मोटे अनाज (Millets) — पौष्टिक मोटे अनाज
ज्वार, बाजरा और रागी भारत में उगाए जाने वाले महत्वपूर्ण मोटे अनाज (millets) हैं। यद्यपि इन्हें मोटे अनाज (coarse grains) कहा जाता है, फिर भी इनका पोषण मूल्य बहुत अधिक होता है — उदाहरण के लिए, रागी में लोहा, कैल्शियम, अन्य सूक्ष्म पोषक तत्व और रुक्षांश (roughage) बहुत अधिक मात्रा में होते हैं।
- ज्वार क्षेत्रफल और उत्पादन की दृष्टि से तीसरी सबसे महत्वपूर्ण खाद्य फसल है। यह एक वर्षा-आधारित फसल है जो अधिकतर नम क्षेत्रों में उगाई जाती है और इसे कम सिंचाई की आवश्यकता होती है। प्रमुख राज्य: महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश।
- बाजरा बलुई मिट्टी और उथली काली मिट्टी पर अच्छी तरह उगता है। प्रमुख राज्य: राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और हरियाणा।
- रागी शुष्क क्षेत्रों की फसल है, जो लाल, काली, बलुई और दोमट मिट्टी पर उगती है। प्रमुख राज्य: कर्नाटक, तमिलनाडु, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और अन्य।

आरेख के अंग्रेज़ी लेबलों के हिन्दी अर्थ:
| English (in image) | हिन्दी |
|---|---|
| Millets, maize and pulses | मोटे अनाज, मक्का और दालें |
| Jowar - rain-fed, 3rd most important food crop | ज्वार - वर्षा-आधारित, तीसरी प्रमुख खाद्य फसल |
| Bajra - sandy and shallow black soils | बाजरा - बलुई और उथली काली मृदा |
| Ragi - rich in iron and calcium | रागी - लौह व कैल्सियम से भरपूर |
| Maize - food and fodder, 21-27°C | मक्का - भोजन व चारा, 21-27°C |
| Pulses (tur, moong, urad, gram) - protein source, fix nitrogen | दालें (तुअर, मूँग, उड़द, चना) - प्रोटीन स्रोत, नाइट्रोजन स्थिरीकरण |
मक्का (Maize) — खाद्य और चारा
मक्का एक ऐसी फसल है जिसका उपयोग खाद्य और चारा दोनों रूप में किया जाता है।
- यह एक खरीफ फसल है जिसे 21°C से 27°C के बीच तापमान की आवश्यकता होती है और यह पुरानी जलोढ़ मिट्टी में अच्छी तरह उगती है। बिहार जैसे कुछ राज्यों में मक्का रबी ऋतु में भी उगाई जाती है।
- आधुनिक साधनों — अधिक उपज देने वाले (HYV) बीज, उर्वरक और सिंचाई — के उपयोग से मक्का का उत्पादन बढ़ा है।
- प्रमुख उत्पादक राज्य: कर्नाटक, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना।
दालें (Pulses) — शाकाहारी आहार का प्रोटीन
भारत विश्व में दालों का सबसे बड़ा उत्पादक होने के साथ-साथ सबसे बड़ा उपभोक्ता भी है। दालें शाकाहारी आहार में प्रोटीन का प्रमुख स्रोत हैं।
- प्रमुख दालें: तूर (अरहर), उड़द, मूँग, मसूर, मटर और चना।
- दालों को कम नमी की आवश्यकता होती है और ये शुष्क परिस्थितियों में भी जीवित रहती हैं।
- दलहनी फसलें (leguminous crops) होने के कारण, अरहर को छोड़कर सभी दालें वायु से नाइट्रोजन स्थिरीकरण करके मृदा की उर्वरता को पुनर्स्थापित करने में सहायता करती हैं — इसलिए इन्हें अधिकतर अन्य फसलों के साथ फसल चक्र (rotation) में उगाया जाता है।
- प्रमुख उत्पादक राज्य: मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक।
मुख्य बिंदु: दालें मिट्टी को नाइट्रोजन से समृद्ध करती हैं, यही कारण है कि किसान इन्हें अनाजों के साथ फसल चक्र में उगाते हैं।
प्रश्न और उत्तर
प्र1. मोटे अनाजों को coarse grains क्यों कहा जाता है, और वे मूल्यवान क्यों हैं?
उत्तर: ज्वार, बाजरा और रागी को उनकी बनावट के कारण मोटे अनाज (coarse grains) कहा जाता है, परंतु इनका पोषण मूल्य बहुत अधिक होता है। उदाहरण के लिए, रागी में लोहा, कैल्शियम, अन्य सूक्ष्म पोषक तत्व और रुक्षांश (roughage) बहुत अधिक मात्रा में होते हैं, जिससे मोटे अनाज अत्यधिक पौष्टिक भोजन बन जाते हैं।
प्र2. मक्का के लिए आवश्यक परिस्थितियों और उत्पादक राज्यों को बताइए।
उत्तर: मक्का एक खरीफ फसल है (बिहार जैसे कुछ राज्यों में रबी में उगाई जाती है) जिसे 21-27°C तापमान और पुरानी जलोढ़ मिट्टी की आवश्यकता होती है। HYV बीज, उर्वरक और सिंचाई से इसका उत्पादन बढ़ा है। प्रमुख उत्पादक राज्य हैं कर्नाटक, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना।
प्र3. दालें क्यों महत्वपूर्ण हैं, और वे मिट्टी की सहायता कैसे करती हैं?
उत्तर: भारत दालों का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है, जो शाकाहारी आहार में प्रोटीन का प्रमुख स्रोत हैं। दलहनी फसलें (leguminous crops) होने के कारण, अरहर को छोड़कर सभी दालें वायु से नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करती हैं और मृदा की उर्वरता को पुनर्स्थापित करती हैं, इसलिए इन्हें अन्य फसलों के साथ फसल चक्र (rotation) में उगाया जाता है। इन्हें कम नमी की आवश्यकता होती है और ये शुष्क परिस्थितियों में भी जीवित रहती हैं।