अध्याय सारांश
यह खंड पूरे अध्याय 4 — कृषि का संक्षिप्त पुनरावलोकन है। इसे बोर्ड परीक्षा से पहले अंतिम समय की पुनरावृत्ति के लिए उपयोग करें।
कृषि भारत की सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिक गतिविधि है, जो लगभग दो-तिहाई जनसंख्या का भरण-पोषण करती है। कृषि के प्रकार हैं आदिम निर्वाह (कर्तन-दहन / झूमिंग), गहन निर्वाह (छोटे खेत, अधिक श्रम), वाणिज्यिक (बाज़ार-उन्मुख, आधुनिक निवेश) और रोपण (एकल फसल, बड़ा क्षेत्र — चाय, कॉफ़ी, रबड़)।
फसल ऋतुएँ और खाद्य फसलें
- ऋतुएँ: रबी (शीत ऋतु में बोई जाने वाली, अक्टूबर-दिसंबर: गेहूँ, चना, सरसों) · खरीफ़ (मानसून में बोई जाने वाली: चावल, मक्का, कपास, जूट, बाजरा) · ज़ायद (छोटी ग्रीष्म ऋतु: तरबूज़, खीरा)।
- चावल — मुख्य खाद्य, खरीफ़, >25°C, >100 cm वर्षा; चीन के बाद दूसरा। गेहूँ — रबी, ठंडी ऋतु, 50-75 cm; गंगा-सतलुज + दक्कन।
- बाजरा (millets) — ज्वार (तीसरी खाद्य फसल), बाजरा (रेतीली मिट्टी), रागी (लौह/कैल्शियम-समृद्ध)। मक्का — खाद्य+चारा, 21-27°C। दालें — भारत सबसे बड़ा उत्पादक व उपभोक्ता; फलीदार, नाइट्रोजन स्थिरीकरण (अरहर को छोड़कर)।
नकदी, रेशा और गैर-खाद्य फसलें
- गन्ना — 21-27°C, 75-100 cm; ब्राज़ील के बाद दूसरा; चीनी/गुड़/शीरा। तिलहन — फसली क्षेत्र का ~12%; मूँगफली (खरीफ़, गुजरात) ~आधा।
- चाय — रोपण पेय, ह्यूमस-समृद्ध मिट्टी, गर्म नम पालारहित; चीन के बाद दूसरा। कॉफ़ी — अरेबिका (यमन से), नीलगिरि।
- रबड़ — भूमध्यरेखीय, >200 cm वर्षा, >25°C; केरल, तमिलनाडु। कपास — काली मिट्टी दक्कन, 210 पालारहित दिन, खरीफ़; चीन के बाद दूसरा। जूट — 'सुनहरा रेशा', बाढ़-मैदानी मिट्टी, पश्चिम बंगाल। रेशम कीट पालन (sericulture) = रेशम के कीड़ों का पालन।
सुधार और वैश्वीकरण
- हरित क्रांति (HYV/पैकेज तकनीक → खाद्यान्न) · श्वेत क्रांति / Operation Flood (दूध)। भूमि सुधार (कमज़ोर कार्यान्वयन)।
- संस्थागत सहायता: फसल बीमा, ग्रामीण बैंक, सहकारी समितियाँ, KCC, PAIS, मौसम बुलेटिन, MSP।
- भूदान-ग्रामदान (विनोबा भावे; पोचमपल्ली; रक्तहीन क्रांति)।
- वैश्वीकरण: विकसित देशों की सब्सिडीयुक्त कृषि से प्रतिस्पर्धा; आगे का रास्ता = जीन क्रांति, जैविक खेती, उचित मूल्य, खाद्य सुरक्षा।
त्वरित पुनरावृत्ति — अवश्य जानने योग्य तथ्य
- भारत की दो-तिहाई जनसंख्या कृषि पर निर्भर है। कृषि के प्रकार: आदिम निर्वाह, गहन निर्वाह, वाणिज्यिक, रोपण।
- रबी = शीत ऋतु (गेहूँ, चना); खरीफ़ = मानसून (चावल, कपास); ज़ायद = छोटी ग्रीष्म ऋतु (तरबूज़)।
- चावल चीन के बाद दूसरा; गन्ना ब्राज़ील के बाद दूसरा; कपास और चाय चीन के बाद दूसरा।
- जूट = सुनहरा रेशा (पश्चिम बंगाल); मूँगफली = गुजरात; कॉफ़ी = नीलगिरि (अरेबिका यमन से)।
- हरित क्रांति = खाद्यान्न; श्वेत क्रांति = दूध; भूदान-ग्रामदान = विनोबा भावे।
त्वरित पुनरावृत्ति — प्रायः भ्रमित करने वाले बिंदु
- चावल (खरीफ़, गर्म, नम) बनाम गेहूँ (रबी, ठंडा, मध्यम वर्षा)।
- कपास (सूखी काली मिट्टी, दक्कन) बनाम जूट (नम बाढ़-मैदानी मिट्टी, बंगाल)।
- हरित क्रांति (फसलें) बनाम श्वेत क्रांति (दूध) बनाम जीन क्रांति (आनुवंशिक अभियांत्रिकी)।
- भूदान (भूमि दान) बनाम ग्रामदान (गाँव दान)।
- वाणिज्यिक बनाम निर्वाह क्षेत्र पर निर्भर करता है (चावल: पंजाब में वाणिज्यिक, ओडिशा में निर्वाह)।