na, C से अधिक प्रबलता से O₂ से जुड़ा। C, Na₂O से Na को मुक्त नहीं कर सकता।

यदि कोशिश करें: Na2O+C?Na_2O + C \rightarrow ? कोई अभिक्रिया नहीं।

उल्टा हो सकता: Na+CO2Na2O+CNa + CO_2 \rightarrow Na_2O + C — पर यह Na निष्कर्षण नहीं।

सही विधि: पिघले NaCl का विद्युत-अपघटन (Down's cell)।

यहाँ विद्युत प्रवाह — Na को 'मुक्त' करने के लिए पर्याप्त ऊर्जा।

सारांश

अति-क्रियाशील धातुएँ (Na, K, Ca, Mg, Al) — विद्युत-अपघटन। मध्यम (Zn, Fe, Pb) — कार्बन से अपचयन। कम (Hg, Cu, Ag) — सीधे गर्म।

यह एक मूल नियम — पूरे अनुभाग का सार।

[बोर्ड में 5-अंक मिश्र प्रश्न]